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विधानसभा में नियुक्ति/प्रोन्नति में गड़बड़ी पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने की कार्रवाई की अनुशंसा

Updated at : 11 Sep 2018 7:25 AM (IST)
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विधानसभा में नियुक्ति/प्रोन्नति में गड़बड़ी पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने की कार्रवाई की अनुशंसा

रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को झारखंड विधानसभा में नियुक्ति व प्रोन्नति में बरती गयी अनियमितता पर कार्रवाई करने की अनुशंसा कर दी है.सेवानिवृत्त न्यायधीश विक्रमादित्य आयोग की जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल ने समुचित कार्रवाई करने का निर्देश झारखंड विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव को दिया है. मालूम हो कि झारखंड […]

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रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को झारखंड विधानसभा में नियुक्ति व प्रोन्नति में बरती गयी अनियमितता पर कार्रवाई करने की अनुशंसा कर दी है.सेवानिवृत्त न्यायधीश विक्रमादित्य आयोग की जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल ने समुचित कार्रवाई करने का निर्देश झारखंड विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव को दिया है. मालूम हो कि झारखंड विधासमभा में नियुक्ति व प्रोन्नति में भारी पैमाने में गड़बड़ी का मामला प्रभात खबर ने पहली बार उजागर किया.
इसके बाद झारखंड के पूर्व राज्यपाल स्व डॉ सैयद अहमद ने इस मामले में बरती गयी अनियमितता की जांच के लिए न्यायमूर्ति लोकनाथ प्रसाद की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया. लेकिन न्यायमूर्ति लोकनाथ प्रसाद के इस्तीफा देने के बाद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विक्रमादित्य प्रसाद को जांच की जिम्मेदारी दी गयी.
सात हजार पेज का है जांच प्रतिवेदन : आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रमादित्य ने राजभवन जाकर विधानसभा में नियुक्ति/प्रोन्नति में बरती गयी अनियमितता के संदर्भ में लगभग सात हजार पेज का विस्तृत जांच प्रतिवेदन राज्यपाल को 18 जुलाई 2018 को आवश्यक कार्रवाई के लिए सौपा. राज्यपाल ने जांच प्रतिवेदन पर विचार-विमर्श करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष को आवश्यक कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश दिया.
स्पीकर को दी रिपोर्ट की जानकारी : इससे पूर्व राज्यपाल ने स्पीकर डॉ दिनेश उरांव को राजभवन बुलाकर आयोग की रिपोर्ट की जानकारी भी दी. मालूम हो कि जांच रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड विधानसभा में नियुक्ति/प्रोन्नति अध्यक्ष रहे इंदर सिंह नामधारी, आलमगीर आलम अौर शशांक शेखर भोक्ता के कार्यकाल में हुई. न्यायमूर्ति विक्रमादित्य आयोग ने इस मामले में सीबीआइ जांच की भी अनुशंसा की है.
वैसे सवाल, जिनकी हुई थी जांच
क्या गठित नियुक्ति कोषांग में कौशल किशोर प्रसाद और सोनेत सोरेन को शामिल किया गया. इनके खिलाफ एमपी सिंह ने प्रतिकूल टिप्पणी की थी.
क्या नियुक्ति की कार्रवाई बिना पद रहे प्रारंभ कर दी गयी या बिना पद के उपलब्ध परिणाम घोषित कर दिये गये.क्या ड्राइवरों की नियुक्ति के लिए निकाले गये 28 दिसंबर, 2006 के विज्ञापन में विहित अंतिम तिथि तक क्या पार्थसारथी चौधरी अपना आवेदन नहीं जमा कराया था. क्या वे लेकिन निरसा की तत्कालीन विधायक अपर्णा सेन गुप्ता के भाई थे, तो किस आधार पर साक्षात्कार के लिए बुलाया गया.
चालकों की 17 नियुक्तियों में 14 को एमवीआइ ने जांच में असफल पाया था, बावजूद इसके नौकरी पर रख लिये गये.
क्या इंदर सिंह नामधारी के अध्यक्ष काल में प्रतिवेदकों के 23 पदों के विरुद्ध 30 व्यक्तियों की नियुक्ति की गयी.
किसके कार्यकाल में कितनी बहाली हुई
स्पीकर नामधारी के समय हुई बहाली : 274
स्पीकर आलमगीर आलम के समय हुई बहाली : 324
इस तरह तोड़े गये नियम
विधायक- सांसद, नेताओं, रसूखदार लोगोें के रिश्तेदारों- करीबी लोगों को किया गया बहाल
कुछ खास क्षेत्र के लोगों को िकया गया बहाल
राज्यपाल ने अनुसेवक के स्वीकृत किये 75 पद, बहाल कर लिया 150
जिनकी नियुक्ति बिहार में कोर्ट ने रद्द की, झारखंड विस ने बहाल किया
बहाली के एक वर्ष बाद कर दिया प्रोन्नत, नेताओं के करीबी को बनाया एसओ
एक दिन में एक साक्षात्कार कमेटी ने लिया 200 से 600 लोगों का इंटरव्यू, साक्षात्कार के लिए थी मात्र एक कमेटी
साक्षात्कार कमेटी के सदस्य रहे व्यस्त, तो टाइपिंग शाखा के लोगों ने लिया इंटरव्यू
वैसे सवाल, जिनकी हुई थी जांच
क्या नियुक्ति/ प्रोन्नति में पिक एंड चूज पद्धति अपनायी गयी.क्या विज्ञापन में पदों की संख्या का उल्लेख नहीं था. क्या बिना पदों की संख्या जारी किया गया विज्ञापन वैध है.क्या मेधा सूची में कई रौल नंबर पर ओवर राइटिंग की गयी है.
क्या गृह जिला (पलामू) के 13 अभ्यर्थियों को स्थायी डाक-पता पर पोस्ट भेजा गया. क्या पत्र 12 घंटे के भीतर मिल गया. क्या सफल उम्मीदवारों ने दो दिनों के अंदर ही योगदान कर दिया.
क्या अनुसेवक के लिए नियुक्ति प्रक्रिया द्वारा कथित रूप से चयनित व्यक्तियों को ऑडरर्ली रूप से नियुक्त कर लिया गया.
तत्कालीन सचिव-सह-साक्षात्कार कमेटी के अध्यक्ष व सदस्य कौशल किशोर प्रसाद विधानसभा सत्र में व्यस्त थे, पूरी अवधि में टाइपिंग शाखा के तारकेश्वर झा व सहायक महेश नारायण सिंह शामिल हुए. इसके बाद भी साक्षात्कार कमेटी के सदस्यों ने हस्ताक्षर कर दिये.
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