देश-विदेश में संस्कृत के प्रचार पर जोर, 17 देशों में चल रहा संस्कृत भारती का कार्य

फोटो फाइल 31आर-2- रामगढ़ में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते अखिल भारतीय संस्कृत भारती के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्रीशदेव पुजारी. | Prabhat Khabar Network
अखिल भारतीय संस्कृत भारती के प्रचार प्रमुख श्रीशदेव पुजारी ने कहा कि संस्कृत को पुनः जन-जन की भाषा बनाने के लिए देश-विदेश में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
रामगढ़: अखिल भारतीय संस्कृत भारती के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्रीशदेव पुजारी ने कहा कि संस्कृत भारती का लक्ष्य संस्कृत को पुनः जन-जन की भाषा बनाना है. इसके लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी व्यापक स्तर पर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार का कार्य किया जा रहा है. श्रीशदेव पुजारी रामगढ़ के कैथा स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में डॉ सुनील कुमार कश्यप के आवास पर यह जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि वे पांच दिवसीय झारखंड प्रवास पर हैं. इस दौरान रामगढ़, रांची, हजारीबाग, चाईबासा व जमशेदपुर में संस्कृत प्रेमियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से मिलकर विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में संस्कृत के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देंगे. उन्होंने कहा कि संस्कृत के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है. विज्ञान, कंप्यूटर, चिकित्सा, आयुर्वेद व दर्शनशास्त्र से जुड़े विशेषज्ञ भी संस्कृत का अध्ययन कर रहे हैं.
भारतीय ज्ञान-विज्ञान और प्राचीन ग्रंथों को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन आवश्यक है. उन्होंने बताया कि संस्कृत भारती देश के 843 जिलों में विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से संस्कृत के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रही है.
उन्होंने बताया कि संगठन अब तक 278 पुस्तकों का प्रकाशन कर चुका है तथा विकिपीडिया पर 12,186 से अधिक संस्कृत लेख उपलब्ध हैं. संस्कृत भारती का कार्य 17 देशों में संचालित हो रहा है. मौके पर ओमप्रकाश गुप्ता, डॉ. सुनील कुमार कश्यप व कुमारी प्रतिमा उपस्थित थीं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










