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झारखंड की रघुवर सरकार मॉनसून सत्र में पेश करेगी धर्म स्वतंत्र विधेयक, कठोर सजा का प्रावधान

Updated at : 02 Aug 2017 6:55 AM (IST)
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झारखंड की रघुवर सरकार मॉनसून सत्र में पेश करेगी धर्म स्वतंत्र विधेयक, कठोर सजा का प्रावधान

रांची: झारखंड कैबिनेट ने जबरन धर्मांतरण रोकने के उद्देश्य से तैयार विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी. इसे झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक 2017 के नाम से जाना जायेगा. विधेयक में तय प्रावधान के अनुसार, जबरन या लालच देकर किसी का धर्मांतरण कराना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आयेगा. इसे गैर जमानती अपराध माना जायेगा. […]

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रांची: झारखंड कैबिनेट ने जबरन धर्मांतरण रोकने के उद्देश्य से तैयार विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी. इसे झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक 2017 के नाम से जाना जायेगा. विधेयक में तय प्रावधान के अनुसार, जबरन या लालच देकर किसी का धर्मांतरण कराना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आयेगा. इसे गैर जमानती अपराध माना जायेगा. जबरन धर्मांतरण करानेवाले को तीन से चार साल तक की सजा और एक लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. विधेयक में लालच शब्द को भी परिभाषित किया गया है.

धर्मांतरण के लिए नकद, कोई उपहार, कोई सामग्री और आर्थिक लाभ देना लालच की श्रेणी में आयेगा. जबकि, जबरन शब्द को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाने के लिए धमकी देना और सामाजिक बहिष्कार करना के रूप में परिभाषित किया गया है.

विधेयक में तय प्रावधान के अनुसार, जबरन या प्रलोभन देकर किसी का धर्मांतरण करानेवाले को 50 हजार का जुर्माना और तीन साल की जेल की सजा मिलेगी. महिला और एससी, एसटी के मामले में सजा की अवधि बढ़ा कर चार साल और दंड की रकम एक लाख रुपये होगी. किसी भी व्यक्ति या पुरोहित को धर्मांतरण के लिए समारोह आयोजित करने के लिए पहले उपायुक्त से अनुमति लेनी होगी. ऐसा नहीं करने पर एक साल की जेल और पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है. जबरन धर्मांतरण से संबंधित किसी भी मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक के नीचे के अधिकारी नहीं करेंगे.

विधायकों और सांसदों की

गृह निर्माण समिति को 35 एकड़ जमीन

कैबिनेट ने राज्य के विधायकों व सांसदों की गृह निर्माण समिति को कांके के चुटू मौजा में 70.83 करोड़ की लागत पर 35 एकड़ जमीन देने का फैसला किया है. जमीन का मूल्य निर्धारित करने के लिए 2014 में सरकार की ओर से तय दर को आधार बनाया गया है.

एयरपोर्ट अथॉरिटी को

एक रुपये में की टोकन राशि पर जमीन

कैबिनेट ने एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी को एक रुपये की टोकन राशि पर सरकारी जमीन लीज पर देने का फैसला किया. जमीन का हस्तांतरण सबसे पहले राज्य सरकार द्वारा परिवहन विभाग को निशुल्क किया जायेगा. परिवहन विभाग जमीन का हस्तांतरण एयरपोर्ट अथॉरिटी को करेगा.

जनजातीय भाषाओं के लिए नौ सांस्कृतिक पुनरुत्थान केंद्र

कैबिनेट ने क्षेत्रीय जनजातीय भाषाओं के लिए नौ सांस्कृतिक पुनरुत्थान केंद्र बनाने का फैसला किया. हो भाषा का मुख्यालय चाईबासा, मुंडारी के लिए खूंटी, संथाली के लिए दुमका, खड़िया के लिए सिमडेगा, कुडुख के लिए गुमला, नागपुरी के लिए रांची, पंचपरगनियां के लिए बुंडु, कुरमाली के लिए सिल्ली और खोरठा के लिए बोकारो में केंद्र बनाने का फैसला किया है.

कैबिनेट के अन्य फैसले

  • एसीसी लिमिटेड को पश्चिमी सिंहभूम में चूना पत्थर खनिज के खनन पट्टा का अवधि विस्तार 50 साल के लिए
  • उपायुक्तों को आपदा प्रबंधन कोष से अग्रिम के रूप में एक करोड़ रुपये
  • अग्निशमन व होमगार्ड की नियुक्ति में नि:शक्तों के लिए क्षैतिज आरक्षण समाप्त
  • हाइकोर्ट के जजों के लिए एक लाख तक के मेडिकल बिल की मंजूरी का अधिकार मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित व्यक्ति को
  • अमड़ापाड़ा में 30 बेड वाले स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए सात करोड़
  • वृद्धावस्था पेंशन, पीडीएस, छात्रवृति सहित अन्य सेवाएं को आधार से जुड़ेंगी
  • सचिव को पांच लाख, मंत्री को 10 लाख के पुनर्विनियोग का अधिकार. वित्त मंत्री को एक करोड़ का अधिकार मिला
  • टाटा की नोवामुंडी परियोजना के क्षतिपूरक वनरोपण के लिए 57.9 करोड़ की लागत पर पालकोट में 524.23 एकड़ जमीन वन विभाग को हस्तांतरित
  • गायब डॉ मीरा कुमारी बरखास्त
  • रांची, दुमका, साहेबगंज, गिरिडीह, देवघर और गोड्डा में व्यावसायिक मोटर प्रशिक्षण संस्थान के लिए परिवहन विभाग को दी गयी 37 एकड़ जमीन नि:शुल्क झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी को देने का फैसला
  • मेदिनीनगर को नगर निगम बनाये जाने की स्वीकृति

कानून बना धर्मांतरण को नहीं रोका जा सकता : ईसाई महासंघ

राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव प्रभाकर तिर्की ने कहा कि धर्मांतरण निषेध बिल भाजपा का चुनावी स्टंट है, ताकि इसका लाभ 2019 के चुनाव में मिले़ कानून बना कर धर्मांतरण को नहीं रोका जा सकता है, क्योंकि यह आस्था व हृदय परिवर्तन की बात है़ यह सिर्फ आदिवासी के ईसाई बनने का मसला नहीं है़ आदिवासी बड़े पैमाने पर हिंदू भी बने है़ं दूसरे धर्म के लोग भी अन्य धर्म स्वीकार करते है़ं यह चलता रहता है़ इसे इसलिए भी लाया गया है, ताकि आदिवासियों को आपस में लड़ाया जा सके़

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