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भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल : झामुमो का सरकार को अल्टीमेटम, 24 घंटे में स्थिति स्पष्ट करे, 18 काे सेंगेल का झारखंड बंद

Updated at : 17 Jun 2018 6:11 AM (IST)
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भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल : झामुमो का सरकार को अल्टीमेटम, 24 घंटे में स्थिति स्पष्ट करे, 18 काे सेंगेल का झारखंड बंद

रांची : भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल-2017 पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद झारखंड की राजनीति में उबाल है. विपक्ष ने संशोधन बिल को खारिज किया है. राज्य सरकार को घेरा है. आदिवासी सेंगेल अभियान ने इस संशोधन के खिलाफ 18 जून को झारखंड बंद का आह्वान किया है. बंद को सफल बनाने के लिए दूसरी […]

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रांची : भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल-2017 पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद झारखंड की राजनीति में उबाल है. विपक्ष ने संशोधन बिल को खारिज किया है. राज्य सरकार को घेरा है. आदिवासी सेंगेल अभियान ने इस संशोधन के खिलाफ 18 जून को झारखंड बंद का आह्वान किया है. बंद को सफल बनाने के लिए दूसरी विपक्षी पार्टियों से समर्थन का आह्वान किया है. झामुमो ने सरकार को 24 घंटे के अंदर संशोधन बिल पर राष्ट्रपति की मंजूरी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है. नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने 18 जून को सभी विपक्षी पार्टियों और सामाजिक संगठन की बैठक बुलायी है. बैठक में आगे आंदोलन की रणनीति तैयार की जायेगी.

हेमंत सोरेन ने बैठक में सत्ता पक्ष के विधायकों व नेताओं को भी आमंत्रित किया है. कांग्रेस, झाविमो, राजद सहित वामदलों ने भी संशोधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सरकार के सहयोगी आजसू और जदयू ने भी संशोधन को खारिज करते हुए इस पर सवाल उठाये हैं. आजसू ने इस मुद्दे पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुला कर पुनर्समीक्षा की बात कही है. पार्टी ने कहा है कि संशोधन झारखंड के हित में नहीं है.
प्रतिपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पर राष्ट्रपति की मंजूरी संबंधी खबरों पर राज्य सरकार 24 घंटे के अंदर अपनी स्थिति स्पष्ट करे. ऊहापोह की स्थिति है. संशोधन बिल को वापस लेने के लिए झामुमो ने विपक्ष के साथ आंदोलन में भूमिका निभायी. इसे लेकर राष्ट्रपति से भी मिला. अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा : यदि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पर मंजूरी की बात सही है, तो राज्य सरकार बिना शर्त कानून को वापस ले. जिस तरह राज्यव्यापी आंदोलन के बाद सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव वापस लिया गया, वैसा ही आंदोलन किया जायेगा.
हेमंत सोरेन ने कहा : राज्य सरकार उद्योगपतियों व भू माफियाअों के लिए जमीन लूटने की व्यवस्था कर रही है. इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है. यदि सरकार ने संशोधन विधेयक वापस नहीं लिया, तो मेरे आवास पर 18 जून को दिन के 12.30 बजे सभी विपक्षी दलों व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक होगी. भाजपा, आजसू के विधायकों से भी अपील है कि वे राज्यहित में एकजुट हों और बैठक में शामिल होकर गरीब-किसानों को उजाड़ कर उद्योगपतियों को बसाने व भू-माफियाअों को संरक्षण देने की सरकार की कोशिशों को नाकाम करेें. संशोधन राज्य की भावना के विपरीत है. यह किसान, मजदूर, आदिवासियों के हित में नहीं है. यह विषय राज्य की अस्मिता व पहचान से जुड़ा है.
जमीन लूटने के लिए बेताब है सरकार, फिर की साजिश :झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि यह सरकार झारखंडियों की जमीन लुटने के लिए बेताब है. सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन करने की पहले कोशिश की गयी. भारी जन दबाव और राजनीतिक दलों के संघर्ष के कारण सरकार सफल नहीं हो पायी. अब एक बार फिर से साजिश की गयी है. भूमि-अधिग्रहण बिल में संशोधन किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं करेंगे. इसका िवरोध करेंगे. दूसरे दलों से बात कर इस पर आंदोलन की रणनीति बनेगी़
कॉरपोरेट को लाभ पहुंचाने के लिए किया है संशोधन : कांग्रेस नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि पूंजीपतियों व काॅरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन कराया है. सरकार ने पेसा एक्ट और पंचायती राज व्यवस्था के विरुद्ध काम किया है. गरीब किसानों की जमीन औने-पौने दाम में जबरन अधिग्रहित कर काॅरपोरेट घरानों को सस्ती दर पर देने लिए संशोधन पास कराया है.
विपक्ष विकास विरोधी :भाजपा प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर ने कहा है कि विपक्ष विकास विरोधी है. भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के मामले में विपक्ष जनता को बरगला रहा है. यह संशोधन कॉरपोरेट नहीं, बल्कि स्कूल-अस्पताल जैसी सरकारी योजनाओं पर लागू होगा. राज्य सरकार ने संसद द्वारा 2013 में पारित भूमि अधिग्रहण कानून के मुआवजा और पुनर्वास के मूल प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया है. नये प्रस्ताव से ग्राम सभा की सलाह लेते हुए एक समय सीमा में सरकारी योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण और चार गुना मुआवजा प्रदान करने का कार्य संभव हो पायेगा. इससे प्रभावितों को न्याय मिल पायेगा. विकास की गति तेज होगी और उस क्षेत्र के निवासियों का आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान होगा.
जदयू : कृषि योग्य भूमि घटेगी, दूरगामी प्रभाव पड़ेगा :जदयू के प्रदेश प्रवक्ता जफर कमाल ने कहा : इस संशोधन के बाद कृषि योग्य भूमि में कमी आयेगी. पहले ही विस्थापन हुआ है़ लोगों को पुनर्वास नहीं किया गया है़ सरकार को इस कानून पर विचार करना चाहिए़ बहुफसली जमीन का हस्तांतरण नहीं होना चाहिए.
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