रांची : धार्मिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रख कानून बनाये सरकार

Updated at : 06 Aug 2018 8:40 AM (IST)
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रांची : धार्मिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रख कानून बनाये सरकार

‘आदिवासी हित व मसलों’ पर झारखंड आदिवासी संघर्ष मोर्चा का सेमिनार ग्राम सभा को शक्ति मिलेगी तो हमारी समस्याएं दूर होंगी रांची : झारखंड आदिवासी संघर्ष मोर्चा के मुख्य संयोजक डॉ करमा उरांव ने कहा कि सरकार गांव की व्यवस्था और धार्मिक रीति-रिवाज को ध्यान में रखते हुए ही नियम-कानून बनाये़ पांचवीं अनुसूची को प्रभावी […]

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‘आदिवासी हित व मसलों’ पर झारखंड आदिवासी संघर्ष मोर्चा का सेमिनार
ग्राम सभा को शक्ति मिलेगी तो हमारी समस्याएं दूर होंगी
रांची : झारखंड आदिवासी संघर्ष मोर्चा के मुख्य संयोजक डॉ करमा उरांव ने कहा कि सरकार गांव की व्यवस्था और धार्मिक रीति-रिवाज को ध्यान में रखते हुए ही नियम-कानून बनाये़ पांचवीं अनुसूची को प्रभावी और पेसा कानून लागू किया जाये़ यदि सरकार केंद्रीय कानून लागू नहीं करती है, तो क्या यह अपराध नहीं है? पूरी दुनिया में आदिवासियों को दरकिनार कर उनका अाधार लूटने का प्रयास किया जाता है़
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि इसके उदाहरण हैं. सरकार अपनी नीतियों में सुधार लाये़ वे ‘आदिवासी हित व मसलों’ पर मोर्चा द्वारा पाही पैलेस, मोरहाबादी में आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे़
एमपी-एमएलए सरकार के पिट्ठू, नहीं करते विवेक का इस्तेमाल
इस अवसर पर बलदेव कच्छप ने कहा कि जब से झारखंड बना है, तब से आदिवासियों काे नक्सली बता कर बड़ी तादाद में जेल में डाला गया है़ पत्थलगड़ी हमारी परंपरा है, पर यह करने पर देशद्रोह का अारोप लगाया जाता है़ बीजेपी के एमपी, एमएलए सरकार के पिट्ठू बन चुके हैं और स्व विवेक का इस्तेमाल नहीं करते़ डॉ प्रकाश उरांव ने कहा कि हमारे जनप्रतिनिधि हमें धोखा देते हैं. यह पढ़ने, पढ़ाने का नहीं, एक्शन में उतरने का समय है़
परंपराओं को बचाने, पुनर्स्थापित करने की जरूरत
साहित्यकार महादेव टोप्पो ने कहा कि हमारी पहचान व अस्तित्व संकट में हैं. जो परंपराएं छूट रही हैं, उन्हें बचाने और पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है़ मीडिया पर दबाव बनाना चाहिए कि हमारी भाषा-संस्कृति की बातें रखी जाये़ं एलिसबा एक्का ने कहा कि आदिवासी अापसी लड़ाई बाद में लड़ सकते हैं, पहले मिल कर अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़े़ं बासिल किड़ो ने कहा कि हमें अपनी जमीन से जुड़े रहने की जरूरत है़ धर्म के नाम पर आपसी मन-मुटाव न हो़ हम सरकार को टैक्स देते हैं, इसलिए हमें उससे हिसाब-किताब मांगने का भी अधिकार है़ यदि हमारी अगुआई करनेवाले सही रहेंगे, तो जीत हमारी है़
सरकार ईसाइयों को डराती है और वे डर जाते हैं
संयोजक प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि बीजेपी कभी कुर्मी को आदिवासी बनाने, तो कभी सरना-ईसाई की बात कर झारखंडी एकता को तोड़ना चाहती है़ सरकार ईसाइयों को डराती है और वे डर जाते हैं. यह नहीं होना चाहिए़ यदि पत्थलगड़ी में कोई गलती है, तो हमें उस पर भी बोलना चाहिए़ ऐसा नहीं होने से सरकार को मौका मिल गया़ कई बार ईसाई भी हमें पूरा समर्थन नहीं करते़ हमारे बंद के समय कई ईसाई विद्यालय खुले रहे़ एक ईसाई नेता ने कहा कि आदिवासियों का कोई धर्म नहीं होता़ ऐसा करना-कहना ठीक नहीं है़ ग्राम सभा को शक्ति मिलेगी, तो हमारी समस्याएं दूर होंगी़
इस्तीफा दें टीएसी सदस्य आदिवासियों को अलग धर्म कोड मिले
इस अवसर पर मांग की गयी कि भूमि अधिग्रहण कानून को निरस्त किया जाये व इसके लागू होने के लिए जिम्मेदार टीएसी सदस्य तत्काल इस्तीफा दे़ं धर्मांतरण विधेयक व मॉब लिंचिंग से राज्य में अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. धर्मांतरित ईसाइयों के एसटी आरक्षण पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं, जो भाजपा की बांटो और राज करो की नीति के तहत है़
हम इसका विरोध करते हैं. आरक्षित श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय नीति व सहायता बहाल की जाये़ सरकार विद्यालयों की संख्या कम करने की नीति समाप्त करे़ आदिवासी-मूलवासी हित में स्थानीय नीति में सुधार किया जाये़ आदिवासियों को अलग धर्म कोड दिया जाये़ यह दुष्प्रचार बंद हो कि सरना-सनातन एक हैं.
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