..पूरे विधि विधान से मध्यरात्रि में होगा भगवान शिव का विवाह

रामगढ़ भरेचनगर साण्डी स्थित प्राचीन शिव मदिर टूटी झरना भी शामिल है.
फूल से सजाया गया है मंदिर को फोटो फ़ाइल संख्या 24 कुजू जी: प्राचीन शिव मंदिर टूटी झरना, 24 कुजू एच: शिवलिंग पर गिरता आपरूपी जल, 24 कुजू आई: हैंडपंप से गिरता पानी, 24 कुजू जे: डैम से छलक कर पानी का मनोरम दृश्य, 24 कुजू के: लोगों के सुविधाओं के लिए बनाए गए भवन धनेश्वर प्रसाद / प्रदीप यादव कुजू. रामगढ़ भरेचनगर साण्डी स्थित प्राचीन शिव मदिर टूटी झरना भी शामिल है. यहां शिव रात्रि के दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए जुटते हैं. इसके लिए मंदिर समिति द्वारा खास तौर पर तैयारी की जा रही है. मंदिर समिति के सचिव बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मंदिर को फूल से सजाया जा रहा है. लाइट की व्यवस्था की जा रही है. जबकि 26 की मध्य रात्रि पूरे विधि विधान से भगवान शिव के पूजा अर्चना व महिलाओं के द्वारा गाए जाने वाले विवाह गीत के बीच उनका विवाह कराया जायेगा. यहां की विशेषता है कि गर्भ गृह में अवस्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक कोई और नहीं बल्कि मां गंगा स्वयं करती है. यह जलाभिषेक साल के बारह महीने और 24 घंटे होता रहता है. जहां दूर-दूर से सैलानी और श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. अंग्रेजों की खोज है यह मंदिर इस मंदिर का इतिहास 1925 से जुड़ा हुआ है. प्रचलित है कि जब अंग्रेज इस इलाके में रेलवे लाइन बिछाने का काम कर रहे थे, तब उन्हें खुदाई के दौरान जमीन के अंदर कुछ गुंबदनुमा चीज दिखाई पड़ा. इस बात को जानने के लिए पूरी खुदाई करवायी, तो यह मंदिर पूरी तरह से नजर आया. मंदिर में शिवलिंग मिला और उसके ठीक ऊपर मां गंगा की सफेद रंग की प्रतिमा मिली. प्रतिमा के नाभि से आप रूपी जल निकलता रहता है, जो सीधे शिवलिंग पर गरता है. मंदिर के अंदर प्रतिमा से स्वयं पानी निकालना एक कौतूहल का विषय बना है. नदी के सूखने के बावजूद पानी का गिरना नहीं होता बंद शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ मंदिर के पूर्वी छोर पर एक हैंडपंप लगाया गया है वह भी रहस्य से घिरा हुआ है.यहां लोगों को पानी के लिए हैंडपंप चलाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि इसे अपने आप पानी नीचे गिरता रहता है. वहीं मंदिर के पास से एक नदी गुजरी है जो गर्मी में सूख जाती है. इसके बावजूद शिवलिंग और हैंडपंप पर पानी निरंतर गिरता रहता है. पूरी होती है मुराद : उमेश पांडेय मंदिर के पुजारी उमेश पांडेय ने कहा कि मंदिर में सालों भर श्रद्धालु दूर दराज से चलकर यहां पूजा करने के लिए आते हैं. यहां की ऐसी मान्यता है कि जो भक्त टूटी झरना मंदिर भगवान शिव के अद्भुत और अलौकिक रूप का दर्शन करता है उसकी हर मुराद पूरी होती है. जबकि मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालु शिवलिंग पर गिरने वाले जल की प्रसाद को बड़े चाव के साथ अपने साथ घर ले जाते हैं जो जल उनके लिए संजीवन बूटी का काम करता है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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