झारखंड : CM को पत्र लिख सरयू राय ने उठाये सवाल, कैबिनेट की बैठक में CS के आने का औचित्य क्या है?

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Jan 2018 4:37 AM

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आनंद मोहन रांची : झारखंड के खाद्य-आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने महान भारत प्रतिभा संस्थान को एक रुपये शुल्क पर बुंडू में 62़ 26 एकड़ जमीन दिये जाने के कैबिनेट के फैसले पर आपत्ति जतायी है. कैबिनेट की बैठक में मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाये हैं. सरयू राय […]

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आनंद मोहन
रांची : झारखंड के खाद्य-आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने महान भारत प्रतिभा संस्थान को एक रुपये शुल्क पर बुंडू में 62़ 26 एकड़ जमीन दिये जाने के कैबिनेट के फैसले पर आपत्ति जतायी है. कैबिनेट की बैठक में मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाये हैं. सरयू राय ने इस संबंध में मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र भी लिखा है. पत्र में कहा है कि मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव का कैबिनेट की बैठक में उपस्थित रहने का औचित्य क्या है? कैबिनेट की बैठक में इनकी भूमिका क्या होनी चाहिए? इनकी उपस्थिति की सीमा-मर्यादा क्या होनी चाहिए ? उन्होंने अपने पत्र में मुख्यमंत्री से कहा है कि इस बारे में आप मुझसे बेहतर जानते हैं और इसका ध्यान रखा जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में सरयू राय ने लिखा है कि राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने पहले ही विभाग की ओर से महान भारत प्रतिभा संस्थान को स:शुल्क जमीन देने के प्रस्ताव को मंजूर किया था. मंत्रिपरिषद के किसी अन्य सदस्य ने भी इस पर सहमति या असहमति नहीं व्यक्त की थी, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव संस्थान को 62़ 26 एकड़ जमीन की लीज बंदोबस्ती नि:शुल्क करने के पक्ष में कैबिनेट की बैठक में दलील दे रहे थे और संस्थान के बारे में तथ्य से परे अपुष्ट जानकारी परोस रहे थे.
सरयू राय ने अपने पत्र में कहा है कि कैबिनेट में प्रस्ताव जाने से पहले यह मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचा, लेकिन मुख्य सचिव ने कहीं भी नि:शुल्क बंदोबस्ती की बात नहीं लिखी. सरयू राय ने कहा है कि कोई विषय कैबिनेट के समक्ष स्वीकृति के लिए किसी विभाग द्वारा लाया जाता है, तो उसकी प्रक्रिया होती है.
प्रक्रिया के तहत संबंधित विभाग से प्रस्ताव तैयार होने के बाद उस पर वित्त विभाग, विधि विभाग की सहमति प्राप्त की जाती है. फिर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव की सहमति के बाद प्रस्ताव कैबिनेट में आता है. पर महान भारत प्रतिभा संस्थान को नि:शुल्क जमीन देने के मामले में प्रक्रिया का अनुपालन किस तरह किया गया है-राजस्व व भूमि सुधार विभाग ने स:शुल्क बंदोबस्ती का प्रस्ताव भेजा.
वित्त एवं विधि विभाग ने स:शुल्क बंदोबस्ती के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी. मुख्य सचिव ने प्रस्ताव की संचिका कैबिनेट सचिवालय में भेजे जाने के क्रम में स:शुल्क बंदोबस्ती के प्रस्ताव पर सहमति दी. मुख्यमंत्री के नाते आपने संपुष्ट किया. पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर नि:शुल्क बंदोबस्ती की बात नहीं हुई. सात नवंबर को कैबिनेट की बैठक के बाद संचिका वापस की गयी, तो राजस्व विभाग ने न तो उसमें कोई अतिरिक्त तर्क व तथ्य रखा और न ही लीज बंदोबस्ती नि:शुल्क करने का प्रस्ताव तैयार किया. बाद में भी फाइल उसी रूप में कैबिनेट में आयी.
मुख्य सचिव फाइल पर खुद नहीं लिखती, कैबिनेट के मत्थे मढ़ती हैं : सरयू राय ने लिखा है कि मुख्य सचिव के पास से फाइल गुजरी, तो जिस सक्रियता के साथ कैबिनेट की मीटिंग में लीज बंदोबस्ती नि:शुल्क करने की वकालत की, वैसा कोई आदेश उन्होंने फाइल में नहीं दिया. मुख्य सचिव जो सलाह कैबिनेट में दे रही थी, वह संचिका में भी लिख सकती थी. मामला कैबिनेट में लाकर सबकी जिम्मेदारी कैबिनेट के मत्थे मढ़ने का क्या अर्थ है़

एक रुपया में 62 एकड़ जमीन देने की वकालत क्यों की?
क्या है मामला
पिछले साल सात नवंबर काे कैबिनेट की बैठक में महान भारत प्रतिभा संस्थान नाम की संस्था को राज्य सरकार ने बुंडू अंचल में दामी मौजा 62़ 26 एकड़ गैर-मजरुआ जमीन एक रुपया टोकन शुल्क पर देने पर सहमति दी थी. इस प्रस्ताव का सरयू राय ने विरोध किया था. इसके बाद प्रस्ताव स्थगित कर दिया गया. 21 नवंबर को कैबिनेट की बैठक में फिर से इस प्रस्ताव को लाया गया.
राजस्व विभाग ने सशुल्क जमीन देने का पुराना प्रस्ताव ही लाया, लेकिन बैठक में जमीन नि:शुल्क ही देने का प्रस्ताव रख दिया गया. इस पर सबसे पहले मंत्री सीपी सिंह ने असहमति जतायी. फिर सरयू राय ने भी अपनी असहमति जताते हुए तर्क दिये़ दो मंत्रियों की असहमति के बाद भी कैबिनेट से संस्थान को नि:शुल्क जमीन बंदोबस्त करने का प्रस्ताव पास हुआ़
गुरु, मंत्री और वैद्य की सलाह मानी जानी चाहिए
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सरयू राय ने कहा है-नीति कहती है कि गुरु की, मंत्री की और वैद्य की उचित सलाह का आदर होना चाहिए. इसे माना जाना चाहिए. इस विषय पर कैबिनेट का फैसला स्थगित रखा जाये और सम्यक विचार के बाद ही निर्णय होना चाहिए़
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