कांग्रेस विवाद : डॉ अजय के पत्र का सुबोधकांत ने दिया जवाब, कहा, आप अकेले संगठन चलाना चाहते हैं, कमजोर हुई पार्टी

Updated at : 03 Jul 2018 6:27 AM (IST)
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कांग्रेस विवाद : डॉ अजय के पत्र का सुबोधकांत ने दिया जवाब, कहा, आप अकेले संगठन चलाना चाहते हैं, कमजोर हुई पार्टी

रांची : कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के पत्र का जवाब दिया है़ डॉ अजय ने सुबोधकांत को पत्र भेज कर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाया था़ प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि था कि कुछ लोगाें की भाजपा के साथ मिलीभगत है और संगठन को कमजोर करना चाहते है़ं प्रदेश […]

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रांची : कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के पत्र का जवाब दिया है़ डॉ अजय ने सुबोधकांत को पत्र भेज कर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाया था़ प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि था कि कुछ लोगाें की भाजपा के साथ मिलीभगत है और संगठन को कमजोर करना चाहते है़ं प्रदेश अध्यक्ष ने ऐसी कई घटनाओं का जिक्र करते हुए श्री सहाय से कहा था कि यह अनुशासन का मामला है़
इधर, श्री सहाय ने उस पत्र का जवाब देते हुए कहा है कि वह सहमत हैं कि संगठन कमजोर हुआ है़ उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को लिखा है कि संगठन चलाने की जिम्मेदारी आपकी है, जिसे आप अकेले ही चलाना चाहते है़ं यह आपकी सोच है़ श्री सहाय ने लिखा है कि आप पुलिस पदाधिकारी रहे हैं. कॉरपोरेट हाउस का भी आपके पास व्यापक अनुभव है.
साथ ही डेढ़ वर्ष तक सांसद होने का भी अनुभव है़ मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि यह चिट्ठी लिखने के पीछे क्या उद्देश्य है़ पत्र की शुरुआत में उन्होंने लिखा है कि मुझे दिल्ली पहुंचने पर 27 जून को पत्र मिला़ 20 तारीख को ही अभियान समिति की बैठक को लेकर आपसे लगातार बात होती रही थी़ आपने कहा था कि मैं मीटिंग में उपस्थित होने का पूरा प्रयास करूंगा़
बैठक में राजनीतिक मर्यादा के तहत बात रखी गयी थी : श्री सहाय ने अभियान समिति की बैठक में किसी के द्वारा नेतृत्व के खिलाफ बात कहे जाने से इनकार किया है़ बैठक में 11 सदस्य थे़ एजेंडा के साथ-साथ संगठन पर बात हुई थी़ राजनीतिक मर्यादा के तहत ही लोगों ने अपनी बात रखी थी़
मुझे कई प्रदेश अध्यक्षों के साथ काम करने का अनुभव है
श्री सहाय ने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस के संविधान और कार्यकलाप की आपने सलाह दी है़ 11 जून को समिति की बैठक के लिए मेरे कार्यालय से चिट्ठी सर्कुलेट करने के लिए केसरी जी को दी गयी़
दो दिन बाद मेरे कार्यालय को बताया गया कि इसके लिए राजीव रंजन प्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष से सहमति लेनी होगी़ तब ही चिट्ठी सर्कुलेट होगी़ अभियान समिति की पहली बैठक की चिट्ठी बिना मेरे हस्ताक्षर के ह्वाट्सएप पर जारी कर दी गयी. मैंने इस पर पत्र भेज कर आपसे कहा था कि इस प्रकार की घटना के पीछे कौन है.
जांच कर सामने लाये़ं क्या अभियान समिति की बैठक पार्टी विरोधी है़ सहायक संगठन आपके आदेश के बाद ही काम करेंगे, ऐसा नहीं है़ कार्यालय से कोई पत्र बिना आपके आदेश के जारी नहीं हो सकता, मीटिंग नहीं हो सकती है. यह जानकारी पहली बार आपकी चिट्ठी से मिली है़ मुझे कई प्रदेश अध्यक्षों के साथ काम करने का अनुभव है़
मेरे राजनीति जीवन में मुझे पहला पत्र मिला है : श्री सहाय ने लिखा है कि मेरे अब तक के राजनीतिक जीवन में मुझे यह पहला पत्र मिला है़ संगठन में जब संवादहीनता हो जाती है, तब लोग चिट्ठी लिखते है़ं राजनीति मेें संवाद से ही समस्याओं का समाधान होता है़
कौन लोग भाजपा के साथ हैं, उन्हें चिह्नित कीजिए : पत्र में श्री सहाय ने लिखा है कि जब आप अध्यक्ष बन रहे थे, तो राहुल गांधी ने पूछा था कि आप एक-दूसरे के साथ हैं, तो मैंने आगे बढ़ कर कहा था कि मैं हू़ं अध्यक्ष बनने के बाद आपको रांची लेकर मैं ही गया था़ भाजपा के साथ मिल कर कौन लोग कार्य कर रहे हैं, उन्हें चिह्नित कीजिए़
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