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न्यायालय के काम में हस्तक्षेप, पाकुड़ एसपी सहित तीन को नोटिस, जानें पूरा मामला

Updated at : 06 Jun 2018 6:28 AM (IST)
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न्यायालय के काम में हस्तक्षेप, पाकुड़ एसपी सहित तीन को नोटिस, जानें पूरा मामला

रांची : पाकुड़ के एडिशन सेशन जज ने न्यायालय के काम में हस्तक्षेप के कारण पाकुड़ के एसपी शैलेंद्र वर्णवाल, एडिशनल पीपी शिवेंद्र सिंह और केस के अनुसंधानक राजेंद्र कुमार मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. अदालत ने यह कार्रवाई पुलिस की ओर से छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट के तहत जेल में बंद […]

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रांची : पाकुड़ के एडिशन सेशन जज ने न्यायालय के काम में हस्तक्षेप के कारण पाकुड़ के एसपी शैलेंद्र वर्णवाल, एडिशनल पीपी शिवेंद्र सिंह और केस के अनुसंधानक राजेंद्र कुमार मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
अदालत ने यह कार्रवाई पुलिस की ओर से छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट के तहत जेल में बंद बैथनी स्कूल सोसाइटी के प्राचार्य डैनियल एमानुवेल को जेल से मुक्त करने के सिलसिले में दिये गये अावेदन के बाद की है.
पुलिस की ओर से दिये गये इस आवेदन को एडिशनल सेशन जज ने गंभीरता से लिया है. साथ ही इस मामले में गंभीर टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि पुलिस की यह कार्रवाई न्यायालय के काम में सीधा हस्तक्षेप है.
इस मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि आवेदन एसपी पाकुड़ के निर्देश पर दाखिल किया गया है. पुलिस का यह कदम प्रथमदृष्टया न्यायालय के कामकाज में अतिक्रमण है.
अदालत ने यह भी कहा है कि इस मामले में कोई प्रक्रिया शुरू करने से पहले वह एसपी, एडिशनल पीपी और आइओ का पक्ष जानना चाहते हैं. अदालत ने संबंधित तीनों व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए यह जानना चाहा है कि उन्होंने किस नियम-कानून के तहत ऐसा करते हुए न्यायालय के काम में अतिक्रमण करने की कोशिश की है.
अदालत ने इस मामले में 26 मई तक जवाब दाखिल करने का समय दिया था. साथ ही यह चेतावनी भी दी थी कि क्यों न सभी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाये. सूत्रों के मुताबिक मामले में आइओ व एडिशनल पीपी ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. जबकि एसपी ने मामले में सक्षम अदालत से जवाब देने के लिए समय मांगा है. बताया जा रहा है कि वे हाइकोर्ट जायेंगे.
पोक्सो एक्ट के आरोपी जेल में बंद स्कूल के प्राचार्य को एसपी ने दी थी क्लीन चिट
एसपी के निर्देश पर कोर्ट पहुंचा आइओ, कोर्ट ने एसपी के सुपरविजन पर सवाल खड़े किये
पाकुड़ के एसडीपीओ ने अपने सुपरविजन में 10 साल की नाबालिग से छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट की धाराओं में बैथनी स्कूल सोसाइटी के प्राचार्य डैनियल एमानुवेल पर लगे आरोपों को प्रथमदृष्टया सत्य पाते हुए 27-04-18 को जांच सुपरविजन रिपोर्ट जारी किया था.
पाकुड़ नगर थाना में दर्ज कांड संख्या 60/18 (09-04-18) में आरोपी को जेल भेजा गया था. निचली अदालत से उसका जमानत भी अस्वीकृत हो गया था. इसी मामले में पाकुड़ एसपी शैलेंद्र वर्णवाल ने सुपरविजन के बाद 07-05-2018 की तिथि से रिपोर्ट टू जारी किया.
इन्होंने इसमें आरोपी प्राचार्य बैथनी स्कूल सोसाइटी के प्राचार्य डैनियल एमानुवेल को छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट की धाराओं से मुक्त कर दिया. साथ ही अनुसंधानकर्ता को निर्देश दिया कि वह लोक अभियोजक के माध्यम से न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल करे, ताकि प्राचार्य को न्यायिक हिरासत से मुक्त कराया जा सके. कोर्ट ने एसपी के सुपरविजन पर भी सवाल खड़े किये हैं. कोर्ट ने कहा है कि पुलिस की यह कार्रवाई अदालत के काम में हस्तक्षेप है.
निलंबित थानेदार ने एसोसिएशन से लगायी गुहार, उठाये सवाल
मामले में निलंबित थानेदार इंदू शेखर झा ने झारखंड पुलिस एसोसिएशन के महामंत्री को एक आवेदन दिया है. जिसमें उन्होंने कहा है कि एसआइ रैंक के अफसर की कमी के कारण उन्होंने एएसआइ को पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले का अनुसंधानक बना दिया था.
बाद में केस का अनुसंधानक एसआइ को बनाया गया. पूर्व में भी पोक्सो एक्ट से जुड़े कई मामले में जिले के विभिन्न थानों में दर्ज कांडों में अनुसंधानक बनाया गया था. लेकिन किसी थानेदार को निलंबित नहीं करते हुए सिर्फ उन्हें ही आइजी के स्तर से निलंबित किया गया. जबकि इस मामले में एक अधिकारी ने बताया कि थानेदार को एक निर्दोष को जेल भेजने के आरोप में निलंबित किया गया था.
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