रांची : जनजातीय इतिहास व भाषा आम लोगों को समझायें : लुईस मरांडी

Updated at : 27 Jun 2018 5:42 AM (IST)
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रांची : जनजातीय इतिहास व भाषा आम लोगों को समझायें : लुईस मरांडी

जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा साहित्य में राष्ट्र और राष्ट्रप्रेम पर संगोष्ठी रांची : समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने कहा है कि जनजातीय इतिहास और भाषा का साहित्य आम लोगों को समझाने की कोशिश होनी चाहिए. आजादी की लड़ाई में भगवान बिरसा मुंडा की भूमिका के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन सिदो-कान्हो, चांद […]

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जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा साहित्य में राष्ट्र और राष्ट्रप्रेम पर संगोष्ठी
रांची : समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने कहा है कि जनजातीय इतिहास और भाषा का साहित्य आम लोगों को समझाने की कोशिश होनी चाहिए.
आजादी की लड़ाई में भगवान बिरसा मुंडा की भूमिका के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन सिदो-कान्हो, चांद भैरव जैसे वीरों के बारे में कम ही लोगों को जानकारी है. सबको इतिहास बताने के लिए सकारात्मक पहल होनी चाहिए. हमें बच्चों में भाषा के प्रति झुकाव पैदा करना होगा, तभी बच्चे अपने गौरवशाली इतिहास को जान सकेंगे.
उनमें राष्ट्रप्रेम जगेगा. श्रीमती मरांडी मंगलवार को झारखंड के जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा साहित्य में राष्ट्र और राष्ट्रप्रेम पर केंद्रित दो दिवसीय संगोष्ठी के उदघाटन पर बोल रही थीं. इसका आयोजन कला-संस्कृति विभाग ने रांची विवि के जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा विभाग के सहयोग से किया है.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि हजारों साल पहले ऋग्वेद ने राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्य और प्रेम भाव को बताया.
उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त लोग कहते हैं कि भारत कभी एक राष्ट्र रहा ही नहीं. अंग्रेजों ने भारत को राष्ट्र बनाया. रांची विवि के वीसी डॉ रमेश पांडेय ने कहा कि इतिहास पाश्चात्य नजरिये से लिखा गया है, उसे सुधारने की जरूरत है.
सुधार के बाद ही हम अपनी परंपरा और संस्कृति को जान सकेंगे. टीआरएल में जल्द ही एमए की पढ़ाई हो सके, इसका प्रयास हो रहा है. इसके पूर्व स्वागत भाषण विभागीय सचिव मनीष रंजन ने और विषय प्रवेश टीआरएल के विभागाध्यक्ष डॉ टीएन साहू ने कराया. संगोष्ठी में लोक कलाकार पद्मश्री मुकुंद नायक, लोकमंथन के सदानंद सप्रे, खेल निदेशक रणेंद्र कुमार, कला-संस्कृति निदेशक अशोक कुमार, सहायक निदेशक विजय पासवान, डॉ महादेव टोप्पो समेत कई लेखक और शोधार्थी मौजूद थे.
क्षेत्रीय भाषा की नौ पुस्तकों का हुआ लोकार्पण
संगोष्ठी में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की नौ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया. कमल लोचन कोड़ा की पुस्तक लड़का कोल एक परिचय (हो), प्रो महेश भगत की कुड़ुख भाषा साहित्य का उद्भव और विकास (कुड़ुख), डॉ मंजय प्रमाणिक का उपन्यास किना चंग उठलेइक (कुरमाली), अनंत महतो की पंच परगनिया पथ संकलन, निरंजन कुमार की नीरिह जाति विज्ञान (खोरठा), कुशलय मुंडु की होड़ो होन कोआ इतिहास ओड़ो किल्ली को (मुंडारी), मेरी एच सोरेंग की बुकथिया सिमकोम (खड़िया कविता संग्रह) और मासिंग मांझी का उपन्यास साकम आेरेज (संथाली) का लोकार्पण किया गया.
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