वित्त आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ की बैठक, सभी दलों ने राज्य के लिए मांगी आर्थिक मदद

Updated at : 03 Aug 2018 6:06 AM (IST)
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वित्त आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ की बैठक, सभी दलों ने राज्य के लिए मांगी आर्थिक मदद

सिर्फ खनिज संपदा के दोहन पर ही नहीं, मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया जाये रांची : वित्त आयोग के साथ राजनीतिक दलों की हुई बैठक में सभी ने राज्य को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद देने की मांग उठायी. हालांकि जहां सत्ता पक्ष ने सरकार के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए आर्थिक मदद […]

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सिर्फ खनिज संपदा के दोहन पर ही नहीं, मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया जाये
रांची : वित्त आयोग के साथ राजनीतिक दलों की हुई बैठक में सभी ने राज्य को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद देने की मांग उठायी. हालांकि जहां सत्ता पक्ष ने सरकार के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए आर्थिक मदद बढ़ाने की मांग की, वहीं विपक्षी दलों ने फिजूलखर्ची के लिए सत्ता पक्ष को आड़े हाथों लेते हुए वित्त आयोग से राज्य हित में आर्थिक मदद बढ़ाने की मांग रखी.
संसाधन और आदिवासी-विस्थापितों पर ध्यान देने की है जरूरत : भाजपा
15वें वित्त आयोग के समक्ष सत्ताधारी दल भाजपा की ओर से महामंत्री दीपक प्रकाश और उपाध्यक्ष प्रदीप वर्मा ने पार्टी का पक्ष रखा. पार्टी की ओर से 11 सूत्री मांग पत्र रखा गया. कहा गया कि झारखंड असीम संभावनाओं का राज्य है.
इसकी रत्नगर्भा भूमि को प्रकृति ने मुक्तहस्त से सजाया और संवारा है. जिस प्रकार से देश के सर्वांगीण विकास एवं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यहां की खनिज संपदा का दोहन होता रहा है, उस अनुपात में राज्य में मूलभूत सुविधाओं के विकास का कार्य नहीं हो सका है.
वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद वर्ष 2014 तक राज्य में 9 सरकारें आयी और 3 बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य की प्रगति अपेक्षाकृत कम हुई. वर्ष 2014 से राजनीतिक स्थिरता आयी है और हमारी प्रगति तेज हुई है. इसमें वित्त आयोग से सहयोग की जरूरत है, जिससे राज्य का और तेजी से विकास हो सके.
भाजपा की ओर से दिये गये ज्ञापन में कहा गया है कि वित्त आयोग राज्य में वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को सरल करते हुए विकास कार्यों के लिए भूमि की उपलब्धता पर समुचित ध्यान दे. राज्य में 27 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजातियों की है, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहतर करना आवश्यक है.
खनिज की उपलब्धता के आधार पर यहां वृहत उद्योग एवं खनन कंपनियां कार्यरत हैं, लेकिन ये कंपनियां यहां के आधारभूत संरचना पर अत्यधिक दबाव तो डालती ही हैं. साथ ही जल, जंगल एवं जमीन का विस्थापन भी करती है. केंद्र सरकार को पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को पर्याप्त संसाधन की व्यवस्था करनी चाहिए. इन कंपनियों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सीमित हैं. इन सभी के कारण यहां की जनता गरीब एवं कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं.
70 प्रतिशत जनता कृषि पर आधारित है. सिंचाई की बड़ी परियोजना को पूरा करने के लिए संसाधन दें. राज्य के 24 में से 19 जिले उग्रवाद प्रभावित हैं. गत वर्षों में उग्रवादी घटनाओं को काफी नियंत्रित भी किया गया है, लेकिन राज्य की पुलिस प्रशासन को और चुस्त-दुरुस्त तथा तकनीकी रूप से सक्षम एवं साधन संपन्न बनाने के लिए भी संसाधन की आवश्यकता है. रेल नेटवर्क को बढ़ाने में सहयोग किया जाये.
सरकार की लोकलुभावनी योजनाओं पर कटौती करने की जरूरत : झामुमो
नेता प्रतिपक्ष सह झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अन्य क्रियाओं से निर्धारित होता है. ऐसे में वित्त आयोग से अनुरोध है कि केंद्र राजस्व के बंटवारे के संबंध में कोई भी फार्मूला निकालने से पहले झारखंड के सामाजिक, आर्थिक सूचकांकों पर विशेष संज्ञान लेना चाहिए. इसमें झारखंड की भौगोलिक का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.
झारखंड में आदिवासी आबादी को मापदंड के रूप में अपनाते हुए संसाधन आवंटन पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया है कि लोकलुभावन योजनाओं पर खर्च में कटौती करने वाले राज्यों को प्रोत्साहन देने का काम वित्त आयोग द्वारा किया जाना है.
इसका अर्थ है कि जो सरकार लोकलुभावन योजनाओं पर कम राशि खर्च करेगी, उसे केंद्रीय राशि के आवंटन में प्रोत्साहन दिया जायेगा. यदि झारखंड के मुख्यमंत्री यह निर्णय लेते हैं कि मानसरोवर की यात्रा करने वाले झारखंडियों को एक लाख रुपये का अनुदान दिया जायेगा, तो यह कौन तय करेगा की यह योजना लोकलुभावन या लोकोपयोगी या कल्याणकारी योजना है. यदि सौ करोड़ की लागत से मोरहाबादी मैदान में टाइम स्क्वायर बनेगा, तो यह कौन तय करेगा कि यह योजना कौन सी है. आयोग का टोटल फर्टिलिटी रेट कहता कि जिन राज्यों को टीएफआर कम है.
यानि 2:1 है या उससे कम है, वैसे राज्यों को केंद्रीय राजस्व आवंटन में प्रोत्साहन दिया जायेगा. टीएफआर वहीं ज्यादा है जहां गरीब ज्यादा हैं. जहां निरक्षरता, दलित, आदिवासी ज्यादा हैं. यहां टीएफआर घटाने को प्रोत्साहन राशि से जोड़ना विनाशकारी साबित होगा. श्री सोरेन ने कहा कि बदले हुए कर प्रणाली के आलोक में वित्त आयोग के स्वरूप में नयापन दिखना चाहिए था, जो नहीं दिखता है.
सिर्फ झारखंड को जीएसटी के कारण जून 2018 तक लगभग 2500 करोड़ की कमी राजस्व में हुई है. इसमें लगभग 30 प्रतिशत का शॉर्टफाल हुआ है. वर्ष 2022 तक इस कमी की भरपाई केंद्र सरकार करेगी, लेकिन उसके बाद क्या होगा. एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 तक राज्य सरकार के राजस्व में लगभग 1300 करोड़ का नुकसान होगा. श्री सोरेन ने आयोग के टीओआर में न्यू इंडिया-2022 पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह भाजपा का पॉलिटिकल स्लोगन है. इसके लिए धन कर्णांकित करना सही नहीं है.
झारखंड को मिले विशेष राज्य का दर्जा : कांग्रेस
15वें वित्त आयोग के समक्ष कांग्रेस ने झारखंड को विशेष राज्य का दर्जा देते हुए विशेष अनुदान देने की मांग की है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि झारखंड में बीपीएल परिवार 48 प्रतिशत है, जबकि देश में 29 प्रतिशत हैं.
विशेष पैकेज के लिए पांच मापदंड होते हैं. इसमें झारखंड चार मापदंड को पूरा करता है. केवल एक मापदंड अंतरराष्ट्रीय सीमा को झारखंड पूरा नहीं करता. डॉ अजय ने कहा कि झारखंड में प्रति व्यक्ति आय को अधिक बताया जाता है, जबकि यहां काफी गरीबी है.
प्रति व्यक्ति आय सेल, बीसीसीएल, टाटा स्टील जैसी कंपनियों की वजह से है न कि लोगों की आय से. आबादी के घनत्व मापदंड में झारखंड को अधिक बताया जाता है, जबकि यह गलत है. झारखंड की आबादी का घनत्व 441 बताया जाता है, जबकि देश में 380 है.
आबादी घनत्व केवल रांची, जमशेदपुर और धनबाद में अधिक है. अन्य जिलों में यह काफी कम है. डॉ अजय ने कहा कि वित्त आयोग से पार्टी ने विशेष अनुदान की मांग की है, क्योंकि यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सड़क, पेयजल आदि की स्थिति खराब है. 27 प्रतिशत की आबादी आदिवासियों की है, जो काफी पिछड़े हुए हैं.
इसके लिए झारखंड को ज्यादा अनुदान की जरूरत है. डॉ अजय ने कहा कि बैठक में विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गयी, जब सत्ता में शामिल भाजपा की सहयोगी पार्टी आजसू ने कहा कि यहां भुखमरी से मौत हो रही है, जबकि सरकार यह बात नहीं मानती. आजसू ने कहा कि झारखंड सबसे पिछड़ा राज्य है, जबकि सबसे ज्यादा समय तक यहां भाजपा का ही शासन रहा है.
कंपनियों के लाभ में भी हिस्सा मिले : झाविमो
रांची : झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने वित्त आयोग के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य को ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासियों के विकास और विस्थापन की समस्या के समाधान के लिए बड़ी राशि चाहिए़ झारखंड खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्य है, लेकिन इस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है. सिर्फ रॉयल्टी लेकर हमें चुप हो जाना पड़ता है़
खनिजों के उत्खन्न का दंश हम पीढ़ी दर पीढ़ी झेलते आ रहे है़ं राज्यों के शेयर बंटवारे में राज्य के खनन क्षेत्रफल को भी जोड़ा जाये़ खनिज संपदा में ही रॉयल्टी नहीं, कंपनियों के लाभ में भी हिस्सेदारी हो़ इस बिंदु को जोड़ा जाये़ ग्रामीण क्षेत्र, शहरी क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र को अलग-अलग आधार बनाया जाये़
खनिज संपदा में सही हिस्सेदारी मिले : आजसू
आजसू की ओर से वित्त आयोग को 11 बिंदुओं पर सुझाव दिये गये़ पार्टी की ओर से केंद्रीय प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत और जयंत घोष ने पक्ष रखा़ आजसू की ओर से कहा गया कि आयोग ने जनसंख्या को विकास मद के लिए मदद दिये जाने का आधार बनाया है़
जनसंख्या देखने के साथ-साथ इसमें शामिल लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी देखी जाये़ राज्य में 80 प्रतिशत आबादी मूलवासियों की है़ इनका अपना इतिहास रहा है़ इनके विकास के लिए वित्त आयोग को नया मापदंड बनाना चाहिए़ राज्यों के जीएसडीपी के आकलन में कई तरह की खामियां हैं. इसको नये फॉर्मूले के आधार पर तय किया जाये, जिससे झारखंड को उसका हक मिल सके़
आदिवासियों का रखा जाये ख्याल : सीपीआइ
पूर्व सांसद सह सीपीआइ नेता भुवनेश्वर मेहता ने कहा कि झारखंड में उद्योग लग रहे हैं, लेकिन पर्यावरण का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. इन क्षेत्रों में सड़क भी नहीं है. इसका ध्यान रखा जाना चाहिए. झारखंड खनिज संपदाओं से परिपूर्ण है. इसके बावजूद यहां से लोगों का पलायन हो रहा है.
ऐसे में हमें इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि कैसे यहां के लोगों को रोजगार से जोड़ कर पलायन से रोका जाये. आदिवासियों के विकास को लेकर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया है. इससे झारखंड को 2500 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है. 2022 के बाद इसकी भरपाई कैसे होगी, इस पर विचार करने की जरूरत है.
झारखंड को मिले विशेष राज्य का दर्जा : राजद
राजद के प्रदेश महासचिव आबिद अली ने 15 वें वित्त आयोग के समक्ष झारखंड को विशेष राज्य का दर्जा देने और केंद्रीय करों (टैक्स) में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की मांग की. उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 18 साल पूरे होने के बावजूद यहां समुचित विकास नहीं हुआ है.
जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य नहीं हुआ, जिस वजह से खुशी निराशा में बदल गयी. दलित, आदिवासी व पिछड़ा वर्ग नाखुश है. अल्पसंख्यक अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड में खनिज व वन संपदा प्रचुर मात्रा में है, लेकिन 37 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं. इस पर विशेष योजना बनाने की जरूरत है.
विकास की नीतियां विनाशकारी : माकपा
माकपा की राज्य कमेटी की अोर से 15वें वित्त आयोग को स्मार पत्र दिया गया है. इसमें कहा गया है कि बिहार से अलग होने के बाद से ही झारखंड को प्रति व्यक्ति निम्न आवंटन मिल रहा है. अब इसमें वृद्धि होनी चाहिए. मनरेगा जैसी केंद्रीय योजना में मजदूरी कम बजट के कारण प्रभावित हो रही है.
भारत सरकार की बहुत सी विकास नीतियां व कार्यक्रम पर्यावरण व स्थानीय लोगों पर प्रत्यक्ष रूप से विनाशकारी प्रभाव डाल रहे हैं. इसके आकलन एवं क्षति पूर्ति के लिए विशेष आवंटन की जरूरत है. यह किये बिना विकास की बात करना बेमानी साबित होगा. प्रतिनिधिमंडल में माकपा के राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रकाश विप्लव एवं राज्य कमेटी सदस्य समीर दास शामिल थे.
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