यूपी के गमछा से मिलेगा झारखंड का मलमल, तो होगा करिश्मा

रांची/लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मोटे सूत का उत्पादन अधिक होता है, जबकि झारखंड महीन सूत के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. दोनों को मिला दिया जाये, तो बेहतरीन खेस, चादर, दरी, लुंगी, गमछा और साड़ी सहित अन्य वस्त्र तैयार होंगे. इससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन के साथ ही आम आदमी को उच्च श्रेणी […]
रांची/लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मोटे सूत का उत्पादन अधिक होता है, जबकि झारखंड महीन सूत के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. दोनों को मिला दिया जाये, तो बेहतरीन खेस, चादर, दरी, लुंगी, गमछा और साड़ी सहित अन्य वस्त्र तैयार होंगे. इससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन के साथ ही आम आदमी को उच्च श्रेणी के उत्पाद सुलभ हो सकेंगे.
उत्तर प्रदेश के खादी व ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी ने कहा है कि खादी को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश और झारखंड मिलकर काम करेंगे. पचौरी ने कहा कि दोनों प्रदेश में स्थापित खादी एवं ग्रामोद्योग इकाइयों के उत्कृष्ट उत्पाद एवं तकनीकी साझा होगी. मकसद होगा, अधिक से अधिक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना. हाल ही में दोनों राज्यों के खादी के विकास को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई. बैठक में झारखंड के प्रतिनिधि के रूप में झारखंड राज्य खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ ने शिरकत की.
रोजगार बढ़ेगा : संजय सेठ
झारखंड राज्य खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ ने कहा कि झारखंड के छोटे से जिले में कोकून से धागा बनाया जाता है, जिसे लूप में भेजकर वस्त्र का निर्माण किया जाता है. रेमंड्स जैसी बड़ी कंपनी तसर के धागे से बने वस्त्र बहुतायत में खरीदती है. इससे खादी की मांग बढ़ी है और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्तायुक्त मसलिन उत्पादन के लिए उत्तर प्रदेश की संस्थाओं में काम कर रहे कामगारों को प्रशिक्षण हासिल करने में झारखंड बोर्ड पूरा सहयोग करेगा.
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