इंदिरा आवास की स्थिति काफी खराब

Published at :18 Dec 2015 11:44 PM (IST)
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इंदिरा आवास की स्थिति काफी खराब

रामगढ़ : रामगढ़ जिले में इंदिरा आवास योजनाओं की स्थिति काफी खराब है. कई इंदिरा आवास योजनाएं लंबित पड़ी है. वर्ष 2007-08 की योजनाएं भी लंबित है. उक्त बातें राज्य मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी ने जिले भर में चल रहे मनरेगा व इंदिरा आवास योजनाओं की समीक्षा बैठक करने के बाद कही. उन्होंने कहा कि […]

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रामगढ़ : रामगढ़ जिले में इंदिरा आवास योजनाओं की स्थिति काफी खराब है. कई इंदिरा आवास योजनाएं लंबित पड़ी है. वर्ष 2007-08 की योजनाएं भी लंबित है. उक्त बातें राज्य मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी ने जिले भर में चल रहे मनरेगा व इंदिरा आवास योजनाओं की समीक्षा बैठक करने के बाद कही. उन्होंने कहा कि रामगढ़ उपायुक्त ने पंद्रह दिनों का समय लिया है. पंद्रह दिनों में सभी योजनाओं को स्वीकृत कर आवास सफल में एमआइएस इंट्री करा लेंगे.
चार प्रखंड की स्थिति खराब: राज्य मनरेगा आयुक्त ने समीक्षा के बाद बताया कि जिले के पतरातू, गोला व रामगढ़ प्रखंड की स्थिति मनरेगा योजनाओं के मामले में खराब है. साथ ही चितरपुर प्रखंड को बार-बार निर्देश देने के बाद भी काफी खराब है. उन्होंने कहा की जब राज्य स्तर से दबाव बनाया जाता है, तो शत-प्रतिशत एमआइएस एंट्री कर दिखाया जाता है. बाद में इसे जीरो एंट्री भी दिखती है. अधिकारी सिस्टम को बेवकूफ ना समझें. गलत एमआइएस इंट्री करना बंद करें.
मजदूरी भुगतान मामले में रामगढ़ राज्य में अव्वल: मनरेगा आयुक्त्त ने कहा की मनरेगा मजदूरों के मजदूरी भुगतान के मामले में रामगढ़ जिला पूरे राज्य में अव्वल है. रामगढ़ उपायुक्त्त द्वारा इसके लिए काफी सार्थक प्रयास किये गये हैं.
शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न कराने पर डीसी की प्रशंसा की: मनरेगा आयुक्त ने जिले में तीन चरणों में सफलतापूर्वक व शांतिपूर्ण पंचायत चुनाव कराने पर उपायुक्त ए डोड्डे समेत जिले के तमाम अधिकारियों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा की 14 वें वित्त आयोग की राशि सीधे पंचायत को देनी है. पंचायतों के गठन के बाद तत्काल यह राशि उपलब्ध करा दी जायेगी.
केरल की तर्ज पर शुरू हुआ है योजना बनाओ अभियान
आयुक्त ने बताया है की केरल की तर्ज पर झारखंड के सभी जिलों में योजना बनाओ अभियान शुरू किया गया है. इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के गांवों व टोलों में जाकर अधिकारी तथा एसआरटी प्रशिक्षण प्राप्त लोग उस गांव के 18 वर्ष से 50 वर्ष के लोगों के साथ बैठकर योजना तैयार करेंगे. इसमें आजीविका के लिए प्राकृतिक संसाधन के अलावा मुर्गी पालन, बकरी पालन के साथ-साथ दूध उत्पादन की योजनाओं को शामिल किया जायेगा.
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