बारिश में पुलों के ढहने की संभावना अधिक होती है, विशेष सतर्कता बरतें

Updated at : 24 Jul 2018 5:32 AM (IST)
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बारिश में पुलों के ढहने की संभावना अधिक होती है, विशेष सतर्कता बरतें

रांची : ग्रामीण कार्य विभाग ने विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंताअों को बारिश के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है. इसके आलोक में मुख्य अभियंता ने कार्यपालक अभियंताओं से पुलों का भौतिक सत्यापन करने को कहा है, ताकि उनकी वास्तविक स्थिति का पता चल सके. यह देखने को कहा गया है कि पुलों […]

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रांची : ग्रामीण कार्य विभाग ने विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंताअों को बारिश के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है. इसके आलोक में मुख्य अभियंता ने कार्यपालक अभियंताओं से पुलों का भौतिक सत्यापन करने को कहा है, ताकि उनकी वास्तविक स्थिति का पता चल सके.

यह देखने को कहा गया है कि पुलों के कोई पिलर कमजोर या क्षतिग्रस्त तो नहीं हुए हैं. पुलों की मजबूती देख कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है. उनसे कहा गया है कि भारी बारिश होने पर पुलों के ढहने की संभावना अधिक है. ऐसे में विशेष एहतियात बरतें.

कार्यपालक अभियंताओं से कहा गया है कि यह भी देखें कि कहां-कहां पुलों के पिलर के पास से बालू का उठाव अधिक किया गया है. पहले भी कई जगहों पर बालू के अत्यधिक उठाव की वजह से पिलर का निचला हिस्सा दिखने लगा था. इन पुलों की स्थिति पहले ही सुधारने को कहा गया था.

बारिश की वजह से हर साल ग्रामीण पुल-पुलिये क्षतिग्रस्त होते हैं. खास कर मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना या अन्य स्थानीय स्तर पर बनाये गये पुल-पुलिये के पिलर के खिसकने या धंसने के मामले अधिक होते हैं. ऐसे में बरसात भर आवागमन ठप हो जाता है.

रांची : दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत लोहरदगा में काम कर रही एजेंसी एकेएस कंस्ट्रक्शन ने (15 अगस्त तक 106 आंशिक विद्युतीकृत गांवों को पूर्ण विद्युतीकरण करना है) ने अभी तक 12 गांवों को ही विद्युतीकृत किया है.

ऊर्जा सचिव सह झारखंड ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी नितिन मदन कुलकर्णी ने धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए उक्त एजेंसी पर कार्रवाई का निर्देश दिया. वहीं सिमडेगा जिले में कार्यरत एजेंसी पेस पावर, विजय इलेक्ट्रिकल और गोपी कृष्णा को कार्य की धीमी प्रगति के लिए चेतावनी देते हुए समय पर काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है.

ऊर्जा सचिव सोमवार को दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत रांची, गुमला, हजारीबाग एवं रामगढ़ अंचलों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे. इस दौरान ग्रामीण ज्योति योजना, सौभाग्य योजना एवं ग्राम स्वराज योजना-2 की प्रगति की समीक्षा की गयी. कहा गया कि ग्राम स्वराज योजना-2 के तहत झारखंड के 6512 आंशिक विद्युतीकृत गांवों को पूर्ण विद्युतीकृत करना है.

इसमें 1908 गांवों को 23 जुलाई तक पूर्ण विद्युतीकृत किया जा चुका है. समीक्षा के दौरान रांची एवं हजारीबाग क्षेत्रों में चल रही ग्राम स्वराज योजना-2 की कार्य प्रगति की समीक्षा की गयी. इसके अंतर्गत रांची के 585 गांव का कार्य एनसीसी एवं गोपी कृष्ण द्वारा किया जा रहा है.

हजारीबाग के 497 गांव का काम एलएंडटी एवं एवरेस्ट इंफ्रा, गुमला के 336 गांवों का काम विजय इलेक्ट्रिकल एवं टेक्नो पावर लिमिटेड, चतरा के 310 गांवों का काम टेक्नो इलेक्ट्रिकल, सिमडेगा के 205 गांवों का काम पेस पावर, विजय इलेक्ट्रिकल एवं गोपी कृष्ण, रामगढ़ के 187 गांवों का काम टेक्नो पावर प्रा लिमिटेड एवं खूंटी के 134 गांवों काम एनसीसी एवं इंडो नवीन द्वारा किया जा रहा है. इन्हें 15 अगस्त 2018 तक काम पूरा करना है.

रांची : ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने निर्देश दिया है कि सारे प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अपने पदस्थापित प्रखंड मुख्यालय में ही रहें.

मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे प्रखंड मुख्यालय से बाहर न रहें. इसके लिए मंत्री ने सारे उप विकास आयुक्तों को निर्देश दिया है. उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा गया है. मंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि सारे प्रखंड मुख्यालय को साफ-सुथरा रखा जाये. वहां का वातावरण स्वच्छ हो.

यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि अपने काम से प्रखंड कार्यालय आये लोगों को निराश न लौटना पड़ा. उनकी समस्याअों को अच्छी तरह सुनने को कहा गया है. साथ ही उनकी समस्याअों के निबटारे के लिए भी अफसरों को कहा गया है. मंत्री ने स्पष्ट किया है कि लोग अगर काम से आयें, तो उनका काम करें. यह भी कहा है कि अफसरों के संबंध जन प्रतिनिधियों के साथ बेहतर हो. सकारात्मक सोच के साथ कामकाज हो.

बीडीअो नहीं रहते हैं मुख्यालय में : जानकारी के मुताबिक अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे बीडीओ हैं, जो प्रखंड मुख्यालय में नहीं रहते हैं. शाम होते ही वे निकल जाते हैं. इस संबंध में कई बार विभिन्न स्तरों से निर्देश दिये गये हैं. यहां तक कि पूर्व में मुख्य सचिव के स्तर पर कई बार ये निर्देश दिये गये थे. उपायुक्तों से कहा गया था कि वे बीडीअो का प्रखंड मुख्यालय में रहना सुनिश्चित करें. इसके बाद भी कई बीडीअो प्रखंड मुख्यालय में नहीं रहते हैं.

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