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झारखंड : मैदान में तीन प्रत्याशी, अब विधायकों की बारी, भाजपा ने दो उम्मीदवार देकर बढ़ाया रोमांच, धीरज साहू की बढ़ी परेशानी

Updated at : 13 Mar 2018 7:59 AM (IST)
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झारखंड : मैदान में तीन प्रत्याशी, अब विधायकों की बारी, भाजपा ने दो उम्मीदवार देकर बढ़ाया रोमांच, धीरज साहू की बढ़ी परेशानी

II आनंद मोहन II एक-एक वोट कीमती, तोल-मोल और सेंधमारी सबकुछ दिखेगा रांची : झारखंड में राज्यसभा चुनाव एक बार फिर रोचक मोड़ पर पहुंच गया है. राजनीति की बिसात बिछ गयी है. दो सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतर चुके हैं. भाजपा ने दो उम्मीदवार देकर चुनाव का रोमांच बढ़ा दिया है. […]

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II आनंद मोहन II
एक-एक वोट कीमती, तोल-मोल और सेंधमारी सबकुछ दिखेगा
रांची : झारखंड में राज्यसभा चुनाव एक बार फिर रोचक मोड़ पर पहुंच गया है. राजनीति की बिसात बिछ गयी है. दो सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतर चुके हैं. भाजपा ने दो उम्मीदवार देकर चुनाव का रोमांच बढ़ा दिया है.
समीर उरांव और व्यवसायी प्रदीप कुमार सोंथालिया इनके उम्मीदवार हैं. समीर उरांव पहली प्राथमिकता हैं. सोंथालिया को जीत के लिए जोर लगाना होगा. शह-मात का खेल चलेगा. भाजपा ने प्रत्याशी देकर कांग्रेस के धीरज साहू की परेशानी बढ़ा दी है.
पार्टियों ने अपना पत्ता खोल दिया है. अब विधायकों की बारी है. माननीयों का एक-एक वोट कीमती होगा. चुनावी मैदान में भाजपा के सोंथालिया और कांग्रेस के धीरज साहू पर नजर होगी. दोनों ही पार्टी नेता के साथ-साथ जाने-माने व्यवसायी भी है़ं विधायकों (सभी नहीं) के वोट का तोल-मोल होगा. पक्ष-विपक्ष की सेंधमारी होगी. चुनावी मैदान में खेल होगा. राजनीतिक दावं-पेंच के साथ-साथ दूसरे हथकंडे भी अपनाये जायेंगे़ ऐसे भी राज्यसभा चुनाव में झारखंड सुर्खियों में रहा है. झारखंड में बार्गेन की राजनीति होती रही है़
जुगाड़ करने हैं पांच वोट
एनडीए गठबंधन के पास 47 वोट हैं. एक प्रत्याशी को जीत के लिए 27 वोट चाहिए. भाजपा के पास 20 वोट सरप्लस है़ निर्दलीय भानु प्रताप शाही और गीता कोड़ा ने समर्थन दे दिया है. ऐसे में भाजपा के दूसरे प्रत्याशी के पास 22 वोट हो गये़ रास्ता आसान नहीं है, अब भी पांच वोट की जरूरत होगी. भाजपा यह वोट विपक्षी खेमा में सेंधमारी कर हासिल कर सकती है. यूपीए को अपना कुनबा बचाने की चुनौती है.
विपक्ष में झाविमो सहित दूसरे विपक्षी विधायक नामांकन प्रक्रिया से दूर रहे हैं. झारखंड की राजनीति में कभी भी कुछ हो सकता है. यहां विधायक बीमार होने से लेकर लापता होते रहे है़ं. प्रत्याशी वोटिंग के दिन विधायकों को खोजने में पूरी ताकत लगा देते हैं, लेकिन विधायक नहीं पहुंचते़
पहले सामने आ चुका है हॉर्स ट्रेडिंग, हो चुकी है सीबीआइ जांच
राज्यसभा चुनाव में पहले हॉर्स ट्रेडिंग के मामले सामने आये हैं. राज्यसभा चुनाव 2010 और 2012 में हुए चुनाव में पैसे के लेन-देन का मामला सामने आया था. राज्यसभा चुनाव के दिन पैसे भी पकड़े गये थे.
राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग की जांच सीबीआइ कर चुकी है. राज्यसभा चुनाव में सीबीआइ जांच के दौरान दो दर्जन से ज्यादा विधायकों के नाम सामने आये थे. सीबीआइ ने इनसे अलग-अलग पूछताछ की थी़
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