झारखंड में बाघों को बचाना चुनौती, आठ गांवों का होगा पुनर्वास

Updated at : 30 Jul 2018 12:07 AM (IST)
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झारखंड में बाघों को बचाना चुनौती, आठ गांवों का होगा पुनर्वास

पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में पड़ते हैं आठ गांव, सीएस ने पुनर्वास नीति को दी मंजूरी रांची : पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में आठ गांव पड़ते हैं. इन गांवों को दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए राज्य सरकार अलग नीति बना रही है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक कमेटी […]

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पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में पड़ते हैं आठ गांव, सीएस ने पुनर्वास नीति को दी मंजूरी

रांची : पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में आठ गांव पड़ते हैं. इन गांवों को दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए राज्य सरकार अलग नीति बना रही है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक कमेटी ने इस पुनर्वास नीति को मंजूरी दे दी है. अब यह राज्य कैबिनेट में अनुमोदन के लिए जायेगा. इससे कोर एरिया में रहने वाले आठ गांवों के लोगों का पुनर्वास हो सकेगा. प्रथम चरण में चार गांवों को पुनर्वास करने की योजना है.
एक-एक गांव के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की बात हो रही है. एक परिवार को 15 लाख रुपये पुनर्वास पैकेज के रूप में दिया जायेगा. इसमें 10 लाख रुपये जमीन लेकर घर बनाने के लिए और पांच लाख रुपये आजीविका के लिए दिया जायेगा. 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को एक परिवार माना जायेगा. इससे कई घरों को काफी राशि मिल पायेगी. रविवार को होटल बीएनआर में वर्ल्ड टाइगर डे पर आयोजित कार्यशाला में यह जानकारी अधिकारियों ने दी. वन विभाग के पीसीसीएफ (हॉफ) डॉ संजय कुमार ने कहा कि इको-सिस्टम को बचाने के लिए बाघ जरूरी है.
बाघों के संरक्षण से हम पूरी अर्थव्यवस्था को बचाते हैं. वर्तमान में बाघों को बचाना चुनौती है, जो आनेवाले समय में और बढ़ेगी. इसके लिए विभाग ने योजना तैयार की है. नयी पुनर्वास नीति के साथ-साथ कम्युनिटी डेवलपमेंट के माध्यम से विकास की योजना तैयार हो रही है. आसपास के लोगों की सहभागिता तय की जा रही है.
पलामू टाइगर रिजर्व पर है जैविक दबाव
वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य डीएस श्रीवास्तव ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व पर जैविक दबाव है. यह बाघों के संरक्षण के लिए ठीक नहीं है. करीब 1.40 लाख जानवर हैं. 189 गांव हैं. एक जानवर को कम से कम 15 किलो भोजन चाहिए. 32 हजार घर हैं. इनके लिए 25 से 28 किलो प्रति परिवार भोजन चाहिए. ऐसी स्थिति में हम बाघों का संरक्षण नहीं कर सकते हैं. इस दबाव को कम करना होगा.
विभागों के बीच तालमेल जरूरी
भारतीय वन्य जीव संस्थान के पूर्व निदेशक पीआर सिन्हा ने कहा कि किसी भी टाइगर रिजर्व को बचाने के लिए विभागों के बीच तालमेल होना जरूरी है. रिजर्व एरिया के लिए अलग से सरकारी स्कीम चलाने की जरूरत है. यहां तो रांची के ब्लॉक में जो स्कीम चल रही है, वही रिजर्व एरिया के ब्लॉक में चल रही है. वहां के गांवों को हटना होगा. स्पेशल एरिया फॉर इको डेवलपमेंट कार्यक्रम चलाना होगा.
विकास की अवधारणा को बदलने की जरूरत
पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) एलआर सिंह ने कहा कि जंगल को नुकसान पहुंचा कर करनेवाले काम को विकास कह रहे हैं. विकास के लिए प्रकृति का संरक्षण जरूरत है. विकास की वर्तमान अवधारणा को बदलना होगा. पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या कम हुई तो इसके कई कारण हैं. इसमें वहां की गतिविधियां भी शामिल है. चाहे वह किसी कारण से भी हो. धन्यवाद ज्ञापन पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक एमपी सिंह ने किया. इस मौके पर वन विभाग के अतिरिक्त, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग, परिवहन, कल्याण व अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे.
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