Jharkhand : प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से उत्‍पन्‍न समस्‍याओं को रेखांकित करती आड्रे हाउस की फोटो प्रदर्शनी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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खनन, पर्यावरण एवं समुदाय विषय पर आड्रे हाउस में फोटो प्रदर्शनी

रांची : राजभवन के आड्रे हाउस में खनन, पर्यावरण एवं समुदाय विषय पर फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है. झारखंड प्राकृतिक संसाधनों का धनी राज्‍य है. यहां प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा पायी जाती है. अधिकृत और अनधिकृत खनन ने कई स्‍थलों की भौगोलिक संरचना को काफी नुकसान पहुंचाया है. इन बिन्‍दुओं को रेखांकित करने के लिए सात स्‍थानीय फोटोग्राफरों के 30 फोटो की प्रदर्शनी लगायी गयी है. ये बातें 'संवाद' के शेखर ने कही.

Jharkhand : प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से उत्‍पन्‍न समस्‍याओं को रेखांकित करती आड्रे हाउस की फोटो प्रदर्शनी

उन्‍होंने कहा कि आजादी के बाद देश में खनिज उत्‍पादन में जबरदस्‍त वृद्धि हुई है. तकनीकी विकास के चरम पर बैठे मानव को आधुनिक तकनीक ने एक ओर जमीन के अंदर दबे खनिज को खोद कर निकालने व इस्‍तेमाल करने की शक्ति दी है, तो दूसरी ओर जीवन के लिए खतरा भी बढ़ाया है. झारखंड के कई इलाके पर्यावरण संकट से गुजर रहे हैं.

Jharkhand : प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से उत्‍पन्‍न समस्‍याओं को रेखांकित करती आड्रे हाउस की फोटो प्रदर्शनी

कोयला खनन क्षेत्र के पेड़-पौधे और बस्तियां काले रंग में रंगे नजर आते है, जबकि लौह अयस्‍क क्षेत्रों की नदियां और पहाड़ लाल रंग में पुती हुई दिखायी पड़ती है. उन्‍होंने कहा कि आमतौर पर खनन प्रक्रिया में पानी, भूमि और ऊर्जा की खपत होती है. जबकि टिकाऊ विकास के लिए आवश्‍यक है कि इनका उपयोग इस प्रकार सोच समझकर किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी को इनकी कमी महसूस न हो.

Jharkhand : प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से उत्‍पन्‍न समस्‍याओं को रेखांकित करती आड्रे हाउस की फोटो प्रदर्शनी

इन फोटोग्राफरों के फोटो किये गये शामिल

ग्‍लैडसन डुंगडुंग के फोटो सारंडा वन के सामान्‍य जनजीवन तथा लौह अयस्‍क खदानों से प्रभावित कृषि योग्‍य भूमि एवं प्रदूषण को दर्शाते हैं.

गुड्डू वर्मा के फोटो धनबाद के झरिया में कोयला खदान में लगी आग और प्रभावित जन-जीवन को दर्शाते हैं.

श्रीनिवास करूगंती ने इसी साल जनवरी में धनबाद और झरिया के कोयला खदान का दौरा किया और कई सामाजिक सरोकार की चीजों को अपने कैमरे में कैद किया.

फिलिप कुजूर की तस्वीरों में बीसीसीएल के अधिकांश भूमिगत खदान, जो अब खुली खदानों में तब्‍दील हो चुके हैं, को दिखाया गया है. श्रीनिवास और फिलिप की तस्‍वीरों में कोयला खदानों के आसपास निवास करने वाले वंचित और कमजोर तबकों की कठिन दिनचर्या प्रदर्शित की गयी है.

नितीश प्रियदर्शी के चित्रों में संथाल परगना के पाकुड़ क्षेत्र में होनेवाले खनन कार्यों का दस्‍तावेजीकरण है. इन खदानों में पत्‍थर खदान और कोयला खदान के साथ-साथ आसपास के गांवों में निवास करने वाले लोगों का जन-जीवन भी चित्रित है.

शशि शंकर के छायाचित्र में संथाल परगना प्रमंडल के धमधमियां तालझारी और राजमहल इलाके के क्रशर उद्योग में कार्यरत लोगों का जन जीवन एवं परिदृश्‍य प्रमुखता से उजागर किये गये हैं.

शेखर के छायाचित्रों में जारंगडीह, कथारा माइन्‍स, फुसरो के निकट दामोदर नदी के आसपास फैले खनन क्षेत्र के परिदृश्‍य व आम जनजीवन का चित्रण प्रमुख रूप से किया गया है.

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