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रांची : ”कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर”, 38 चरित्रों के माध्यम से कबीर को किया जीवंत

‘कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर, न काहू से दोस्ती न काहू से बैर…’ कबीर के इस दोहे और संगीतमयी धुन के बीच गुरुवार को आर्यभट्ट सभागार में ‘कबीर’ नाटक का मंचन हुआ. इसके लेखक शेखर सेन ने ही इसमें खूद सोलो परफार्मेंस दी. मूलरूप से अवधि भाषा में पेश किये नाटक में कबीर […]

‘कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर, न काहू से दोस्ती न काहू से बैर…’ कबीर के इस दोहे और संगीतमयी धुन के बीच गुरुवार को आर्यभट्ट सभागार में ‘कबीर’ नाटक का मंचन हुआ. इसके लेखक शेखर सेन ने ही इसमें खूद सोलो परफार्मेंस दी. मूलरूप से अवधि भाषा में पेश किये नाटक में कबीर के जन्म से लेकर उनके साहित्यकार बनने तक की कहानी उन्होंने दोहों के जरिये बयां की. शेखर सेन द्वारा प्रस्तुत मोनो एक्ट प्ले की खास बात यह रही है, महिला की भी आवाज वो खूद दे रहे थे. अपने इस नाटक कबीर को उन्होंने अपनी कला से जीवंत कर दिया.

अपने इस नाटक के मंचन में उन्होंने 38 चरित्रों को जीया साथ ही 43 रागों में दोहे पेश किये. लगभग ढाई घंटे तक चले इस मोनो एक्ट प्ले में श्री सेन खूद कबीर के माता-पिता, जुलाहा व मुल्ला तो कभी पंडित का किरदार निभाया. दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं. नाटक की कहानी शुरू होती है काशी के एक गांव से. जहां के एक जुलाहे नीरू को एक बच्चा नदी में बह कर आता हुआ मिलता है. वह उसे घर ले आता है. इसके बाद नीरू और उसकी पत्नी नीमा उसका पालन-पोषण करते हैं.

वह बच्चा वहीं बड़ा होता है और आगे चल कर कबीर बना. कबीर के दोहों व संगीतमयी धुन के बीच बताया गया कि मां की जिद पर जब कबीर लोई को विवाह कर घर लाये तो पता चला कि उनकी झोपड़ी जला दी गयी है. इस पर कबीर ने अपनी पत्नी को बताया कि गरीब के घर तो खुशियां घर की झोपड़ी को जलाकर भी मनायी जाती है. इसे दर्शकों ने संजीदा किया तो वहीं एक डायलॉग ‘औरत जात का रोना और कुंभकर्ण का सोना’ अगर एक बार शुरू हो जाये तो बस रुकने का नाम हीं नहीं लेते…’ इसके जरिये शेखर सेन ने बताया कि गरीबी अपने आप में अभिशाप नहीं है, बल्कि इसके लिये समाज की कुरितियां ही जिम्मेदार है.
कौन हैं शेखर सेन:रायपुर छत्तीसगढ़ के रहने वाले शेखर 18 वर्ष की उम्र में ही अपना कैरियर शुरू किया. वे मुंबई चले गये और मुंबई को ही अपना कार्यस्थली बनाया.भजन व गीत में लोकप्रियता हासिल करने के बाद इनका रूझान नाटक की ओर हो गया. वर्ष 1998 के बाद श्री सेन ने अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय देते हुए खुद को एक नाटककार, अभिनेता, गायक, संगीतकार, लेखक व चित्रकार के रूप में प्रस्तुत किया. इन्होंने तुलसी, कबीर, विवेकानंद, सूरदास एवं साहब जैसी नाट्यों का निर्माण कर इसे म्यूजिकल मोनोएक्ट प्ले के रूप में प्रस्तुत किया. जिसे देशों व विदेशों में लोगों ने खूब सराहा.
इन्हे वर्ष 2015 में कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया
भारतीय कला संस्कृति से लोगों को अवगत कराना उद्देश्य: एनएन सिन्हा स्पीक मैके के चेयरमैन एनएन सिन्हा ने स्पीक मैके के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि स्पीक मैके का उद्देश्य भारतीय कला एवं संस्कृति से लोगों को अवगत कराना है. आज से 40 वर्ष पूर्व आइआइटी दिल्ली में शुरुआत हुई थी. कौन-कौन थे मौजूद:विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव, नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, विधायक डॉ जीतू चरण राम, कार्मिक सचिव निधि खरे, कला संस्कृति विभाग के सचिव राहुल शर्मा, हिमानी पांडेय, स्पीक मैके के अध्यक्ष एनएन सिन्हा,खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ, रांची विवि के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय समेत काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे.

Prabhat Khabar Digital Desk
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