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बुज़ुर्ग नहीं, प्रेरणास्तंभ हैं ये शिक्षक, अनुभव से बना रहे नई पीढ़ी

Updated at : 19 May 2025 10:07 PM (IST)
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बुज़ुर्ग नहीं, प्रेरणास्तंभ हैं ये शिक्षक, अनुभव से बना रहे नई पीढ़ी

रिटायर होना सेवाकाल का विराम नहीं, बल्कि जिंदगी की दूसरी पारी की शुरुआत है.

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सेंकेट इनिंग फोटो फाइल 19आर-19-रामस्वरूप लाल खन्ना, 19आर-20-छुन्नू साव, 19आर-21-कृष्ण मोहन झा, 19आर-22-छोटू लाल मोदी संजय शुक्ला रामगढ़. रिटायर होना सेवाकाल का विराम नहीं, बल्कि जिंदगी की दूसरी पारी की शुरुआत है. जिसे वे लोग जोश व आत्मविश्वास से रहे हैं. अपने अनुभवों की पूंजी को नई पीढ़ी के साथ साझा कर रहे हैं. उन्होंने अपने जीवन में जो सीखा, समझा और जिया है उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं. हम आपको चार ऐसे बुजुर्गों से मिलवा रहे हैं, जो उम्र के दूसरे पड़ाव में बिना थके काम कर रहे है. अपनी प्रतिभा व अनुभव से युवाओं को मार्गदर्शन कर रहे है. इन चारों ने अपनी पहली पारी बतौर शिक्षक पूरी निष्ठा के साथ निभायी है. अब दूसरी पारी में समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनकर कार्य कर रहे हैं. ये शिक्षक सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रिय रूप से समाज को दिशा दे रहे हैं. आधुनिक व वैज्ञानिक पद्धति से कृषि कार्य कर रहे हैं रामस्वरूप लाल खन्ना रामस्वरूप लाल खन्ना 78 वर्ष के हैं. 31 जुलाई 2007 को मध्य विद्यालय बंदा (गोला प्रखंड) से शिक्षक के रूप में सेवानिवृत्त हुए. सेवा समाप्ति के बाद वे अपने पुश्तैनी गांव बंदा गोला में आधुनिक व वैज्ञानिक पद्धति से कृषि कार्य कर रहे हैं. साथ ही ग्रामीणों को भी कृषि कार्य के लिए प्रेरित कर रहे हैं. वे झारखंड पेंशनर कल्याण समाज के सक्रिय सदस्य हैं. वर्तमान में गोला प्रखंड के सचिव के रूप में पेंशनरों की समस्याओं के समाधान में तत्पर रहते हैं. इसके साथ ही स्वच्छता व पौधरोपण जैसे सामाजिक अभियानों में बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं. खत्री समाज के सदस्य के रूप में सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरूकता फैला रहे हैं. बढ़ते उम्र के बावजूद इन्होंने अपने सामाजिक सरोकार के दायित्व को कमजोर पड़ने नहीं दिया है. जो समाज के लिए प्रेरणादायक है. लारी में बालिकाओं की शिक्षा के लिए छुन्नू साव ने उच्च विद्यालय की स्थापना की लारी निवासी छुन्नू साव 87 वर्ष के है. 40 वर्षो बतौर सरकारी शिक्षक के रूप में योगदान दिया. सेवा निवृत्ति के बाद भी उन्होंने क्षेत्र में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना की. वे आज भी भूगोल व हिंदी विषय को इस विद्यालय में पढ़ाते हैं. साथ ही सरकारी पेंशन का 10 प्रतिशत राशि विद्यालय विकास के लिए देते हैं. वे गरीब बालिकाओं को आर्थिक सहयोग भी करते हैं. शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान लारी में उल्लेखनीय है. साथ ही सुकरीगढ़ा छठ तालाब के पास ढाई डिसमिल भूमि दान देकर सूर्य मंदिर का निर्माण कार्य भी करवा रहे हैं. उम्र को अपने उपर हावी नहीं दिया है. इससे उबरने के लिए खुद को व्यस्त रखा है. अपने समकालीन बुजुर्गों को भी सहयोग कर रहें हैं. गांव के निर्धन बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं के एम झा भरेचनगर सांडी निवासी कृष्ण मोहन झा 61 वर्ष के हैं. इन्हाेंने ने 30 वर्षो तक डीएवी में शिक्षक के रूप में सेवा दिये हैं. अग्रसेन डीएवी से सुपरवाईजरी हेड के पद से सेवा निवृत्ति हुए. इसके बाद उन्होंने दूसरी पारी बिहार के खगड़िया जिला के हरिपुर गांव में शुरू की. वहां संदीप मेमोरियल स्कूल में प्राचार्य के रूप में की है. गांव के निर्धन बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं. ग्रामीण बच्चों को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के अनुकूल बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं. बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बुनियाद के लिए मार्गदर्शन कर रहे हैं. इनके मार्ग-दर्शन से इस ग्रामीण स्कूल में बच्चों में बेहतर करने का जज्बा बढ़ा है. श्री झा का कहना है कि डीएवी में शिक्षक के रूप में काम करने के दौरान ही मेरे मन में ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के लिए कुछ करने का सपना रहा है. इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने पिछड़े ग्रामीण इलाका के स्कूल से खुद को जोड़ा है. उनका सपना है कि गांव से भी बच्चों को भी वर्तमान परिवेश के अनुसार शिक्षित बनाया. दूसरी पारी में पूरी उर्जा लगन, उत्साह व पुरूषार्थ के साथ इस कार्य को कर रहे हैं. छोटू लाल मोदी दे रहे बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा व मार्गदर्शन सौदागर मुहल्ला रामगढ़ निवासी छोटू लाल मोदी की उम्र 73 साल है. उम्र को इन्होंने अपने उपर हावी होने नहीं दिया है. उम्र के इस पड़ाव में भी वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने हुए हैं. वर्ष 2012 तक सरकारी शिक्षक के रूप में उच्च विद्यालय कोयरी टोला में सेवा दी. सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक कार्यो से जुड गये. वर्ष 2015 में रामगढ़ जिला पेंशनर समाज के सचिव का पद संभाला. इसके बाद लगातार पेंशनर समाज के आने वाली कठिनाईयों का समाधान करने में लग गये. इसके साथ ही अपने मुहल्ले के आसपास के बच्चो को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं. साथ ही बच्चो को लगातार उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं. जीवन में आगे बढ़ने के लिए बच्चो को मार्गदर्शन कर रहे हैं. परिश्रम के साथ शिक्षा ग्रहण करने से जीवन में सरलता का पाठ पढ़ा रहे हैं. इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिक संगम के होने वाले कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लेते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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