रांची : 32 में से तीन खाद्य निरीक्षक कार्यरत, उसमें भी एक सस्पेंड
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Aug 2018 7:18 AM
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रांची : राज्य में खाद्य निरीक्षकों (फूड इंस्पेक्टर) के कुल 32 सृजित पदों के विरुद्ध सिर्फ तीन कार्यरत हैं. इनमें से भी एक अभी निलंबित हैं. इस तरह 32 के बदले दो खाद्य निरीक्षकों के भरोसे ही राज्य के 3.29 करोड़ लोगों की खाद्य संरक्षा (फूड सेफ्टी) का काम चल रहा है. खाद्य निरीक्षकों का […]
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रांची : राज्य में खाद्य निरीक्षकों (फूड इंस्पेक्टर) के कुल 32 सृजित पदों के विरुद्ध सिर्फ तीन कार्यरत हैं. इनमें से भी एक अभी निलंबित हैं. इस तरह 32 के बदले दो खाद्य निरीक्षकों के भरोसे ही राज्य के 3.29 करोड़ लोगों की खाद्य संरक्षा (फूड सेफ्टी) का काम चल रहा है.
खाद्य निरीक्षकों का काम खाने-पीने की चीजों के सैंपल लेकर इन्हें जांच के लिए लैब भेजना तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक, मिलावटी व अखाद्य चीजों को बाजार में बिकने से रोकना है. जो लोग मिलावट करते हैं, उनके विरुद्ध मामले दर्ज कर उन्हें सजा दिलाना भी इन्हीं खाद्य निरीक्षकों का काम है. निदेशालय के अनुसार देवघर सहित राज्य के बड़े शहरों में लगभग छह हजार होटल-रेस्तरां निबंधित हैं. इनमें से लगभग ढ़ाई हजार रांची में ही हैं.
दरअसल खाद्य निरीक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या है, जिससे होटल-रेस्तरां या ठेलों-फुटपाथों पर बिकनेवाली खाद्य सामग्री की नियमित जांच नहीं होती. अभी जेपीएससी के जरिये 24 खाद्य निरीक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है.
जुर्माना व सजा का है प्रावधान
खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम-11 के अनुसार, मिलावट की पुष्टि होने व इसकी रिपोर्ट के आधार पर मिलावटखोरों को जुर्माने व जेल की सजा दी जा सकती है.
मामले की गंभीरता के आधार पर डिजिग्नेटेड अॉफिसर (अभिहित पदाधिकारी) यह निर्णय करते हैं कि उन्हें संबंधित मामले की अपील उपायुक्त के कोर्ट में करनी या जिला कोर्ट में. अमानक स्तर व गलत प्रचार वाले खाद्य उत्पादों व सामग्रियों के मामले उपायुक्त स्तर से निबटाये जाते हैं. वहीं ऐसे मिलावट, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक व खतरनाक हैं, जिला कोर्ट में दायर किये जाते हैं.
पहले जिले के एसीएमओ डिजिग्नेटेड अॉफिसर थे. अब यह काम एसडीअो को दे दिया गया है. अधिनियम में अधिकतम 10 लाख रुपये तक के जुर्माने व आजीवन कारावास का प्रावधान है. खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम में यह निर्देश है कि मिलावट व गड़बड़ी के मामलों में 60 से 90 दिनों के अंदर निर्णय हो जाना चाहिए.
एसीएमअो के बदले एसडीअो हुए डिजिग्नेटेड अॉफिसर
खाद्य संरक्षा आयुक्त निधि खरे ने 24 अगस्त को अधिसूचना जारी कर एसीएमअो के बदले सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीअो) को डिजिग्नेटेड अॉफिसर का प्रभार दे दिया है.
विभाग का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारी के हाथ में यह काम होने से किसी खाद्य सैंपल के फेल होने पर अपील में तेजी आयेगी. एसीएमअो चिकित्सा कार्य व अन्य कारणों से इस मामले में सुस्त थे.
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