20-25 लाख के कबाड़ को बताया 22.45 करोड़ की मशीन

Updated at : 18 Aug 2018 3:40 AM (IST)
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20-25 लाख के कबाड़ को बताया 22.45 करोड़ की मशीन

इइएफ, हाइटेंशन और अन्य कारखानों संबंधी बिहार की रिपोर्ट रांची : बिहार सरकार ने झारखंड स्थित उसके पांच कारखानों की कुल संपत्ति व देनदारी के मामले में झारखंड सरकार को रिपोर्ट भेजी है. इनमें टाटीसिलवे स्थित इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट फैक्टरी (इइएफ), सामलौंग स्थित हाइटेंशन इंसुलेटर फैक्टरी, मेलुबल कास्ट अायरन व स्वर्णरेखा घड़ी कारखाना तथा सिंदरी स्थित […]

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इइएफ, हाइटेंशन और अन्य कारखानों संबंधी बिहार की रिपोर्ट

रांची : बिहार सरकार ने झारखंड स्थित उसके पांच कारखानों की कुल संपत्ति व देनदारी के मामले में झारखंड सरकार को रिपोर्ट भेजी है. इनमें टाटीसिलवे स्थित इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट फैक्टरी (इइएफ), सामलौंग स्थित हाइटेंशन इंसुलेटर फैक्टरी, मेलुबल कास्ट अायरन व स्वर्णरेखा घड़ी कारखाना तथा सिंदरी स्थित सुपर फॉस्फेट कारखाना की रिपोर्ट शामिल है. बिहार सरकार के औद्योगिक विकास निगम के अनुसार, इन कारखानों में 22.45 (सुपर फॉस्फेट, सिंदरी को छोड़) करोड़ की मशीनें लगी हैं, जिसे बिहार सरकार ने संपत्ति माना है. पर अब रांची के इइएफ तथा हाइटेंशन सहित कुल चार कारखानों में मशीन के नाम पर सिर्फ लोहे का कबाड़ बचा है, जिसकी अनुमानित कीमत 20-25 लाख होगी.
दरअसल बिजली बिल मद में बकाये को लेकर झारखंड सरकार ने इन कारखानों को मई 2012 में सीलबंद कर दिया था. इसके बाद से यहां दिन-रात चोरी होती रही. चोर गैस कटर से मशीनें काट कर ले गये. दोनों कारखानों के कैंपस में ट्रक घुसा कर लोहे व मशीन लादे गये. कारखाना प्रबंधन के ही अनुसार, दोनों कारखानों से आठ-10 करोड़ से अधिक के उपकरण, सामान, स्क्रैप, तांबा व लोहे निकाल लिये गये. हाइटेंशन कारखाने में इंसुलेटर की ढुलाई के लिए बनी लोहे की पटरी भी उखाड़ कर बेच दी गयी. दरअसल उपरोक्त कारखानों में अब कुछ बचा ही नहीं है. इधर, करीब दो वर्ष पूर्व बिहार सरकार ने 25 एकड़ के इस कारखाना परिसर को 17 लाख रुपये प्रति माह के शुल्क पर 33 वर्षों के लिए निजी पार्टी को लीज पर दे दिया है.
संपत्ति का यह आकलन वर्ष 2011-12 की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर एसबीआइ कैपिटल ने वर्ष 2015 में किया था. यह आकलन बिहार सरकार ने ही कराया था. अब झारखंड व बिहार सरकार के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को संपत्ति व देनदारी संबंधी ताजा आकलन करना है. यह सच है कि कारखानों में अब मशीनें नहीं बची हैं.
अरविंद कुमार राय, संयुक्त प्रभारी महाप्रबंधक, इइएफ, हाइटेंशन व अन्य कारखाने
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