संथालपरगना में गैर-आदिवासी बेच सकेंगे जमीन, आदिवासी जमीन खरीद के लिए रांची निगम में थाना क्षेत्र की बाध्यता हटाने की सिफारिश

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Aug 2018 4:41 AM

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रांची : जनजातीय परामर्शदातृ समिति (टीएसी) की शुक्रवार को हुई 22 वीं बैठक में डॉ लुईस मरांडी की अध्यक्षतावाली समिति ने अपनी रिपाेर्ट मुख्यमंत्री रघुवर दास काे साैंपी. रिपाेर्ट में समिति ने संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) में संशाेधन कर वहां गैर अादिवासी को अपनी जमीन बेचने का अधिकार देने की सिफारिश की है. […]

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रांची : जनजातीय परामर्शदातृ समिति (टीएसी) की शुक्रवार को हुई 22 वीं बैठक में डॉ लुईस मरांडी की अध्यक्षतावाली समिति ने अपनी रिपाेर्ट मुख्यमंत्री रघुवर दास काे साैंपी. रिपाेर्ट में समिति ने संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) में संशाेधन कर वहां गैर अादिवासी को अपनी जमीन बेचने का अधिकार देने की सिफारिश की है. इस पर फैसले से पहले महाधिवक्ता की राय ली जायेगी. बैठक में समिति ने रांची नगर निगम क्षेत्र में छाेटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) में भी संशाेधन की सिफारिश की है. रांची नगर निगम क्षेत्र में आदिवासी जमीन खरीद के लिए थाना क्षेत्र की सीमा हटायी जायेगी, पर खरीद सिर्फ आवासीय उद्देश्य से हाेगी. खरीद 20 डिसमिल से अधिक नहीं की जा सकेगी. एक व्यक्ति सिर्फ एक ही बार जमीन खरीद सकता है.

बैठक में गैर आदिवासी पुरुष से शादी करने के बाद एसटी महिला पर आदिवासी जमीन खरीदने और अन्य लाभ लेने पर प्रतिबंध लगाने पर विचार- विमर्श हुआ. ओड़िशा ने एक कानून बना कर इस तरह का लाभ लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है. झारखंड भी अोड़िशा शिड्यूल एरिया ट्रांसफर अॉफ इममुवेवल प्रोपर्टी बाइ शिड्यूल ट्राइब रेगुलेशन के आधार पर कानून बनाने पर विचार किया गया. बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति हो गयी है. इस संबंध में अलग से कोई रेगुलेशन बनेगा या वर्तमान कानून में ही संशोधन होगा, इस मुद्दे पर देश भर के विभिन्न कोर्ट की रुलिंग की समीक्षा कर महाधिवक्ता की राय के बाद कार्यवाही होगी. प्रोजेक्ट भवन सभागार में हुई टीएसी की बैठक में सीएम रघुवर दास के अलावा अन्य संबंधित विभाग के मंत्री और सदस्य मौजूद थे.
उपसमिति ने सीएम को रिपोर्ट सौंपी : सीएनटी एरिया में जनजातीय समुदाय के लोगों को अावास के लिए जमीन खरीदने में थाना क्षेत्र की बाध्यता समाप्त करने और एसपीटी एरिया में गैर जनजातीय लोगों को आवासीय उद्देश्य से जमीन का क्रय -विक्रय करने के मामले में कल्याण मंत्री लुइस मरांडी की अध्यक्षता में उपसमिति बनायी गयी थी. इस उप समिति ने अपनी रिपोर्ट टीएसी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री को सौंप दी है.
आम लोगों से ली जायेगी राय, तीन माह में पूरा होगा काम : बैठक के बाद टीएसी के सदस्य विधायक शिवशंकर उरांव, जेबी तुबिद व लुइस मरांडी ने बताया , सरकार पारंपरिक ग्राम प्रधानों की भी बैठक बुला कर उनकी राय लेगी. कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले अखबारों के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर इस पर आम लोगों की भी राय ली जाये. यह काम तीन माह में पूरा कर लिया जायेगा. इसके बाद ही सरकार अंतिम निर्णय लेगी.
महिला के जाति प्रमाण पत्र में पति का नाम जरूरी : बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि यदि कोई विवाहित महिला जाति प्रमाण पत्र बनाना चाहती है, तो आवेदन में पति का नाम देना जरूरी होगा. प्रमाण पत्र उसके पति की जाति के आधार पर ही बनेगा.
मुंडहर मुंडा, खूंटकटी मुंडा, कंपार्ट मुंडा, लोहरा व लोहार, चिक बड़ाइक व बड़ाइक, घटवाल व घटवार पर नौ अगस्त को बैठक : टीएसी सदस्य ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा की अध्यक्षता में एक अौर उप समिति बनी थी. इसके तहत मुंडहर मुंडा, खूंटकटी मुंडा, कंपार्ट मुंडा, लोहरा व लोहार, चिक बड़ाइक व बड़ाइक, घटवाल व घटवार जैसी जातियां, जो संभवत: एसटी तो हैं, पर उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है, इस पर विचार कर रिपाेर्ट देनी थी.
इस उप समिति की बैठक फिर से नौ अगस्त को होगी. इसमें कार्मिक , कल्याण व अन्य संबंधित विभागों के सचिव के अलावा जेबी तुबिद, शिवशंकर उरांव, सुखदे‌व भगत व ताला मरांडी रहेंगे. नीलकंठ सिंह मुंडा अध्यक्षता करेंगे. उप समिति 15 अगस्त तक अपनी अनुशंसा दे देगी. सरकार अधिकतम छह माह के अंदर इस पर निर्णय लेगी.
आदिवासियों के लिए विशेष सचिवालय
बैठक में टीएसी के कार्य और इसकी रिपोर्ट व अनुशंसा के आधार पर जनजातीय मुद्दों की मॉनिटरिंग सहित अन्य कार्य को जारी रखने को लेकर टीएसी के लिए विशेष सचिवालय या कार्यालय बनाने संबंधी शिवशंकर उरांव के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. इस पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बनी है.
आदिवासियों के कल्याण के लिए अलग विभाग
बैठक में संविधान की धारा 164-ए के तहत आदिवासी कल्याण के लिए अलग विभाग बनाने पर भी बैठक में विचार हुआ. राज्यपाल की सलाह पर बैठक में रखे गये इस प्रस्ताव के संबंध में सीएम ने कहा : एक माह के अंदर इस पर विस्तृत चर्चा व सूचना इकट्ठा कर निर्णय लिया जायेगा.
धर्म बदलने पर नहीं मिलेगा लाभ
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि यदि कोई जनजातीय व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे जनजातीय का लाभ न मिले. इस संबंध में विधानसभा में भी सवाल उठ चुका है. सरकार ने अपना जवाब भी दिया है. टीएसी की बैठक में दोहराया गया कि झारखंड सरकार इस मुद्दे पर केरल सरकार बनाम चंद्रमोहन केस का अध्ययन कर रही है. मुख्यमंत्री ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि सरकार गंभीरता से इस विषय पर आगे बढ़ रही है. बैठक में तीन सदस्यों विकास सिंंह मुंडा, चमरा लिंडा व भाजपा विधायक हरे कृष्ण सिंह (चेरो जनजाति) को छोड़ सभी सदस्य उपस्थित थे.
एसपीटी आैर सीएनटी एक्ट में संशाेधन की सिफारिश
एसटी महिला से विवाह कर लाभ लेने पर रोक के लिए बनेगा कानून
टीएसी की बैठक में प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति
देश भर के कोर्ट की रुलिंग की समीक्षा कर महाधिवक्ता की राय के बाद कार्रवाई होगी
थाना व एसपीटी क्षेत्र में संशोधन के लिए सर्वदलीय बैठक भी बुलायी जायेगी
पारंपरिक ग्राम प्रधानों की भी होगी बैठक
मीडिया में प्रचार से भी विचार होंगे आमंत्रित
इन सबके लिए तीन माह की समय सीमा
टीएसी की बैठक में लिये गये निर्णय
एसटी विद्यार्थियों को प्री व पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के रूप में अभी 500 करोड़ का भुगतान. सीएम एक सप्ताह के अंदर दिल्ली जाकर केंद्र से राशि अौर बढ़ाने की मांग करेंगे
रांची विवि में अभी के जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग के बजाय जनजातीय भाषावार विभाग बनाने पर चर्चा
जनजातीय भाषाअों के लिए भाषा एकेडमी बनाने पर भी चर्चा (दोनों प्रस्ताव राज्यपाल के सुझाव पर)
राज्य के 11 आश्रम विद्यालयों को सीबीएससी से संबद्ध किया जायेगा. चार विद्यालय पहले ही हो गये हैं संबद्ध
संविधान की धारा 164-ए के तहत आदिवासी कल्याण मंत्रालय बनाने पर भी विचार. एक माह के अंदर विस्तृत चर्चा व इस संबंध में सूचनाएं एकत्र कर सीएम लेंगे निर्णय
एक समिति बनेगी, जो नियुक्ति, प्रोन्नति व प्रतियोगी परीक्षा में आरक्षण के मुद्दे पर विवाद या त्रुटि रोकने के लिए निर्णय लेगी

उप समिति की अनुशंसा

1. वर्तमान सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों एवं गैर अनुसूचित जनजातियों की मांग को ध्यान में रख कर भूमि हस्तांतरण हेतु एसपीटी एक्ट को इस शर्त के साथ संशोधन करने पर विचार किया जा सकता है कि भूमि का हस्तांतरण जमाबंदी रैयतों/रैयतों के बीच ही किया जाएगा. यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि कोई व्यक्ति भूमिहीन न हो. साथ ही एसपीटी एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत आनेवाले अनुसूचित जनजातियों एवं उनके संबंधित भूमि के संबंध में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है.
2. उप समिति की दूसरी अनुशंसा यह है कि राज्य सरकार रांची नगर निगम क्षेत्र के लिए आवासीय उपयोग हेतु भूमि क्रय के संबंध में पुलिस थाना क्षेत्र के बंधेज को समाप्त करने पर विचार इस शर्त के साथ कर सकती है कि भूमि का हस्तांतरण झारखंड राज्य के अनुसूचित जनजाति के जमाबंदी रैयत/रैयत के मध्य ही सीमित रहेगा तथा हस्तांतरण की अधिकतम सीमा 20 डिसमिल जमीन से अधिक नहीं होगी. साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि कोई भी व्यक्ति भूमिहीन न हो. यह सुविधा जमाबंदी रैयत/रैयत के परिवार का कोई एक व्यक्ति सिर्फ एक अवसर के लिए प्राप्त कर सकेगा.
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