केजीवीके के साथ काम करेगी गेन : कर्नल

Updated at : 11 Jun 2014 8:15 AM (IST)
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केजीवीके के साथ काम करेगी गेन : कर्नल

रांची: विश्व की अग्रणी स्वयंसेवी संस्था ग्लोबल एलायंस फोर इंप्रूव्ड न्यूट्रिशन (गेन) ने झारखंड में कृषि ग्राम विकास केंद्र (केजीवीके) के साथ काम करने का निर्णय लिया है. मंगलवार को इस आशय की घोषणा गेन के प्रमुख कर्नल राजन शंकर ने की. उन्होंने कहा कि ऊषा मार्टिन कंपनी की सहयोगी संस्था केजीवीके ने प्रबंधन के […]

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रांची: विश्व की अग्रणी स्वयंसेवी संस्था ग्लोबल एलायंस फोर इंप्रूव्ड न्यूट्रिशन (गेन) ने झारखंड में कृषि ग्राम विकास केंद्र (केजीवीके) के साथ काम करने का निर्णय लिया है. मंगलवार को इस आशय की घोषणा गेन के प्रमुख कर्नल राजन शंकर ने की. उन्होंने कहा कि ऊषा मार्टिन कंपनी की सहयोगी संस्था केजीवीके ने प्रबंधन के टूल से समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित कर बेहतर काम किया है. इसी को लेकर उन्होंने केजीवीके के साथ न्यूट्रिशन के क्षेत्र में काम करने का निर्णय लिया है.

उन्होंने कहा कि गेन ओड़िशा, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और बिहार में महिलाओं व बच्चों की आजीविका और पोषण तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि झारखंड, ओड़िशा में कुपोषण और महिलाओं में एनिमिया अधिक है. देश में आज भी आधी आबादी कुपोषित है अथवा ओवर न्यूट्रिशन की शिकार है. उनका कहना है कि समेकित बाल विकास कार्यक्रम (आइसीडीएस) के लिए केंद्र और राज्य सरकारों का अलग-अलग बजट होता है. पर अधिकतर जगहों पर आइसीडीएस के तहत चावल और दाल लाभुकों को दिया जाता है. यह पूरे परिवार का खाद्यान्न है. कर्नल शंकर अपने एक दिनी रांची प्रवास के क्रम में प्रभात खबर से बातचीत कर रहे थे.

बातचीत के क्रम में कर्नल शंकर ने कहा कि गेन राज्य स्तर पर बड़ा प्रोजेक्ट करना चाहती है. इसमें महिला, बच्चों के स्वास्थ्य और पोषाहार शामिल है. उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में सभी तरह के स्टेक होल्डरों की भागीदारी जरूरी है. उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कई योजनाएं सफल होती हैं, पर वृहद स्तर पर स्केल करने के लिए सरकारी मशीनरी का सहयोग जरूरी है. सरकारों की यह जवाबदेही है कि योजना की सफलता में हर तरह के प्रशासनिक महकमे का उपयोग हो, ताकि कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन हो सके.

एक सवाल के जवाब में कर्नल शंकर ने कहा कि बिहार में बिहार आजीविका मिशन के तहत भी संस्था काम कर रही है. यूनिसेफ के साथ मिल कर नमक में आयोडिन मिलाने के कार्यक्रम को भी गेन ने भारत समेत विश्व के 13 देशों में चलाया था. उत्तरप्रदेश में राजीव गांधी महिला विकास समिति की ओर से रायबरेली में संस्थान काम कर रही है.

कर्नल शंकर के अनुसार, आइसीडीएस में तीन वर्ष से अधिक के बच्चों को खिचड़ी दी जाती है, जबकि छोटे बच्चों को विशेष पोषक आहार की जरूरत है. गेन संस्था की ओर से 10 महिलाओं की स्वंय सहायता समूह को तकनीकी सहायता प्रदान कर, विटामिन, मिनरल्स युक्त पोषाहार तैयार कराने की जानकारी दी जाती है. आंगनबाड़ी केंद्रों को ऐसे ही समूहों द्वारा उत्पादित फोर्टिफाइड फूड लिये जाने की जरूरत है. उत्तरप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में बड़ी फैक्टरियों के जरिये फोर्टिफाइड फूड और रेडी टू ईट खाद्यान्न वितरित हो रहा है. यह केंद्रीयकृत व्यवस्था है, जिसकी वजह से वितरण व्यवस्था प्रभावित होती है.

बांसवाड़ा प्रोजेक्ट देश भर में लागू हो
संस्था की ओर से फूड फोर्टिफिकेशन का काम शुरू किया गया है. राजस्थान के बांसवाड़ा में सामान्य गेहूं के आटे और खाद्य तेल में प्रोटीन और विटामिन मिला कर उसे बेहतर खाद्य पदार्थ बनाने में संस्था ने नया आविष्कार किया है. इस खाद्य पदार्थ से कुपोषण को दूर किया जा सकता है. देश भर में संस्था बांसवाड़ा प्रोजेक्ट को रेप्लिकेट करना चाहती है. इसके लिए सिविल सोसाइटी, स्वंयसेवी संस्थान, कॉरपोरेट कंपनियों और राज्य सरकार के बीच तालमेल होने की आवश्यकता है.

केजीवीके की योजनाओं को देखा
डॉ राजन शंकर ने केजीवीके की ओर से राजधानी के आरा, बड़ाम, कुल्ही और एक अन्य गांव का विजिट किया. वहां पर उन्होंने विलेज हेल्थ एंड सैनिटेशन कमेटी समेत सामुदायिक विकास में महिलाओं, सहिया, आशा वर्कर की भूमिकाओं की जानकारी ली. उनके साथ गेन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ राजीव टंडन और केजीवीके के सचिव डॉ अरविंद सहाय भी मौजूद थे. केजीवीके की ओर से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास समेत अन्य कार्यक्रम संचालित की जा रही है. संस्था की ओर से दो सौ गांवों में दो हजार स्वंय सहायता समूह बनाये गये हैं. इन समूहों को बकरीपालन, सब्जी उत्पादन समेत अन्य कार्यक्रमों की जानकारी दी जा रही है.

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