रांची : फुटपाथ दुकानदारों ने विधानसभा घेरा, कहा - नहीं मानेंगे यह नियम चाहे गोली बरसे या बम

Updated at : 14 Dec 2017 3:51 PM (IST)
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रांची : फुटपाथ दुकानदारों ने विधानसभा घेरा, कहा - नहीं मानेंगे यह नियम चाहे गोली बरसे या बम

रांची : झारखंड की राजधानी रांची में ट्रैफिक की समस्या को लेकर सरकार सजग है. सड़क किनारे दुकान लगाने वाले फुटपाथ दुकानदारों पर निगम कड़ा रुख अपना रहा है. लालपुर सब्जी मंडी में दुकान लगाने वाले कई वेंडर्स परेशान हैं. निगम ने उन्हें तय समय दिया है लेकिन उनकी मांग है कि उन्हें सब्जी बेचने […]

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रांची : झारखंड की राजधानी रांची में ट्रैफिक की समस्या को लेकर सरकार सजग है. सड़क किनारे दुकान लगाने वाले फुटपाथ दुकानदारों पर निगम कड़ा रुख अपना रहा है. लालपुर सब्जी मंडी में दुकान लगाने वाले कई वेंडर्स परेशान हैं. निगम ने उन्हें तय समय दिया है लेकिन उनकी मांग है कि उन्हें सब्जी बेचने के लिए और वक्त मिले. सब्जी दूसरे – तीसरे दिन नहीं बेच सकते साग, धनिया पत्ता जैसी चीजें खराब होने लगती हैं. गुरुवार को फुटपाथ दुकानदारों ने विधानसभा का घेराव किया. उन्होंने कहा, हम बेरोजगार हैं हमारे पास काम नहीं है जबतक हमारे सिर पर दौरा है तबतक हमारे पेट में रोटी है. हमें बसाने के बजाय सरकार हमें उजाड़ने में लगी है.

आज विधानसभा घेराव में फुटपाथ दुकानदारों ने नारा लगाया हम एक हैं. मंच पर एक महिला दुकानदार ने कहा, हमारे पेट पर लात मारने की हिम्मत किसने की है. कौन है जो हमारा रोजगार हमसे छिन लेना चाहता है. हमने अपनी मां के पेट से सीखा है पुलिस की लाठी, गुंडे की लाठी . धूप में, बरसात में, ठंड में मेहनत करना. हमारे पेट पर लात मारने की हिम्मत किसमें है. हम अपनी मेहनत का खाते हैं. हमारी टोकरी छिनने की ताकत किसमें है. सरकार हम गरीबों पर लाठी ना चलाये. हम कोई आतंकवादी नहीं हैं, हम गुंडे नहीं, मवाली नहीं. हम गरीब हैं. किसी का पति नहीं है, किसी का पिता नहीं, किसी का बेटा मर गया हमें जब कोई रोजगार नहीं मिला तब हमने यह काम शुरू किया. अब हमारा हक लूटने की कोशिश हो रही है.
महिला ने फुटपाथ दुकानदारों के साथ हो रहे व्यवहार की तुलना अंगरेजों के शासन काल से करते हुए उस वक्त जैसे लोगों को कुचला जाता था वैसे ही हमें कुचलने की कोशिश की जा रही है. सब्जियों को पैरों तले दबाया जा रहा है. रास्ते में पटक के मारा जा रहा है. पुलिस हमारे सामान जब्त कर रही है. हमें समय पर सीमित रखने वाले ये कौन लोग हैं. सरकार हमें बांध रही है तो सारे काम बांधे. सुबह 6 बजे उठे औऱ 10 बजे तक सारे सरकारी काम खत्म करे. सारा काम 4 घंटे में लागू करे. आम लोग कैसे 4 घंटे में पेट पाल सकते हैं. हम इस नियम को नहीं मानेंगे चाहे गोली बरसे या बम. हम सुबह 4 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक मेहनत करते हैं इसलिए आतंकवादी हैं? अपने खून पसीने की कमायी खा रहे हैं इसलिए आतंकवादी हैं?
जिस वक्त वोट मांगने नेता आते हैं उस वक्त गरीबों से दिक्कत नहीं होती. आज फुटपाथ किनारे दुकान लगाने वाले खटकने लगे हैं. सरकार रोड साफ नहीं कर रही है गरीबों को साफ कर रही है. हमें किसी ने नौकरी नहीं दी हमें कोई वेतन नहीं देता. हम अपनी मेहनत का खाते हैं. हम पर बुलडोजर भी चल जाए तो हमारे हक की आवाज आयेगी. सिर कट जाए तो कट जाए सिर झुका नहीं सकते. अगर कोई रास्ता निकालना चाहते हैं तो हमारे हक और अधिकार दें.
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