रांची : आर्थिक सुधार में आइबीसी मील का पत्थर साबित हुआ
Updated at : 09 Sep 2018 11:57 PM (IST)
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रांची : इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, रांची चैप्टर के दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का समापन रविवार को हुआ. सीएमपीडीआइ के मयूरी हॉल में आयोजित सेमिनार में कोलकाता से आये विशेषज्ञ एसएस सोंथालिया ने दिवालियापन और दिवालियापन संहिता के बारे में जानकारी दी. श्री सोंथालिया ने कहा कि जीएसटी के बाद आर्थिक सुधार में […]
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रांची : इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, रांची चैप्टर के दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का समापन रविवार को हुआ. सीएमपीडीआइ के मयूरी हॉल में आयोजित सेमिनार में कोलकाता से आये विशेषज्ञ एसएस सोंथालिया ने दिवालियापन और दिवालियापन संहिता के बारे में जानकारी दी. श्री सोंथालिया ने कहा कि जीएसटी के बाद आर्थिक सुधार में इन्सोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आइबीसी) एक मील का पत्थर साबित हुआ है.
कोलकाता से आये सीए एस दत्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों को आमतौर पर आइएफआरएस कहा जाता है. सार्वजनिक क्षेत्र के लेखांकन सुधार में आइएफआरएस एक महत्वपूर्ण कदम है.
रांची चैप्टर के अध्यक्ष विद्याधर प्रसाद ने रांची चैप्टर की गतिविधियों के बारे में सदस्यों को जानकादी दी. उन्होंने नये सीएमए भवन के निर्माण का डिजाइन प्रस्तुत किया. मौके पर कई विशेषज्ञ, संस्थान के सदस्य और कॉस्ट एकाउंटेंट के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.
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