रांची के लिए फिर काल बना सितंबर, पिछले वर्ष भी सितंबर में ही जहरीली शराब पीने से 17 लोगों की हुई थी मौत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Oct 2018 7:06 AM

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रांची : राजधानी में पिछले वर्ष जहरीली शराब पीने से 17 लोगों की मौत की बात सामने आ चुकी है. जहरीली शराब मामले में पहला केस सुखदेवनगर थाना में संतोष सिंह की लिखित शिकायत पर चार सितंबर को दर्ज हुआ था. केस की जांच के दौरान पाया गया था कि संतोष कुमार व अन्य ने […]

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रांची : राजधानी में पिछले वर्ष जहरीली शराब पीने से 17 लोगों की मौत की बात सामने आ चुकी है. जहरीली शराब मामले में पहला केस सुखदेवनगर थाना में संतोष सिंह की लिखित शिकायत पर चार सितंबर को दर्ज हुआ था.
केस की जांच के दौरान पाया गया था कि संतोष कुमार व अन्य ने डोरंडा थाना क्षेत्र स्थित इंद्रभान थापा के दुकान से शराब खरीद कर अपने दोस्तों के साथ पी थी. जिसमें संतोष के मित्र अमित कुमार उर्फ संटी, संदीप चौधरी, अरविंद यादव की मौत हो गयी थी. वहीं दूसरी ओर संतोष सहित अन्य लोग बीमार हो गये थे. जांच में यह भी बात सामने आयी थी कि युवकों ने जिस शराब का सेवन किया था, उसमें मिथाइल और इथाइल अलकोहल की मात्रा अधिक थी. जिसके कारण शराब पीनेवाले युवकों की मौत हो गयी. इस केस में इंद्रभान थापा, गौतम थापा और शराब कारोबारी प्रह्लाद सिंघानिया को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है.
इस घटना के बाद डोरंडा, हरमू, लालपुर सहित अन्य इलाके में कुल 17 लोगों की मौत की बात सामने आ चुकी है. मरनेवालों में जैप के जवान सहित अन्य लोग शामिल थे. घटना को लेकर डोरंडा सहित अन्य थाने में केस दर्ज हुए थे.
मौत के बाद यह बात सामने आयी थी कि शराब का उत्पादन नामकुम थाना क्षेत्र में और इसकी बिक्री डोरंडा थाना क्षेत्र में होती थी, लेकिन पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण घटना घटी. इस वजह से नामकुम और डोरंडा के तत्कालीन थानेदार को निलंबित भी किया गया था. मामले को सरकार ने भी गंभीरता से लिया था. जिसके बाद सभी थाना क्षेत्र में रोजाना अवैध तरीके से शराब बेचनेवालों के खिलाफ अभियान चलाया जाने लगा.
मामले में यह भी निर्णय लिया गया था अगर किसी थाना क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री होते पाया गया, तब उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. जिसके कारण अवैध शराब की बिक्री पर काफी हद तक रोक भी लगी थी. लेकिन धीरे- धीरे मामले में उत्पाद विभाग और पुलिस की छापेमारी धीमी पड़ती गयी और शराब कारोबारी दोबारा सक्रिय हो गये. इसकी पुष्टि पुलिस के आंकड़ों से होती है.
30 दिनों में अवैध शराब के मामले में दर्ज किये 10 केस
रांची जिला के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक अगस्त से लेकर 30 सितंबर तक पुलिस ने विभिन्न इलाके में अवैध शराब को लेकर छापेमारी की . छापेमारी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में देशी और विदेशी शराब बरामद की. मामले में नगड़ी थाना में तीन केस, कांके में एक केस, ओरमांझी में चार केस, तमाड़ और सिल्ली थाना में एक- एक केस यानी कुल 10 केस दर्ज किये गये. छापेमारी में शराब बरामद होने से यह भी स्पष्ट है कि अवैध शराब का कारोबार बंद नहीं हुआ है.
बताया जाता है कि जहां एक ओर नकली विदेशी शराब बनाने के लिए अधिक मात्रा में मिथाइल और इथाइल अलकोहल मिलाने से शराब जहरीली हो जाती है और इसका मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. वहीं दूसरी ओर चुलाई शराब बनाने में अधिक मात्रा में यूरिया मिलाने की वजह से शराब जहरीली हो जाती है.
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