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सरकार चार माह में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए करे काउंसेलिंग : हाइकोर्ट

Updated at : 12 May 2018 6:16 AM (IST)
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सरकार चार माह में  शिक्षकों की नियुक्ति के लिए करे काउंसेलिंग : हाइकोर्ट

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को प्रारंभिक स्कूलों में सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसेलिंग के आयोजन संबंधी एकलपीठ के आदेश को चुनाैती देनेवाली अपील याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस डीएन पटेल व जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी. एकल […]

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को प्रारंभिक स्कूलों में सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसेलिंग के आयोजन संबंधी एकलपीठ के आदेश को चुनाैती देनेवाली अपील याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस डीएन पटेल व जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी. एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा. खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार माह के अंदर एकल पीठ के आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया.
एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी सरकार ने : राज्य सरकार ने अपील याचिका दायर कर एकल पीठ के आदेश को चुनाैती दी थी. उसे निरस्त करने का आग्रह किया था.
एकल पीठ ने दो फरवरी 2017 को अपने आदेश में कहा था कि कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ के सहायक शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए पूरे राज्य में एक आैर काउंसेलिंग आयोजित की जाये. इसके लिए चार सप्ताह के अंदर सूचना प्रकाशित की जाये. तीन सप्ताह के अंदर काउंसेलिंग की जाये. खंडपीठ में प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता ललित कुमार सिंह, अधिवक्ता बालेश्वर यादव, अधिवक्ता शिखा भट्ट व अन्य ने पक्ष रखा.
सरकार की अपील खारिज हाइकोर्ट ने दिया आदेश
क्या है मामला
सरकार ने प्रारंभिक स्कूलों में सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 03/2015 के माध्यम से विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. इसके बाद जिलावार काउंसेलिंग कर शिक्षकों की नियुक्ति की गयी. हजारों पद रिक्त रह गये. इसके खिलाफ विनोद कुमार यादव व अन्य की ओर से रिट दायर की गयी थी.
इनका कहना था कि हजारों पद रिक्त हैं, इसके बावजूद काउंसेलिंग नहीं की जा रही है. जबकि जिलावार काउंसेलिंग के आयोजन में एकरूपता नहीं है. अभ्यर्थियों को आैर अवसर मिलना चाहिए. मामले की सुनवाई के बाद एकल पीठ ने सरकार को काउंसेलिंग का एक और अवसर देने का आदेश दिया था. सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील में गयी थी.
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