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बांग्लादेशी मूल के ब्रिटिश नागरिक और अल कायदा के संदिग्ध आतंकी को न्यायिक हिरासत में भेजा

Updated at : 13 Dec 2017 8:20 AM (IST)
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बांग्लादेशी मूल के ब्रिटिश नागरिक और अल कायदा के संदिग्ध आतंकी को न्यायिक हिरासत में भेजा

रांची/नयी दिल्ली: भारत में अल कायदा का बेस तैयार करने के लिए बिहार, झारखंड का दौरा कर चुके बांग्लादेशी मूल के ब्रिटिश नागरिक और संदिग्ध आतंकी को एक महीने के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच की अवधि एक महीने के लिए […]

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रांची/नयी दिल्ली: भारत में अल कायदा का बेस तैयार करने के लिए बिहार, झारखंड का दौरा कर चुके बांग्लादेशी मूल के ब्रिटिश नागरिक और संदिग्ध आतंकी को एक महीने के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच की अवधि एक महीने के लिए बढ़ाते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया. अल कायदा के संदिग्ध आतंकी ‘समीउल रहमान’ उर्फ ‘हमदान’ उर्फ ‘शुमोन हक’ उर्फ ‘राजू भाई’ को आतंकवादी गतिविधियों के लिएओसामा बिन लादेन के खूंखार आतंकवादी संगठन में युवाओं की भर्ती करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

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एनआईए की हिरासत में कोर्ट में पेश किये गये हमदान की सुनवाई बंद कमरे में हुई. बांग्लादेशी मूलकेहमदान के मामले में जांच के लिए कोर्ट ने एनआईए को और 30 दिन की मोहलत दी है. एजेंसी ने एक आवेदन देकर 90 दिन की अनिवार्य अवधि बढ़ाने की मांग की थी. इसके बाद अदालत ने यह वक्त दिया. हमदान की हिरासत की 90 दिन की अवधिमंगलवारको समाप्त हो गयी.

समीउल रहमान (27) को सितंबर में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उसे आतंकवादी संगठन के लिए रोहिंग्या मुस्लिमों की भर्ती करने और उन्हें म्यांमार की सेना के खिलाफ लड़ने का प्रशिक्षण देने में कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किया गया था. आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता की वजह से इस मामले को दिल्ली पुलिस से लेकर हालही में एनआईए को सौंपा गया था.

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ज्ञात हो कि आरोपी ने इससे पहले अधिवक्ता एमएस खान के जरिये शहर की एक अदालत को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि जेल के सुरक्षाकर्मी ने उसका यौन उत्पीड़न किया. साथ ही जेल में अपने साथ अमानवीय बर्ताव का भी आरोप लगाया. अदालत ने उस आवेदन पर जेल अधिकारियों से जवाब मांगा था.

दिल्ली पुलिस की स्पेशलसेल ने आरोप लगाया था कि समीउल रहमान उर्फ राजू भाई के चरमपंथीकरण की प्रक्रिया लंदन की एक जेल में शुरू हुई थी, जब वह वहां लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में बंद था. वहां से जब यह भारत लौटा, तो किशनगंज (बिहार), हजारीबाग (झारखंड), एनसीआर और अन्य स्थानों पर रहा. पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी आतंकवाद फैलाने के लिए तैयार युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए मिजोरम या मणिपुर में ठिकाना बनाना चाहता था.

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उसकी गिरफ्तारी के बाद स्पेशल सेल ने सख्त गैर-कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. एनआईए की टीम पिछले दिनों रहमान को लेकर झारखंड आयी थी और हजारीबाग में जिन जगहों पर वह ठहरा था, उन जगहों पर जाकर जांच की थी.

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