रांची : दो साल में 10 करोड़ खर्च, फिर भी बेहाल है स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, खेल विभाग ने जतायी नाराजगी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Oct 2018 8:24 AM
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मांगा तीन साल का उपयोगिता प्रमाण रांची : सीसीएल द्वारा होटवार और मोरहाबादी स्थित एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम के रखरखाव पर पिछले दो साल में 10 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं, फिर भी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बदहाल है. यह राशि झारखंड सरकार के खेलकूद व कला संस्कृति विभाग ने सीसीएल को दी है. विभाग के निदेशक […]
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मांगा तीन साल का उपयोगिता प्रमाण
रांची : सीसीएल द्वारा होटवार और मोरहाबादी स्थित एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम के रखरखाव पर पिछले दो साल में 10 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं, फिर भी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बदहाल है. यह राशि झारखंड सरकार के खेलकूद व कला संस्कृति विभाग ने सीसीएल को दी है. विभाग के निदेशक अनिल कुमार सिंह ने लिखा है कि खेलगांव परिसर में स्थित भवनों के सही रखरखाव नहीं होने के कारण खेल संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो रही हैं.
एकरारनामा के अनुसार, खेल गांव परिसर स्थित भवनों के रखरखाव की जिम्मेदारी झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी की है. सोसाइटी को 2016-17 से अब तक कुल 10 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में उपलब्ध कराया जा चुके हैं, परंतु अभी तक किये गये व्यय का अंकेक्षण प्रतिवेदन एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया है. इससे यह पता ही नहीं चल रहा है कि पैसा को कहां और कैसे खर्च किया गया है.
शूटिंग रेंज की दशा खराब
बड़ी लागत से यहां शूटिंग रेंज का निर्माण कराया गया था. अभी इसकी स्थिति खराब हो गयी है. फॉल्स सीलिंग टूट रहे हैं. कई जगहों पर शेड पर लगी लकड़ियां भी दीमक चाट गये हैं. धीरे-धीरे इसकी स्थिति और खराब होती जा रही है. इसमें किसी तरह खिलाड़ियों का प्रैक्टिस हो रहा है.
वेलोड्रम स्टेडियम का हाल बुरा
यहां साइकिल प्रतियोगिता के लिए वेलोड्रम स्टेडियम तैयार किया गया था. यह अत्याधुनिक सुविधाअों से लैस था, लेकिन हाल के दिनों में इसकी स्थिति काफी खराब बतायी जा रही है. हरवंश टाना भगत स्टेडियम को भी देखने से स्पष्ट होता है कि रखरखाव अच्छा नहीं है.
हाल ही में वहां हुए कार्यक्रम के मद्देनजर उसे रिपेयर करा दिया गया. अन्य स्टेडियम का भी रखरखाव गुणवत्ता पूर्वक नहीं हो रहा है. वहां जानेवाले खिलाड़ियों का भी कहना है कि रखरखाव के नाम पर केवल गार्डेनिंग दिखता है और पूरे परिसर में केवल गार्ड नजर आते हैं.
खेलकूद विभाग ने जो उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगा था. वह दे दिया गया है. परिसर का संचालन सीसीएल पूरी ईमानदारी से कर रहा है. यहां बच्चों का भविष्य तैयार हो रहा है. इसका परिणाम भी दिखने लगा है.
आरएस महापात्र, निदेशक कार्मिक, सीसीएल
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