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सही अनुसंधान से विधायक को हुई उम्रकैद की सजा, गलत जांच से मासूमों को जाना पड़ा जेल

Updated at : 10 Jul 2018 9:02 AM (IST)
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सही अनुसंधान से विधायक को हुई उम्रकैद की सजा, गलत जांच से मासूमों को जाना पड़ा जेल

पुलिस जांच पर सवाल : अनुसंधान में गड़बड़ी को दूर नहीं कर पा रहा है पुलिस महकमा रांची : किसी केस में अनुसंधान कितना अहम रोल निभाता है, इसकी बानगी दो चर्चित केस के परिणाम के तौर पर देखा जा सकता है. पहला केस सिमडेगा जिले से जुड़ा है, जिसमें विधायक एनोस एक्का को उम्र […]

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पुलिस जांच पर सवाल : अनुसंधान में गड़बड़ी को दूर नहीं कर पा रहा है पुलिस महकमा
रांची : किसी केस में अनुसंधान कितना अहम रोल निभाता है, इसकी बानगी दो चर्चित केस के परिणाम के तौर पर देखा जा सकता है. पहला केस सिमडेगा जिले से जुड़ा है, जिसमें विधायक एनोस एक्का को उम्र कैद की सजा सुनायी गयी. वहीं दूसरा केस रांची जिले के सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो की हत्याकांड से जुड़ा है.
इसमें दो मासूमों को जेल जाना पड़ा, लेकिन इनके खिलाफ रांची पुलिस जरूरी साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं कर सकी और दोनों को कोर्ट ने बरी कर दिया़ पूर्व में भी पुलिस के गलत अनुसंधान का खामियाजा कई केस में निर्दोष लोगों को भोगना पड़ा है. लेकिन किसी भी मामले में दोषी पुलिस अफसरों पर सख्त कार्रवाई की बात सामने नहीं आयी़
एडीजी अनिल पालटा के डायरेक्शन पर हुई जांच, जुटाये साक्ष्य, तो विधायक को हुई सजा
सिमडेगा जिले में 2015 में पारा शिक्षक मनोज कुमार हत्याकांड की जांच में एडीजी अनिल पालटा ने अहम भूमिका निभायी. सीबीआइ में अहम मामलों का खुलासा करनेवाले इस अफसर ने इस केस में अनुसंधानकर्ता बृज कुमार को महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच कर तथ्य जुटाने के साथ ही तकनीकी पहलुओं पर जांच कैसे की जाये और साक्ष्य कैसे एकत्र हो, इसको लेकर कई टिप्स दिये. मसलन, विधायक एनोस एक्का और उग्रवादियों के बीच किस मोबाइल से बातचीत हुई, उसका सीडीआर कैसे निकाला जाये. साउंड का मिलान कैसे हो.
टावर लोकेशन से घटना के दिन विधायक के मूवमेंट और कुछ एेसे नंबर जिनका इस्तेमाल विधायक और उग्रवादी गुप्त बातचीत के लिए करते थे, लेकिन वह नंबर इनके नाम से नहीं था, इसका पता कैसे किया जाये. घटना में विधायक आैर उग्रवादियों के बीच संबंध कैसे स्थापित हो. सिमडेगा पुलिस ने हर उस बिंदु की जांच की और परिणामस्वरूप विधायक को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनायी
डीजीपी तक ने की मॉनीटरिंग, फिर भी पुलिस ने गलत साक्ष्य पेश किया, मासूम गये जेल, असली गुनहगार का अब तक पता नहीं
सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो हत्याकांड मामले में दोनों नाबालिग आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है. इस मामले में अभियोजन सीसीटीवी फुटेज अौर अन्य साक्ष्यों को प्रस्तुत करने में असफल रहा.
स्कूल की पूर्व शिक्षिका अौर मामले की आरोपी नाजिया हुसैन जिस रूम में (कमरा नंबरसात) रहती थी वहां पाये गये खून के छीटें विनय के खून से मैच नहीं पाया गया. जांच में पता चला कि खून किसी महिला का है.
अभियोजन पक्ष ने एक माह पूर्व ही स्कूल से जब्त ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की रिपोर्ट एफएसएल कोलकाता से लाने के लिए समय मांगा था. एक माह बीत गया, पर एफएसएल रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की जा सकी. फैसले के समय विनय के पिता मनबहाल महतो, मां कशिला देवी, आरोपी शिक्षिका नाजिया हुसैन अौर दोनों नाबालिग आरोपी (नाजिया के पुत्र अौर पुत्री) कोर्ट में उपस्थित थे. कोर्ट के निर्णय के बाद इस चर्चित मामले में सवाल अपनी जगह पर अब भी कायम है कि मासूम विनय का हत्यारा कौन है?
विनय के पिता मनबहाल महतो ने कहा कि आखिर किसी ने तो मेरे बेटे की हत्या की है. वह कौन है? उन्होंने कहा कि पुलिस ने मनगढ़ंत कहानी गढ़ी. मेरे बेटे का प्रेम प्रसंग नाजिया की बेटी के साथ बताया. मैं शुरू से कह रहा था कि यह गलत है.
बारह साल के बच्चे का प्रेम प्रसंग नहीं हो सकता है. अभी भी मुझे न्याय की तलाश है. इस मामले को लेकर डीजीपी डीके पांडेय ने भी मौके वारदात का मुआयना किया था. वे भी लगातार रांची पुलिस को दिशा-निर्देश दे रहे थे़ लेकिन अब तक असली गुनाहगार पुलिस की पकड़ में नहीं आया है.
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