रांची : समय पर करायें ओटी में संक्रमण की जांच

Updated at : 07 Aug 2018 5:53 AM (IST)
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रांची : समय पर करायें ओटी में संक्रमण की जांच

रिम्स की ओटी सिस्टर इंचार्ज को रिम्स प्रबंधन ने दिया निर्देश रांची : रिम्स के आॅपरेशन थियेटर (आेटी) को संक्रमण मुक्त रखने का निर्देश रिम्स प्रबंधन ने दिया है. समय-समय पर ओटी के संक्रमण की जांच कराने को कहा गया है. यह निर्देश सोमवार को रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई बैठक […]

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रिम्स की ओटी सिस्टर इंचार्ज को रिम्स प्रबंधन ने दिया निर्देश
रांची : रिम्स के आॅपरेशन थियेटर (आेटी) को संक्रमण मुक्त रखने का निर्देश रिम्स प्रबंधन ने दिया है. समय-समय पर ओटी के संक्रमण की जांच कराने को कहा गया है. यह निर्देश सोमवार को रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिया गया.
सूत्रों की मानें, तो सर्जन की शिकायत थी कि समय-समय पर ओटी स्वाॅब की जांच नहीं करायी जाती है. इसके बाद रिम्स प्रबंधन ने गंभीरता से लिया. निदेशक ने सभी विभागाध्यक्षों से आग्रह किया है कि वह ओटी प्रोटोकॉल का पालन करायें.
सिस्टर इंचार्ज को अपने स्तर से समय-समय पर निर्देश दें. इसके अलावा यह भी कहा गया है कि यह जानकारी प्रबंधन को भी करायी जाये कि आपके ओटी में स्वाॅब की जांच कब हुई है. जांच में क्या रिपोर्ट मिला है. एहतियात बरतने से ही ओटी में संक्रमण नहीं फैलेगा और मरीजों की जान का खतरा भी कम होगा.
एक सप्ताह में आउट सोर्सिंग की बहाली की प्रक्रिया होगी शुरू
रिम्स में आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन एक सप्ताह के अंदर होने की उम्मीद है. सोमवार को रिम्स में आउटसोर्सिंग का टेक्निकल बिड पर फैसला ले लिया गया. अब एक सप्ताह के अंदर प्राइस बिड की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जायेगी. इसके बाद आउटसोर्सिंग पर बहाली शुरू कर दी जायेगी.
रांची : रिम्स में इलाज के दौरान मरने वाले (जिनका पोस्टमार्टम होता है) मरीज के परिजन को कफन खदीकर नहीं लाना पड़ेगा. मरीज के परिजन को रिम्स मुफ्त कफन मुहैया करायेगा. पोस्टमार्टम विभाग में कफन का कपड़ा रखा रहेगा. पोस्टमार्टम के बाद शव को उसी कपड़े में लपेट कर दिया जायेगा. वर्तमान में रिम्स के पोस्टमार्टम होने के बाद परिजनों को खुद कफन खरीदकर लाना पड़ता है. इससे परिजनों को अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है. रिम्स उपाधीक्षक डॉ संजय कुमार ने रिम्स प्रबंधन को प्रस्ताव दिया है कि कफन का कपड़ा खरीदने में 35 रुपये का खर्च आयेगा. प्रायोगिक तौर 100 की संख्या में कपड़ा मंगाया जायेगा.
अगर यह प्रयोग सफल हो जाता है, तो इसे वार्ड में भी लागू किया जा सकता है. उपाधीक्षक डॉ संजय का मानना है कि मरीज की मौत के बाद परिजन मानसिक रूप से टूट जाते हैं. कई मरीजों के पास कपड़ा खरीदने के लिए भी पैसा नहीं रहता है. ऐसे में मामूली खर्च पर रिम्स ऐसे लोगों को मदद कर सकता है. यह प्रस्ताव रिम्स प्रबंधन के पास भेजा गया है.
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