रांची: नीति आयोग की बैठक, सरकार ने आयोग के समक्ष रखी मांग जंगल-झाड़ को वन भूमि नहीं माना जाये
Updated at : 05 Jul 2018 6:39 AM (IST)
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सारंडा खनन रिपोर्ट बदलने की मांग रांची: राज्य सरकार ने नीति आयोग की बैठक में सारंडा खनन रिपोर्ट बदलने और जंगल-झाड़ को वन भूमि नहीं मानने की मांग की. आयोग के साथ हुई बैठक में राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे को उठाया गया. सारंडा खनन रिपोर्ट के मामले में सरकार की ओर से […]
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सारंडा खनन रिपोर्ट बदलने की मांग
रांची: राज्य सरकार ने नीति आयोग की बैठक में सारंडा खनन रिपोर्ट बदलने और जंगल-झाड़ को वन भूमि नहीं मानने की मांग की. आयोग के साथ हुई बैठक में राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे को उठाया गया.
सारंडा खनन रिपोर्ट के मामले में सरकार की ओर से यह कहा गया कि रिपोर्ट में सारंडा क्षेत्र में खनन के लिए निर्धारित किये गये फॉर्मूले को मानने से राज्य के उद्योग-धंधों पर संकट गहरा जायेगा. राज्य के लिए सालाना जरूरी लौह अयस्क नहीं मिल सकेगा.
राज्य का एक बड़ा हिस्सा वन भूमि के साथ ही जंगल-झाड़ के रूप में दर्ज है. जंगल-झाड़ के रूप में दर्ज जमीन पर भी विकास योजनाओं के लिए वही कानून लागू होता है, जो वन भूमि पर. इससे राज्य की विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं.
इसलिए जंगल-झाड़ को विकास योजनाओं के लिए सामान्य जमीन के रूप में मान्यता दी जाये. केंद्र ने सारंडा क्षेत्र में आयरन ओर खनन की सीमा तय करने से संबंधित इंडियन काउंसिल ऑफ फाॅरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है.
इसके लिए राज्य सरकार से सहमति भी नहीं ली. राज्य को अपने स्टील उद्योगों के लिए सालाना 131 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत है. केंद्र ने सारंडा को तीन क्षेत्रों में बांटा है. एलिफैंट कॉरिडोर और डेंस फॉरेस्ट में खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है. बाकी बचे क्षेत्र में भी खनन करने पर पाबंदी है. साथ ही सालाना अधिकतम 90 मिलियन टन तक के खनन की ही अनुमति देने की बात कही गयी है.
केंद्र सरकार ने एमबी शाह कमीशन की अनुशंसा के आलोक में आइसीएफआरइ से सारंडा का अध्ययन कराया. रिपोर्ट में राज्य के वर्तमान और प्रस्तावित स्टील उद्योगों के लिए आयरन ओर का आकलन किया गया है.
15.054 मिलियन टन की वर्तमान उत्पादन क्षमता के हिसाब से राज्य के स्टील उद्योगों के लिए सालाना 24.058 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत बतायी गयी है. इन उद्योगों को उत्पादन क्षमता बढ़ाना है. इससे 35 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत होगी. प्रस्तावित 60 मिलियन टन उत्पादन क्षमता वाले उद्योगों के स्थापित होने पर अतिरिक्त 96.2 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत होगी. इस तरह राज्य को सालाना कुल 131 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत होगी.
सारंडा में खनन के लिए निर्धारित फॉर्मूला मानने से उद्योग-धंधों पर संकट गहरा जायेगा
क्या है सारंडा खनन रिपोर्ट में
केंद्र सरकार ने राज्य की सहमति के बिना ही आइसीएफआरइ की रिपोर्ट स्वीकार्य की
820 वर्ग किमी (82000 हेक्टेयर) है सारंडा का क्षेत्रफल
8774.78 हेक्टेयर पर मिलेगी खनन की अनुमति
24.058 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत स्टील उद्योगों की वर्तमान क्षमता के लिए
131 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत होगी सालाना स्टील उद्योगों को
90 मिलियन टन खनन ही हो सकेगा आधारभूत संरचना को पूरी तरह विकसित करने पर
नीति आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा
केंद्र व राज्य मिलकर कर रहे हैं न्यू इंडिया का निर्माण
रांची : प्रोजेक्ट भवन में बुधवार को नीति आयोग के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उच्च स्तरीय बैठक की. इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म के तहत केंद्र और सभी राज्य एक टीम इंडिया के रूप में न्यू इंडिया का निर्माण कर रहे हैं.
इसी क्रम में नीति आयोग की यह बैठक महत्वपूर्ण है. श्री दास ने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता के कारण झारखंड अन्य राज्यों की तुलना में विकास की दौड़ में काफी पीछे छूट गया था. दिसंबर 2014 में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने के बाद राज्य में विकास को गति मिली है.
नीतियां बनीं, उनका क्रियान्वयन हुआ. योजनाएं बनीं, धरातल पर उतर रही हैं, उनकी मॉनिटरिंग हो रही है. इनके नतीजे देखने को मिल रहा है. विशेष परिस्थिति में झारखंड को कृषि, सिंचाई और रेल-सड़क आदि के क्षेत्र में अतिरिक्त सहायता की जरूरत है. केंद्र से समन्वय बनाने में नीति आयोग हमारी मदद कर सकता है.
रोजगारपरक छोटे एवं कुटीर उद्योगों को दिया जा रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगारपरक छोटे एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है. बड़े-बड़े उद्योगों को मिलनेवाली सब्सिडी और आसान ऋण की व्यवस्था के तर्ज पर लघु, कुटीर और ग्रामोद्योग को सहायता मिलनी चाहिए.
इससे गांव-गांव में उद्योगों का जाल फैलेगा और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा. श्री दास ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने से पहले वे राज्य के वित्त मंत्री रह चुके हैं. उस दौर में योजना आयोग होता था. उस समय राज्यों को मदद के लिए दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ती थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग का गठन कर को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म की तरफ देश को ले जाने का काम किया है.
अब नीति आयोग की टीम राज्यों का दौरा कर उनकी जरूरतें और उपलब्धियां जान रही हैं. केंद्र और राज्य सरकार मिल कर टीम इंडिया के रूप में काम कर रहे हैं. मीठी क्रांति के लिए झारखंड उपयुक्त स्थान है. राज्य सरकार को मधुमक्खी पालन के बॉक्स मिल जाये, तो बड़ी संख्या में किसानों को इससे जोड़ा जा सकता है.
झारखंड की उपलब्धियों पर देश को गर्व : डॉ राजीव
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने झारखंड में हो रहे कार्यों की सराहना की. उन्होंने कहा कि झारखंड की उपलब्धियों पर पूरे देश को गर्व है.
बहुत कम समय में झारखंड ने उपलब्धियां हासिल की हैं. स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से झारखंड ने बेहतर प्रदर्शन किया है. यहां कृषि सिंगल विंडो सिस्टम और डिस्ट्रिक माइनिंग फंड का उपयोग पाइपलाइन जलापूर्ति में किया जाना देश के लिए रोल मॉडल है. राज्य के टेक्सटाइल पाॅलिसी देश की सबसे अच्छी पाॅलिसी में से एक है.
महिलाओं की कृषि, स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमी बोर्ड, आदि में बेहतर भूमिका भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय है. माइनिंग के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि बड़ी माइनिंग कंपनियों के साथ मिल कर काम करें.
हजारीबाग जिले का दिया गया प्रजेंटेशन
बैठक में कृषि व सिंचाई, स्वास्थ्य व पोषण, शिक्षा, पेयजल व स्वच्छता, कल्याण, ऊर्जा के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की गयी. राज्य के 19 आकांक्षी जिलों में शामिल हजारीबाग जिले में किये जा रहे कार्यों की एक विशेष प्रस्तुति के माध्यम से जानकारी दी गयी.
इस दौरान नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद, मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, विकास आयुक्त डीके तिवारी, नीति आयोग के अपर सचिव यदुवेंद्र माथुर, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव व सचिव, पीसीसीएफ संजय कुमार, हजारीबाग के उपायुक्त समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे
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