रांची : गैंगस्टर शिव शर्मा ने फर्जी बेलर के सहारे लिया था बेल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Aug 2018 12:13 AM
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रांची : पुलिस की जांच में गैंगस्टर शिव शर्मा पर न्यायालय में फर्जी जमानतदार पेश कर बेल लेने का आरोप सही पाया गया है. इसकी पुष्टि कोतवाली डीएसपी भोला प्रसाद की जांच रिपोर्ट से होती है. लिहाजा उन्होंने केस के अनुसंधानक को शिव शर्मा को रिमांड पर लेने का भी निर्देश दिया है. इसके अलावा […]
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रांची : पुलिस की जांच में गैंगस्टर शिव शर्मा पर न्यायालय में फर्जी जमानतदार पेश कर बेल लेने का आरोप सही पाया गया है. इसकी पुष्टि कोतवाली डीएसपी भोला प्रसाद की जांच रिपोर्ट से होती है.
लिहाजा उन्होंने केस के अनुसंधानक को शिव शर्मा को रिमांड पर लेने का भी निर्देश दिया है. इसके अलावा जमानत के लिए फर्जी पेपर बनाने वाले और फर्जी बेलर का असली नाम व एड्रेस पता कर उन्हें भी गिरफ्तार करने का भी निर्देश है.
उल्लेखनीय है कि शिव शर्मा सहित अन्य फर्जी जमानतदार के खिलाफ कोतवाली थाना में लालपुर थाना प्रभारी रमोद कुमार सिंह की शिकायत पर 14 फरवरी 2018 को प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. केस का अनुसंधानक जमादार मुकेश कुमार को बनाया गया था. जबकि कोतवाली डीएसपी केस का सुपरविजन कर रहे थे.
क्या लिखा है रिपोर्ट में : कोतवाली डीएसपी ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि लालपुर थाना में 19 नवंबर 2016 को दर्ज केस में शिव कुमार शर्मा को 16 जून 2017 को हाइकोर्ट से जमानत मिली थी. यह केस सर्कुलर रोड स्थित कावेरी रेस्टोरेंट के संचालक लव भाटिया पर रंगदारी के लिए फायरिंग करने से संबंधित है.
हालांकि फायरिंग में लव भाटिया बच गये थे क्योंकि ट्रिगर दबाने के बावजूद गोली नहीं चली थी. केस के रिकॉर्ड को देखने के बाद लालपुर थाना प्रभारी रमोद कुमार सिंह को पता चला कि शिव शर्मा के जमानतदार के रूप में कांके रोड राजा बाजार निवासी मितेश डोलिया और हेहल निवासी मदन कुमार तथा पहचानकर्ता के रूप में सिमलिया निवासी शंकर साहू का नाम है.
जांच में यह भी पाया गया कि शिव शर्मा के जमानतदारों और पहचानकर्ता ने फर्जी पहचानपत्र जमा कर व्यवहार न्यायालय को धोखा देते हुए जमानत का बंधपत्र न्यायालय में समर्पित किया है. इसलिए केस में बेगूसराय बरियारपुर निवासी अपराधी शिव शर्मा, छद्मनामी मितेश डोलिया, मदन कुमार और शंकर साहू के अलावा अन्य के खिलाफ जाली कागजात बनाने व धोखाधड़ी करने का आरोप सही है.
डीएसपी भी नहीं पता लगा सके फर्जी बेलर कौन
गौरतलब है कि कोतवाली डीएसपी ने जांच रिपोर्ट पूरी तैयार कर ली है. इसके बाद भी वे इस बात का पता नहीं लगा सके कि जांच के दौरान न्यायालय को गुमराह कर शिव शर्मा का बेलर और पहचानकर्ता कौन है. जबकि इसे पूरा करने की जिम्मेदारी केस के अनुसंधानक को सौंपी गयी है. उन्हें इस काम के लिए कुछ निर्देश भी दिये गये हैं.
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