राज्य पर 50,845 करोड़ रुपये कर्ज का बोझ
Updated at : 21 Jul 2018 9:01 AM (IST)
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क्राॅस वेरिफिकेशन नहीं करने से टैक्स वसूली में हुआ नुकसान मार्च 2017 तक 155 पीएल खाते में कुल 9488.40 करोड़ रुपये पड़े हुए थेे रांची : 31 मार्च 2017 तक राज्य पर कुल 50,845 करोड़ रुपये कर्ज का बोझ था. वर्ष 2012-13 से 2016-17 के बीच राज्य के प्रारंभिक घाटे में भारी वृद्धि हुई है. […]
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क्राॅस वेरिफिकेशन नहीं करने से टैक्स वसूली में हुआ नुकसान
मार्च 2017 तक 155 पीएल खाते में कुल 9488.40 करोड़ रुपये पड़े हुए थेे
रांची : 31 मार्च 2017 तक राज्य पर कुल 50,845 करोड़ रुपये कर्ज का बोझ था. वर्ष 2012-13 से 2016-17 के बीच राज्य के प्रारंभिक घाटे में भारी वृद्धि हुई है. सरकार ने लेबर सेस के रूप में वसूले गये 312.90 करोड़ रुपये की राशि लेबर वेलफेयर बोर्ड को हस्तांतरित नहीं की है. मार्च 2017 तक 155 पीएल खाते में कुल 9488.40 करोड़ रुपये पड़े हुए थे. पड़ोसी राज्यों के मुकाबले झारखंड में टैक्स वसूली की क्षमता बेहतर है.
क्राॅस वेरिफिकेशन नहीं करने की वजह से सरकार को टैक्स वसूली में नुकसान हुआ है. सीएजी द्वारा उठायी गयी आपत्तियों में से 90 फीसदी को राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है. महालेखाकार सीएम सिंह ने संवाददाता सम्मेलन कर उक्त बातें कहीं.
मैन पॉवर की कमी से टैक्स वसूली प्रभावित
श्री सिंह ने कहा कि शुक्रवार को राज्य विधानसभा में झारखंड का रेवेन्यू रिपोर्ट, स्टेट फाइनांस रिपोर्ट, एप्रोप्रिएशन एकाउंट और फाइनांस एकाउंट पेश किया गया.
रेवेन्यू पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2008-17 के बीच राज्य सरकार 12,985.32 करोड़ रुपये का राजस्व नहीं वसूल सकी है. राजस्व से जुड़े विभागों में मैन पॉवर की कमी की वजह से टैक्स वसूली प्रभावित हुई है. वाणिज्य कर में 51.37 प्रतिशत, खान-भूतत्व में 58.52 प्रतिशत, परिवहन में 66.53 प्रतिशत और उत्पाद में 74 प्रतिशत मैन पॉवर की कमी है.
क्राॅस वेरिफिकेशन नहीं होने के कारण वाणिज्य कर में 475.52 करोड़, खान में 133.42 करोड़ और निबंधन में 60.73 करोड़ रुपये कम की वसूली हुई है. पर्यावरण स्वीकृति के बिना ही किये गये खनन पर 213.32 करोड़ रुपये की राशि बतौर दंड बनती है. लेकिन, सरकार दंड की यह रकम वसूलने में सक्षम नहीं हुई है.
2749.89 करोड़ रुपये बजट के मुकाबले अधिक खर्च हुए
एजी ने कहा कि राज्य में स्टेट मिनरल पॉलिसी के बिना खनन कार्य हो रहा है. खान विभाग ने खनिजों के स्रोत की पहचान किये बिना ही लघु खनिजों पर ठेकेदारों से रॉयल्टी मद में 777.09 करोड़ रुपये ले लिये हैं. स्टेट फाइनांस पर कहा कि राज्य का प्रारंभिक घाटा वर्ष 2012-13 में 1015 करोड़ रुपये था जो 2016-17 में 6020 करोड़ रुपये हो गया. इसी वर्ष 2015-16 के मुकाबले सरकार के राजस्व में 15.08 %की वृद्धि हुई. यह वृद्धि बजट अनुमान से काफी कम है. इस अवधि में राजस्व खर्च में 23 % की बढ़ोतरी हुई. पूंजीगत खर्च में 33 %की वृद्धि हुई. वित्तीय वर्ष 2008-17 के बीच राज्य सरकार ने लेबर सेस मद में 312.90 करोड़ की वसूली की है. इस राशि को श्रमिक कल्याण बोर्ड को हस्तांतरित करना था़ लेकिन, सरकार ने यह राशि बोर्ड को नहीं दी है. वित्तीय वर्ष 2001-17 के बीच 2749.89 करोड़ रुपये बजट के मुकाबले अधिक खर्च हुए हैं.
लेकिन, सरकार ने इसे नियमित नहीं किया है. सरकार के विभिन्न विभागों को केंद्र से मिले 29,449.52 करोड़ रुपये सहायता अनुदान के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र सरकार ने नहीं दिया है. मार्च 2017 तक अग्रिम रूप में किये गये 5651 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब नहीं दिया गया है.
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