भवनों में तड़ित चालक लगवाये झारखंड सरकार
Updated at : 25 Jul 2018 7:24 AM (IST)
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अस्पताल भवनों में अग्निशमन उपकरण लगाने के मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी गयी रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को रिम्स रांची, एमजीएम जमशेदपुर व पीएमसीएच धनबाद में अग्निशमन […]
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अस्पताल भवनों में अग्निशमन उपकरण लगाने के मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी गयी
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को रिम्स रांची, एमजीएम जमशेदपुर व पीएमसीएच धनबाद में अग्निशमन उपकरणों की स्थापना से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया.
यह भी कहा कि वह इस याचिका के दायरे को बढ़ायेगा. राज्य के रेफरल अस्पतालों की स्थिति को भी इसमें शामिल किया जायेगा. खंडपीठ ने सरकारी भवनों सहित अस्पताल भवनों में तड़ित चालक लगाने का निर्देश दिया. इस बिंदु पर सरकार को विस्तृत शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने माैखिक रूप से कहा कि वज्रपात की घटनाएं अतिसंवेदनशील है. यह एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसे सरकार को देखने की जरूरत है. आंधी-पानी में वज्रपात की कई घटनाएं हुई हैं. इसमें कई लोगों की माैत हो चुकी है.
वज्रपात से जान-माल का नुकसान होना एक गंभीर चिंता की बात है. निरोधात्मक कदम उठाने की जरूरत है. खंडपीठ ने सरकार को निर्देश देने के बाद मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी.
इससे पूर्व सरकार की अोर से अधिवक्ता अतानू बनर्जी ने स्वीकार किया कि सरकारी भवनों में तड़ित चालक नहीं लगाया गया है. उन्होंने कहा कि अग्निशामक उपकरणों की स्थापना के लिए रिम्स रांची व पीएमसीएच धनबाद के लिए निविदा आमंत्रित कर दी गयी है. उल्लेखनीय है कि अस्पताल बिल्डिंग में रिसाव, सीपेज व जलजमाव संबंधी प्रभात खबर में प्रकाशित खबर को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.
उपभोक्ता आयोग व जिला फोरम में पद सृजन का मामला कहां अटका है
रांची : हाइकोर्ट में मंगलवार को राज्य उपभोक्ता आयोग व जिला फोरम में आधारभूत संरचनाअों की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने कहा कि पद सृजित करने के लिए प्रस्ताव अब तक पद वर्ग समिति के पास क्यों नहीं पहुंचा है.
पद सृजन का मामला कहां अटका पड़ा है. शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल किया जाये. उठाये गये सभी बिंदुअों पर अद्यतन जानकारी भी दी जाये. मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सितंबर की तिथि निर्धारित की गयी.
इससे पूर्व सरकार की अोर से बताया गया कि आयोग के सदस्य, जिला फोरम के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया. नियुक्ति के लिए मॉडल रूल बना लिया गया है. कैबिनेट से पास होना है. सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती का सरकार ने दिशा-निर्देश दे दिया है.
अनुपूरक बजट में 62 लाख रुपये का प्रावधान करने की प्रक्रिया शुरू की गयी है. वकीलों के बैठने के लिए जगह व बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में सरकार ने बताया कि जगह की कमी है. प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता आशुतोष आनंद ने सरकार के जवाब का विरोध किया.
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