छावनी में तब्दील हो गया है घाघरा, खटंगा व घाघीडीह

Updated at : 28 Jun 2018 4:52 AM (IST)
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छावनी में तब्दील हो गया है घाघरा, खटंगा व घाघीडीह

रांची : खूंटी मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूरी पर स्थित घाघरा गांव मंगलवार शाम से ही पुलिस की छावनी में तब्दील हो गया था़ बुधवार को पुलिस की तादाद और बढ़ गयी़ हर तरफ पुलिस ही पुलिस नजर आ रही थी़ खूंटी के पुलिस बल के अतिरिक्त रांची, चाईबासा, सिमडेगा, लोहरदगा, सरायकेला, जमशेदपुर, चाईबासा […]

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रांची : खूंटी मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूरी पर स्थित घाघरा गांव मंगलवार शाम से ही पुलिस की छावनी में तब्दील हो गया था़ बुधवार को पुलिस की तादाद और बढ़ गयी़ हर तरफ पुलिस ही पुलिस नजर आ रही थी़ खूंटी के पुलिस बल के अतिरिक्त रांची, चाईबासा, सिमडेगा, लोहरदगा, सरायकेला, जमशेदपुर, चाईबासा के साथ-साथ रैफ व सैप के जवानों को भी लगाया गया था़ करीब 70-75 घरवाले घाघरा गांव में केवल महिलाएं ही थी़ं पुरुष फरार थे़ जो बचे गये थे उनसे पुलिस अगवा जवानों के संबंध में पूछताछ कर रही थी़ कई घरों में ताला लगा हुआ था. वहां महिला और पुरुष कोई नहीं है. पुलिस के कब्जे वाले ग्रामीणों से पुलिस अपहृत जवानों का सुराग जानना चाह रही थी. इक्का-दुक्का युवक गांव के किनारे नजर आ रहे थे.

झड़प में टूट-फूट गये वाहन
पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प में पत्थलगड़ी समर्थकों के कई वाहनों को नुकसान हुआ है. झड़प के बाद गांव वाले चार चक्का और दो चक्का के सैकड़ों वाहन छोड़ कर भाग गये. झड़प में उनके वाहन नष्ट हो गये. गांव के अंदर भी कई घरों के पास वाहन खड़े किये गये थे, वह भी टूट-फूट गये. बाद में पुलिस की घोषणा के बाद लोग अपने-अपने वाहन शाम में ले जाने लगे़
दोपहर में मिला जवानों को भोजन
मंगलवार की रात से घाघरा गांव में तैनात जवानों को बुधवार को दोपहर में भोजन दिया गया. अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग-अलग भोजन आया था. कुछ संस्थाओं ने जवानों को चूड़ा और गुड़ भी दिया.
ऑपरेशन खूंटी
कुरूंगा और कोचांग में अपहृत पुलिसकर्मियों के रखे जाने की होती रही चर्चा, लेकिन पुलिस को नहीं मिला ठोस सुराग
अभी जारी है सर्च ऑपरेशन
रांची : सांसद कड़िया मुंडा के आवास की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों को बरामद करने के लिए जहां एक ओर पुलिस विभिन्न गांवों में अभियान चलाती रही. ग्रामीणों से जानकारी एकत्र करती रही. वहीं दूसरी ओर बुधवार को दिन भर ग्रामीणों के बीच इस बात की चर्चा होती रही कि अगवा किये गये पुलिसकर्मी को या तो कुरूंगा गांव में बंधक बना कर रखा गया होगा या कोचांग में. क्योंकि दोनों गांव में पत्थलगड़ी के समर्थकों की संख्या काफी है. इस बात की जानकारी पुलिस अधिकारियों को मिली. पुलिस ने अपने स्तर से इस बात के बारे पता लगाने का भी प्रयास किया. लेकिन पुलिस अधिकारियों को सफलता नहीं मिली.
इधर, घाघरा गांव से जब पुलिस अधिकारी और जवान बुधवार की शाम निकलने लगे, तब पुलिस ने मुंडारी भाषा में एनाउंसमेंट किया कि जाे ग्रामीण ग्राम सभा की बैठक में शामिल होने घाघरा पहुंचे थे. जिन्होंने अपनी बाइक और बड़े वाहनों को यहां छोड़ दिया है. वे अपने वाहन ले जा सकते हैं. इससे पहले बड़े वाहनाें की पुलिस ने मोबाइल से फोटो भी ली. पुलिस जब गांव से घोषणा के बाद निकल गयी. तब कई लोग पहुंचे और अपने क्षतिग्रस्त वाहन लेकर वहां से निकले लगे. वाहन लेने पहुंचे एक युवक ने बताया कि वह कोचांग गांव से वाहन लेकर आया था. बैठक में आने के बाद उसे ग्राम सभा की बैठक में बैठा दिया गया.
इसी बीच बुधवार की सुबह पुलिस ने जब अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया. तब वह अपने वाहन को छोड़ कर भाग निकला और पुलिस ने उसकी वाहन क्षतिग्रस्त कर दी. उसने बताया कि वह कोचांग से इसलिए आया कि वह ज्यादा दूर भाग कर नहीं गया था. क्योंकि उसे घाघरा गांव के रास्ते के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी. जबकि घाघरा के लोग जो ग्राम सभा की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे. उन्हें गांव के रास्ते के बाहर पूरी जानकारी थी. इसलिए वे भाग कर पुलिस से बचने के लिए दूर निकल गये.
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