झारखंड : डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज रहे बेहाल, जामताड़ा के सिविल सर्जन के साथ मारपीट का विरोध
Updated at : 27 Feb 2018 7:35 AM (IST)
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रांची : इस हड़ताल में राज्य भर के 18,000 से ज्यादा डॉक्टर शामिल हुए. इससे राज्य के सभी सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी में ओपीडी सेवा पूरी तरह ठप रही. डॉक्टर अस्पतालों में तो आये, लेकिन आेपीडी चेंबर में नहीं बैठे. वे या तो अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते रहे या फिर […]
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रांची : इस हड़ताल में राज्य भर के 18,000 से ज्यादा डॉक्टर शामिल हुए. इससे राज्य के सभी सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी में ओपीडी सेवा पूरी तरह ठप रही. डॉक्टर अस्पतालों में तो आये, लेकिन आेपीडी चेंबर में नहीं बैठे. वे या तो अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते रहे या फिर अपने चैंबर में बैठे रहे.
इधर, डॉक्टरों के ओपीडी में नहीं बैठने की वजह से मरीजों को काफी दिक्कत हुई. सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज के इलाकों से आनेवाले उन मरीजों को हुई, जिन्हें हड़ताल की जानकारी नहीं थी. घंटों इंतजार के बावजूद मरीजों को परामर्श नहीं मिला. बाद में इनमें से ज्यादातर मरीज घर लौट गये, जबकि कुछ के परिजन उन्हें लेकर निजी अस्पताल या क्लिनिक में गये.
नर्सों के भरोसे रहा रांची सदर अस्पताल
हड़ताल की वजह से राजधानी के सदर अस्पताल में मरीज बेहाल रहे. ओपीडी बंद रहा. वार्ड में भी डॉक्टरों ने राउंड नहीं लगाया. नर्सों ने शनिवार को डॉक्टरों द्वारा दिये गये परामर्श के अनुसार ही रविवार को भी मरीजों को दवाएं दी. डॉक्टरी परामर्श नहीं मिलने के कारण कई मरीज के परिजन वार्ड से छुट्टी करा कर घर ले गये.
सदर अस्पताल के शिशु विभाग में भर्ती बच्चों के लिए दो दिन से मुश्किलों से भरा रहा. रविवार को छुट्टी के कारण डॉक्टर परामर्श नहीं दिया. वहीं, सोमवार को हड़ताल के कारण बच्चों को परामर्श नहीं मिला.
शिशु वार्ड में भर्ती पांच माह के बच्चे को निमोनिया है. वह बुखार से कराह रहा है, लेकिन नर्स पहले के परामर्श के हिसाब से दवा दे रही है. दो दिन से डॉक्टर देखने तक नहीं आये है. डॉक्टरों के नहीं अाने के कारण तीन से चार बच्चाें को परिजन निजी अस्पताल में इलाज कराने ले गये. बच्चों के परिजनों के आग्रह पर नर्स अस्पताल परिसर में प्राथमिक इलाज किया.
इमरजेंसी में सिर्फ गंभीर मरीजों को मिला परामर्श
हड़ताल के दौरान इमरजेंसी में सिर्फ गंभीर मरीजों को इलाज किया गया. सामान्य बीमारी वाले मरीजों को मंगलवार को आने के लिए कहा गया. रांची सदर अस्पताल में कई गंभीर मरीजों को इमरजेंसी के डॉक्टरों ने रिम्स रेफर कर दिया. कुछ ही मरीज का डॉक्टरों ने इलाज किया.
सिविल सर्जन नहीं कर सके वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग
झासा के पदाधिकारियों ने सोमवार को सिविल सर्जन डॉ शिवशंकर हरिजन को भी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग नहीं करने दिया. वहीं, वीआइपी ड्यूटी में तैनात डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं नहीं दी. डॉक्टर सोमवार को अपनी रूटीन सेवाओं से अपने आप को अलग रखा.
सफल रही हड़ताल, डॉक्टरों ने नहीं दी सेवा
हमारी हड़ताल पूरी तरह सफल रही. इस दौरान पूरे राज्य में चिकित्सा सेवाएं ठप रहीं. सदर अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी, रेफरल अस्पताल में डॉक्टरों ने सेवाएं नहीं दी. वहीं, वीआइपी ड्यूटी से भी खुद को अलग रखा.
डॉ विमलेश सिंह, राज्य सचिव, साझा
डॉक्टरों के प्रति सरकार को संवेदनशील बनना होगा
डॉक्टरों के बल पर झारखंड को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं में अच्छी रैंकिंग मिली है. इसके बावजूद सरकार हमारी सुरक्षा के बारे में नहीं गंभीरता से विचार नहीं कर रही है. सरकार को डॉक्टरों के प्रति संवेदनशील बनना होगा.
डॉ प्रदीप सिंह, राज्य सचिव, आइएमए
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