झारखंड में 29% लोगों को पत्नी पर भरोसा नहीं, 60% विवाहित जोड़े नहीं अपनाते गर्भनिरोधक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Jul 2018 12:10 PM
राहुल गुरु रांची : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. सर्वेक्षण के नतीजों में सामने आया है कि झारखंड के 29 फीसदी पुरुषों को अपनी पत्नी पर भरोसा नहीं है. वे मानते हैं कि गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने वाली महिला के संबंध एक से अधिक लोगों से हो सकते […]
राहुल गुरु
रांची : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. सर्वेक्षण के नतीजों में सामने आया है कि झारखंड के 29 फीसदी पुरुषों को अपनी पत्नी पर भरोसा नहीं है. वे मानते हैं कि गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने वाली महिला के संबंध एक से अधिक लोगों से हो सकते हैं. वहीं, 60 प्रतिशत विवाहित महिला-पुरुष गर्भ निरोधक के साधनों का इस्तेमाल नहीं करते.
शेष 40 फीसदी मामलों में गर्भनिरोधक उपायों को अपनाने की दर शहरों में 47 और ग्रामीण इलाकों में 38 फीसदी है. खास बात यह है कि 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग के 56 फीसदी पुरुषों का मानना है कि गर्भनिरोधक उपायों को अपनाने का काम महिलाओं का है, उनका नहीं.
महिला नसबंदी सबसे लोकप्रिय साधन
आंकड़ेबताते हैं कि गर्भनिरोधक उपायों के मामलों में महिला नसबंदी की हिस्सेदारी 77 फीसदी है. कुल गर्भ निरोधक उपायों के अपनाने के मामलों में 31 फीसदी के साथ महिलाओं की नसबंदी सबसे अधिक लोकप्रिय है. निरोध का इस्तेमाल दो फीसदी लोग करते हैं, जबकि गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग तीन फीसदी लोग करतेहैं.
पुरुषों में नसबंदी की दर 0.2 फीसदी है. वहीं 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की 93 फीसदी महिलाएं और 98 फीसदी पुरुष किसी तरह के गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं करते.यही वजह है कि युवतियां कम उम्र में मां बन रही हैं. झारखंड में 17 साल की उम्र में लगभग 5 फीसदी,18 की उम्र में 13 फीसदी और 19 की उम्र में 26 फीसदी महिलाएं अपने पहले बच्चे को जन्म दे देती हैं.
वहीं, 17 साल की उम्र में 8 फीसदी,18 की उम्र में 18 और 19 की उम्र में 33 फीसदी महिलाएं गर्भ धारण कर लेती हैं. आंकड़ों के मुताबिक, आज भी 38 फीसदी लकड़ियों की शादी कम उम्र में हो जाती है. 15-19 आयु वर्ग में वो विवाहित महिलाएं, जो कभी स्कूल नहीं गयीं, उनमें से 19 फीसदी मां बन जाती हैं. जिन लड़कियों ने 12वीं तक या उससे अधिक पढ़ाई की है, उनमें यह दर घटकर लगभग 6 फीसदीरहगयी है. उक्त आयु वर्ग में ही जो कभी स्कूल नहीं गयीं, उनमें 25 फीसदी ने गर्भधारण कर लिया था, जबकि 12वीं या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त महिलाओं में यह दर 9 फीसदी थी.
उम्र और शिक्षा का पड़ा है असर
आंकड़ों के मुताबिक, 15 से 19 वर्ष के आयु वर्ग में गर्भनिरोधक उपायों को अपनाने की दर 7 फीसदी थी, जो 30-40 आयु वर्ग में बढ़कर 52-53 फीसदी हो गयी. इसी तरह पढ़ाई के मामले में भी देखने को मिला. 12 या उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं में नसबंदी की दर 37 फीसदी थी, जबकि कभी स्कूल नहीं गयी महिलाओं में यह दर 16 फीसदी थी.
परिवार नियोजन में लड़का है प्रमुख कारक
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि परिवार बनाने में पहली प्राथमिकता लोगों के लिए लड़का है. इसका सीधा असर परिवार नियोजन के साधनों के उपयोग में देखने को मिला. उन महिलाओं के बीच जिनके पहले से ही बेटे हैं या जिनकी दो संतानों में कम से कम एक लड़का है, उनमें गर्भ निरोधक उपाय अपनाने की दर 52 फीसदी थी, जबकि दो लड़कियों वालेपरिवार, जिनका कोई लड़का नहीं था, उनमें महिलाओं में इसे अपनाने की दर 23 फीसदी रही.
गर्भ निरोधक उपाय नहीं करने की यह है वजह
स्वयंसेवी संस्था ब्रेक थ्रू के सीनियर डायरेक्टर (प्रोग्राम) जोशी जोश ने कहा कि गर्भ निरोधक उपाय नहीं अपनाने के पीछे हमारा पितृ सत्तात्मक सामाजिक ढांचा जिम्मेदार है, जो स्त्री को बच्चा पैदा करने की मशीन के रूप में देखता है. बच्चा पैदा करना है या नहीं, इसके लिए गर्भ निरोधक उपायों की बात की जाती है, लेकिन यह बात कोई नहीं करता कि यह संक्रमण की संभावना को भी कम करता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है.
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