रांची : शिक्षा का अर्थ खुश रहना और करना होना चाहिए : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

Updated at : 26 Aug 2018 7:26 AM (IST)
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रांची : शिक्षा का अर्थ खुश रहना और करना होना चाहिए : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

डीपीएस में वार्षिकोत्सव सह पुरस्कार वितरण समारोह रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि डीपीएस, रांची राज्य का एक प्रतिष्ठित स्कूल है. शिक्षा जगत में इसने अपनी अमिट पहचान बनायी है, लेकिन इसे और लंबी यात्रा तय करनी है. शिक्षा केवल ज्ञानार्जन करना नहीं है. इसका उद्देश्य खुश रहने, दूसरों को खुश करने, समाज […]

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डीपीएस में वार्षिकोत्सव सह पुरस्कार वितरण समारोह
रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि डीपीएस, रांची राज्य का एक प्रतिष्ठित स्कूल है. शिक्षा जगत में इसने अपनी अमिट पहचान बनायी है, लेकिन इसे और लंबी यात्रा तय करनी है. शिक्षा केवल ज्ञानार्जन करना नहीं है.
इसका उद्देश्य खुश रहने, दूसरों को खुश करने, समाज में रहने, चुनौतियों का सामना करने, दूसरों की मदद करने, बड़ों की देखभाल करने और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने के तरीकों को सीखना है. यह बातें उन्होंने शनिवार को डीपीएस में वार्षिकोत्सव सह पुरस्कार वितरण समारोह में कही. राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा विकास का एक सशक्त साधन है. शिक्षा हमें आंतरिक रूप से मजबूत बनाती है और हमारे व्यक्तित्व को आत्मविश्वास प्रदान करती है. अच्छी शिक्षा ही गलत आदतों से हमें दूर रखती है.
शिक्षा के बिन मनुष्य अधूरा है. शिक्षा सामाजिक व्यक्तित्व और पारिवारिक समस्याओं को सुलझाने का सबसे सक्षम यंत्र है. शिक्षा का अर्थ नौकरी पाना नहीं, बल्कि अच्छा इंसान बनना है. उन्होंने विद्यार्थियों से अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत करने की बात कही. वहीं, शिक्षकों से कहा कि विद्यार्थियों के साथ भेदभाव नहीं करें और मां की तरह प्यार दें. इस अवसर पर उन्होंने स्कूल की पत्रिका डीप्स टाइम का विमोचन किया.
विशिष्ट अतिथि राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल अच्छा अंक अर्जित करना नहीं होना चाहिए. माता-पिता बच्चों पर अच्छा अंक लाने के लिए तरह-तरह के दबाव बनाते ह, लेकिन उसकी इच्छा के जानने का प्रयास नहीं करते हैं. विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना आवश्यक है. उन्होंने गांधी जी सहित अन्य महापुरुषों का उदाहरण दिया.
उन्होंने कहा कि आज तक हम पश्चिमी सभ्यता को अपना रहे हैं, जिस कारण अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे है. बच्चों को अपनी संस्कृति और सभ्यता के बारे में जानकारी देना आवश्यक है. उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करनेवाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया. प्राचार्य डॉ राम सिंह ने विद्यालय के वार्षिक शैक्षणिक उपलब्धियों की जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि स्कूल में नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा दी जाती है. कार्यक्रम में 91 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियों काे पुरस्कृत किया गया.
विद्यार्थियों ने किया लोगों को किया मंत्रमुग्ध : सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सर्वप्रथम सिंफनी द्वारा लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. भरत नाट्यम और कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य की जुगलबंदी, पुष्प रंगम द्वारा नाट्य शास्त्र के देवी-देवता तथा भगवान गणेश की आराधना का दृश्य प्रस्तुत किया गया. दीप्ताभ संस्था के बच्चों ने उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी नामक नाटक का मंचन कर गरीब बच्चों पर हो रहे अमानवीय व्यवहार काे दर्शाया. अंतरागिनी नामक नृत्य नाटिका में संदेश दिया कि अपने देश को छोड़ कर विदेशों में बसने वाले अपने माता-पिता को कैसे भूल जाते हैं.
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