रफ्तार का जुनून : हर माह सात नाबालिगों की मौत

Updated at : 22 Aug 2018 9:00 AM (IST)
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रफ्तार का जुनून : हर माह सात नाबालिगों की मौत

रांची : रफ्तार का जुनून नाबालिगों की जान ले रहा है. अकले रांची में ही हर महीने ‘मौत से रेस’ लगाने के चक्कर में सात नाबालिगों की मौत हो रही है. आंकड़ों इस बात की तस्दीक करते हैं. वर्ष 2018 में जनवरी से जुलाई तक सड़क हादसे में कुल 329 लोगों की असमय मौत हुई […]

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रांची : रफ्तार का जुनून नाबालिगों की जान ले रहा है. अकले रांची में ही हर महीने ‘मौत से रेस’ लगाने के चक्कर में सात नाबालिगों की मौत हो रही है. आंकड़ों इस बात की तस्दीक करते हैं. वर्ष 2018 में जनवरी से जुलाई तक सड़क हादसे में कुल 329 लोगों की असमय मौत हुई है. इनमें 15 फीसदी नाबालिग हैं.
यानी सात महीने में 49 से ज्यादा नाबालिगों की जान जा रही है. वर्ष 2017 में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा अधिक था. इस दौरान में जनवरी से जुलाई तक हुए हादसे में कुल 423 लोगों की जान गयी थी. इनमें से 15 फीसदी यानी 63 से ज्यादा नाबालिगों की मौत हुई.
रांची जिले में 19 ब्लैक स्पॉट, जहां ज्यादा होते हैं हादसे
वर्ष 2018 में हुई नाबालिगों की मौत
12 अप्रैल : नामकुम-तुपुदाना रिंग रोड में तीन नाबालिग बाइक से तेज रफ्तार का आनंद ले रहे थे. बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गयी. एक नाबालिग का सिर धड़ से अलग हो गया. जबकि बाकी के भी दो नाबालिग की मौत हो गयी.
06मई : रिंग रोड हाजी चौक के पास दुर्घटना में एक नाबालिग की मौत.
14 मई : हिनू के पास बाइक से जा रहे एक नाबालिग की हादसे में मौत.
19 मई : अशोक नगर आइडीबीआइ बैंक के समीप हादसे में बाइक सवार की एक नाबालिग मौत.
15 जून : पुरुलिया रोड में हुए हादसे में बाइक सवार एक नाबालिग डिवाइडर से टकरा गया, मौत.
25 मई : पिठौरिया घाटी में रफ्तार के कारण हादसा, दो नाबालिग की मौत.
26 जून : मांडर में तेज रफ्तार बाइक सवार एक नाबालिग की मौत.
प्रशासन ने उठाये सेफ्टी के कदम
ब्लैक स्पॉट की पहचान करने के बाद प्रशासन ने संबंधित स्थानों पर सेफ्टी के कदम उठाये हैं. इनमें बूटी मोड़, खेलगांव, बिरसा चौक, हटिया के समीप, राम मंदिर चौक, कांके रोड, सिरकाटोली, एदलहातू व नीलगढ़ा में ब्रेकर, साइनएज व रंबल स्ट्रीप लगाये गये हैं. ताकि हादसों को रोका जा सके. वाहन चालक इन स्थानों पर समय रहते चौकस हो अपने वाहनों को नियंत्रित कर सकें.
अब तक रांची के 50 स्कूलों में ट्रैफिक नियमों की जानकारी के लिए बच्चों के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया है. जिन जगहों पर अधिक हादसे होते हैं, वहां का स्थल निरीक्षण कर घटना के कारणों की पड़ताल कर उसके निदान की कोशिश की जाती है.
निशांत रोशन, रोड सेफ्टी पीआइयू के आइटी मैनेजर
बेरोकटोक बाइक और स्कूटी लेकर स्कूल जाते हैं विद्यार्थी
रांची : नाबालिगों छात्रों की बाइक की रफ्तार पर लगाम लगाने से स्कूल के प्राचार्य भी पल्ला झाड़ रहे हैं. वे कहते हैं कि अभिभावक ही बच्चों के बाइक चलाने पर पाबंदी लगा सकते हैं. वहीं, नाबालिग छात्र आराम से बाइक से स्कूल से घर आ जा रहे हैं. शहरी क्षेत्र की सड़कों पर भी वे बिना हेलमेट रफ्तार भरते नजर आते है. इन्हें ट्रैफिक नियम की जानकारी नहीं होगी ऐसा नहीं लगता. बावजूद इसके वे नियमों को ठेंगा दिखाते हैं.
गाहे-बगाहे ट्रैफिक पुलिस की जद में आ गये, तो फंस गये. लेकिन, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन पर लगाम लगाने में न तो अभिभावक, स्कूल प्रबंधन और प्रशासन ही संवेदनशील रवैया अख्तियार कर रहा है. इसका खामियाजा नाबालिगों को अपनी जान के रूप में चुकाना पड़ रहा है.
प्रशासन चलाये सघन जांच अभियान, वाहन करे जब्त
निजी पर सरकारी स्कूलों के बच्चाें द्वारा आये दिन सड़क पर बाइक व स्कूटी से स्कूल आना-जाना किया जा रहा है. इसको लेकर मंगलवार को विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों से जब पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों के लिए बस की व्यवस्था की गयी है.
वहीं कई विद्यार्थी निजी वाहन से भी स्कूल आते हैं. बाइक या स्कूटी से आनेवालों विद्यार्थियों की जानकारी स्कूल प्रबंधन को बहुत कम मिलती है. विद्यार्थी अन्यत्र वाहन खड़ी कर स्कूल आते-जाते हैं. इस पर अभिभावकों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है. अभिभावक विद्यार्थियों के आने-जाने पर नजर रखें. प्रशासन भी स्कूली छात्रों के बाइक चलाने पर सघन जांच समय-समय पर करें और वाहन को जप्त करें.
रांची : राजधानी की ट्रैफिक पुलिस अब बेकाबू रफ्तार पर कसेगी लगाम
ट्रैफिक पुलिस को मिली दो इंटरसेप्टर कारें
रांची : ओवर स्पीड ड्राइविंग और यातायात के अन्य नियमों के उल्लंघन के कारण राज्य में सड़क हादसों की तादाद तेजी से बढ़ रही है. इस पर लगाम कसने के लिए झारखंड पुलिस ने राज्य के विभिन्न जिलों की ट्रैफिक पुलिस को अत्याधुनिक इंटरसेप्टर कार मुहैया करायी है. कार की कीमत 30 लाख रुपये है, जिसमें अत्याधुनिक मशीनों के अलावा हाइ डेफिनेशन कैमरे भी लगे हुए हैं. रांची की ट्रैफिक पुलिस को ऐसी दो कारें मिली हैं.
मंगलवार को उपायुक्त राय महिमापत रे, एसएसपी अनीश गुप्ता, सिटी एसपी अमन कुमार, एसडीओ अंजलि यादव और ट्रैफिक एसपी संजय रंजन सिंह ने दोनों इंटरसेप्टर कारों को झंडी दिखा कर रवाना किया. एक इंटरसेप्टर कार राजधानी के अंदर तैनात रहेगी. जबकि, दूसरी इंटरसेप्टर कार हाइवे जैसे : रांची-हजारीबाग रोड, टाटा रोड, पिठोरिया रोड, खूंटी रोड, डालटेनगंज रोड व इटकी रोड में हर अलग-अलग दिन रहेगी.
इंटरसेप्टर कार की खासियत
इस इंटरसेप्टर कार में चार जवान तैनात रहेंगे, लेकिन ये किसी भी वाहन की रोक-टोक नहीं करेंगे. इंटरसेप्टर कार में लगे हाइडेफिनेशन कैमरे ‘स्पीड गर्वनर’ की तरह काम करेंगे. कैमरे इतने पावरफुल हैं कि अपने आसपास किसी दिशा से आनेवाले वाहन की तसवीर और नंबर कैप्चर कर लेंगे.
वहीं, इसमें लगी अत्याधुनिक मशीनें तुरंत उस वाहन की गति का सटीक आकलन कर लेंगी. इसके बाद ओवर स्पीड ड्राइविंग करने वाले वाहन मालिकों को उनके मोबाइल या संबंधित पते पर स्पीड पोस्ट से चालान चला जायेगा. यदि एक ही वाहन चालक तीन बार से अधिक ओवर स्पीड के जुर्म में पकड़ा गया, तो ट्रैफिक पुलिस उसका लाइसेंस रद्द करने की डीटीओ से करेगी.
उम्मीद है कि इंटरसेप्टर के डर से ओवर स्पीड ड्राइविंग में कमी आयेगी, जिससे दुर्घटनाएं कम होंगी. हो सकता है कुछ दिन हाइवे में स्पीड चलने वाली वाहनों की संख्या 500 हो, लेकिन लोगों को जानकारी होगी, तो इसकी संख्या घट कर दस भी आ जायेगी. इसके लोगों को जागरूक भी किया जायेगा.
संजय रंजन सिंह, ट्रैफिक एसपी, रांची
स्कूल के बाहर गार्ड की तैनाती की गयी है. सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं, जिससे बाइक व स्कूटी से आनेवाले छात्रों पर नजर रखी जा सके. कई बार सूचना मिलने पर अभिभावकों को बुलाया भी गया है. इसके बावजूद छात्र कहीं और अगर वाहन लगाकर आते हैं, तो इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन को नहीं है. इस पर अभिभावक ही लगाम लगा सकते हैं.
डॉ राम सिंह, प्राचार्य, डीपीएस
स्कूल बस की व्यवस्था है. इसके बावजूद कुछ बच्चे चोरी-छिपे बाइक व स्कूटी से आना-जाना करते हैं. अभिभावक तर्क देते हैं कि बच्चों को समय पर ट्यूशन जाने के लिए बाइक या स्कूटी दी है. दुर्घटना होने पर अफसोस करते हैं. सरकार को चाहिए कि वह अधिक से अधिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू करे और विद्यार्थियों को यात्रा में रियायत दे.
जैकब सीजे, प्राचार्य, केराली स्कूल
स्कूल द्वारा सीनियर व जूनियर के अलग-अलग बस चलायी जाती है. अभिभावकों को तय करना है कि वह अपने बच्चों के ऐसी चीज न दें, जो जानलेवा हो. स्कूल प्रबंधन के संज्ञान में अाने पर अभिभावकों को बुलाया जाता है, लेकिन स्कूल प्रबंधन सीमित दायरे में ही कार्रवाई कर सकता है.
समरजीत जाना, प्राचार्य, जेवीएम श्यामली
बच्चे बाइक लेकर स्कूल नहीं आते हैं. वह कहीं अौर बाइक पार्क कर स्कूल आते-जाते हैं. इस पर स्कूल प्रबंधन क्या कर सकता है? अभिभावकों को इस पर नजर रखनी होगी. स्कूल प्रबंधन द्वारा समय-समय पर पीटीएम में अभिभावकों को बताया जाता है. ट्रैफिक पुलिस अभियान चला कर ऐसे बच्चों को पकड़े और वाहन को जब्त करे.
पीके ठाकुर, प्राचार्य, लाला लाजपत राय स्कूल
स्कूल द्वारा बस की व्यवस्था है. बाइक व स्कूटी से आने वाले बच्चों पर लगाम अभिभावक ही लगा सकते हैं. किसी भी स्कूल में बच्चे बाइक लेकर आते हैं, तो स्कूल में या पार्किंग में नहीं लगाते हैं. अभिभावकों को अपने बच्चों पर निगरानी रखनी चाहिए. अभिभावक बच्चों को समझाये कि इस उम्र में वाहन चलाना उनके लिए कितना खतरनाक है. सरकार भी सख्त कानून बनाये.
सुरेंद्र कुमार सिंह, प्राचार्य, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा
बच्चा जिद करे, तो करायें काउंसिलिंग
कभी-कभी बच्चों की जिद पूरे घर को परेशान कर देती है. इसके पीछे कई कारण हैं. यह केवल बच्चों की ओर से होनेवाली गलती नहीं है. इसमें कभी-कभी परिवार वालों की भी गलती होती है. इसके लिए दोनों पक्ष को समझना पड़ता है. अगर बच्चों की जिद ज्यादा परेशान करे, तो मनोवैज्ञानिकों से संपर्क कर उनकी काउंसिलिंग करायी जा सकती है.
बड़े शहरों में पैरेंटिंग (लालन-पालन) को लेकर कई तरह के अध्ययन और प्रयास हो रहे हैं. छोटे शहरों में इसकी शुरुआत हो रही है. लेकिन, यह काफी महत्वपूर्ण विषय है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. आजकल घर वाले ही बच्चों की सभी जिद को शुरू से पूरा करते रहते हैं. बाद में उसको रोकने की कोशिश करते हैं, तो परेशानी होती है.
ऐसी स्थिति में बच्चों के साथ-साथ परिवार के सदस्यों के भी इंटरवेंशन या काउंसिलिंग की जरूरत होती है. उनको समझाना पड़ता है कि बच्चों के जिद को किस हद तक पूरा करें. कभी-कभी बच्चों पर उनकी संगत का भी असर पड़ता है. ऐसी स्थिति में बच्चों के साथ-साथ उनके दोस्तों से बात भी करनी चाहिए. आजकल ऐसी परेशानी लेकर कई लोग हमारे आने लगे हैं. दोनों की काउंसिलिंग के रास्ता निकल रहा है.
डॉ मनीषा किरण, मनोवैज्ञानिक, रिनपास
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