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रांची में उपराष्ट्रपति : अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर क्‍या बोले एम वेंकैया नायडू..पढि़ए पूरा भाषण

Updated at : 09 Sep 2017 9:01 AM (IST)
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रांची में उपराष्ट्रपति : अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर क्‍या बोले एम वेंकैया नायडू..पढि़ए पूरा भाषण

रांची : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू शुक्रवार को रांची पहुंचे. प्रभात तारा मैदान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर पूर्ण साक्षर पंचायतों के मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि, महिला स्वयं सेवकों और नव साक्षरों को संबोधित किया. उन्होंने कहा : मुख्यमंत्री की अगुवाई में 2020 तक झारखंड पूर्ण साक्षर बनेगा. मैं दक्षिण भारत का रहनेवाला हूं. मुझे […]

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रांची : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू शुक्रवार को रांची पहुंचे. प्रभात तारा मैदान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर पूर्ण साक्षर पंचायतों के मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि, महिला स्वयं सेवकों और नव साक्षरों को संबोधित किया. उन्होंने कहा : मुख्यमंत्री की अगुवाई में 2020 तक झारखंड पूर्ण साक्षर बनेगा. मैं दक्षिण भारत का रहनेवाला हूं. मुझे हिंदी नहीं आती थी, लेकिन सीखने की ललक नहीं छोड़ी.
आज मैं हिंदी बोल और समझ सकता हूं. यही लालसा हम सब में होनी चाहिए. निरक्षरता रूपी अंधेरे को साक्षर रूपी उजाले से रोशन करना है. अत्याचार व भ्रष्टाचार उन्मूलन, नौकरी, सामाजिक उन्नति, आर्थिक विकास के लिए साक्षर होना जरूरी है. शिक्षा किसी भी उम्र में हासिल की जा सकती है. इसलिए झारखंड के नव साक्षर, बालिकाएं, महिलाएं घरों के बुजुर्ग और अनपढ़ को पढ़ायें.
देश को पूर्ण साक्षर बनाना है
उन्होंने कहा : आजादी के 70 वर्ष बाद भी देश में 20 करोड़ लोग निरक्षर हैं. इन्हें साक्षर बनाने की बड़ी चुनौती है. पहले भारत को विश्व गुरु के नाम से जाना जाता था. हमें भारत के विश्व गुरु होने के गौरव को वापस लाना है और देश को पूर्ण साक्षर बनाना है. अब जरूरत है गांव, पंचायत, नगरपालिका, जिला, राज्य और केंद्र सरकार साक्षरता को एक अभियान के रूप में ले और सभी को शिक्षित करे.
निरक्षरता एक अभिशाप
उपराष्ट्रपति ने कहा : निरक्षरता एक अभिशाप है. इसकी वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों को नहीं मिलता है. सबका साथ, सबका विकास के नारे के साथ राज्य सरकार ने 2020 तक राज्य को पूर्ण साक्षर बनाने का संकल्प लिया है. यह कार्य अद्भुत होगा. यह कार्य सिर्फ सरकार के भरोसे संभव नहीं है, इसके लिए आम लोगों को आगे आकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर शिक्षा का अलख जगाना होगा.
महिलाओं को सम्मान
उपराष्ट्रपति ने कहा : झारखंड सरकार ने पिछले पिछले तीन सालों में 32 लाख लोगों को साक्षर बनाया है, इनमें 70 प्रतिशत महिलाएं हैं. यह महिला सशक्तिकरण का बड़ा उदाहरण है. महिलाओं को सम्मान देना देश की परंपरा रही है, जिसका निर्वहन हो रहा है.
पौराणिक इतिहास और वेद पुराणों में भारत को मां कहा गया है. सरस्वती माता शिक्षा मंत्री थीं, वित्त मंत्री लक्ष्मी माता थीं, रक्षा मंत्री पार्वती जी थीं. देश की नदियां भी महिलाओं के नाम पर हैं, जैसे गंगा, सरस्वती, यमुना और अन्य. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सीतारमन को नया रक्षा मंत्री बनाया है. महिलाओं के शिक्षित होने से और उन्हें मौका दिये जाने से एक ताकत मिलती है. वे घर से लेकर समाज, राज्य और राष्ट्र के विकास के लिए आगे बढ़ती हैं.
परिवर्तन से ही विकास संभव
उन्होंने कहा : परिवर्तन से ही विकास संभव है. केंद्र सरकार भी परफार्म, रीफार्म और ट्रांसफोर्म के नारे से आगे बढ़ रही है. परिवर्तन से ही देश भी शक्तिशाली होगा. उन्होंने कहा : स्वच्छ, समृद्ध, सशक्त भारत बनाने के लिए प्रजा, प्रतिनिधि, स्वयं सेवी, प्रेरक सभी को शामिल होना होगा.
नव साक्षर भाई,बहन अपने आसपास रहनेवालों को शिक्षा के लिए प्रेरित करें, तभी उनका साक्षर होना सार्थक होगा. नये भारत और नये झारखंड का निर्माण हम कर सकेंगे. आदिवासी बहुल इस राज्य में जब तक सभी साक्षर नहीं होंगे, विकास की परिकल्पना सार्थक नहीं होगी.
ये भी थे
स्वागत मंत्री डॉ नीरा यादव ने किया. कार्यक्रम में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, सांसद रामटहल चौधरी, सांसद महेश पोद्दार, विधायक जीतू चरण राम, स्कूली और साक्षरता सचिव अराधना पटनायक समेत अन्य मौजूद थे.
नव साक्षरों, मुखिया और शिक्षा प्रतिनिधियों को सम्मानित किया
संपूर्ण राज्य को साक्षर बनाना है : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा : झारखंड को संपूर्ण शिक्षित बनाना है. स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की तरफ से एक हजार दिन में 32 लाख निरक्षरों को साक्षर बनाया गया है. झारखंड की साक्षरता दर 66.41 है.
पुरुष साक्षरता दर 76.84 और महिला साक्षरता दर 55.42 प्रतिशत है. यह आकंड़ा बताता है कि राज्य के समक्ष कितनी बड़ी चुनौती है. यह केवल सरकार के बूते संभव नहीं है. सरकार के साधन सीमित हैं. लोगों को सरकार की मदद करनी होगी. एक बार झारखंड में शिक्षा का अलख जगने से कोई भी काम आसान हो जायेगा. गांवों को साक्षर बनाने की जिम्मेवारी लेनी होगी. इससे ही विकास की नयी रौशनी सामने आयेगी. झारखंड के 2020 तक पूर्ण साक्षर बनाने में सफलता भी मिलेगी.
गवर्नर बोलीं
सभी अपनी भूमिका निभाएं
राज्यपाल द्रौपदी मुरमू ने कहा : देश के हर नागरिक को साक्षर बनाना जरूरी है. शिक्षा से समान अवसर मिलता है. सर्व शिक्षा अभियान का मकसद पूरा होने से साक्षरता का महत्व और बढ़ेगा. उन्होंने कहा : झारखंड में पुरुषों की तुलना में महिलाएं कम साक्षर हैं. सरकार शत-प्रतिशत साक्षरता के लिए प्रयास करे. इसमें सभी अपनी भूमिकाएं निभाएं.
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