मानव मन की शांति बिना वश्वि शांति नहीं

Published at :04 Dec 2015 8:49 PM (IST)
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मानव मन की शांति बिना वश्वि शांति नहीं

मानव मन की शांति बिना विश्व शांति नहींविहंगम योग समारोह का समापन 4बीएचयू-6-स्वतंत्र देव जी महाराज, 7-संत विज्ञान, 8 एवं 9-आध्यात्मिक समारोह का लाभ उठाते श्रद्धालु.भदानीनगर. विहंगम योग समारोह के संध्याकालीन सत्र में सदगुरु स्वतंत्र देव जी महाराज व संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज की आध्यात्मिक व अमृत वाणी से हजारों लोगों ने धार्मिक […]

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मानव मन की शांति बिना विश्व शांति नहींविहंगम योग समारोह का समापन 4बीएचयू-6-स्वतंत्र देव जी महाराज, 7-संत विज्ञान, 8 एवं 9-आध्यात्मिक समारोह का लाभ उठाते श्रद्धालु.भदानीनगर. विहंगम योग समारोह के संध्याकालीन सत्र में सदगुरु स्वतंत्र देव जी महाराज व संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज की आध्यात्मिक व अमृत वाणी से हजारों लोगों ने धार्मिक लाभ उठाया. स्वतंत्र देव जी ने कहा कि ब्रह्म विद्या विहंगम योग के साधन द्वारा जड़-चेतन परमाणु से परमात्मा पर्यंत सारे तत्वों का ज्ञान-विज्ञान उपलब्ध होता है. ज्ञान प्राप्ति के बाद ही सही कर्म किये जाते हैं. यही सिद्धांत एवं नियम है. उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं विवेकहीन साधन, जो गुरु का अनन्य शरण सेवक नहीं है, उसका सुष्मण-प्रवाह सदगुरु नहीं करें. स्वतंत्र जी ने कहा कि बालक के हाथ में मूल्यवान हीरा देने से वह उसके महत्व को क्या समझेगा. वह उसे कांच समझ उससे खेलेगा और उसे कहीं फेंक देगा. उसी प्रकार अनाधिकारी एवं श्रद्धा विहीन व्यक्ति सुष्मणा-प्रवाह के महत्व को क्या समझेगा? गुरु विमुखी, गुरु से द्वेष करने वाला एवं नीच व्यक्ति ब्रह्मविद्या विहंगम योग के गुप्त साधन को नहीं पा सकता है. समारोह में डॉ इंदू प्रकाश मिश्रा, सुशील मिश्रा, संतोष जी व चंदन जी द्वारा प्रस्तुत किये गये भजन ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया.साधना पद्धति से जुड़ कर जीवन को कृतार्थ करें : संत विज्ञान विहंगम योग एक चेतन विज्ञान है. जिस प्रकार भौतिक विज्ञान से भौतिक पदार्थों को जाना जाता है, उसी प्रकार चेतन विज्ञान से सभी चेतन पदार्थों की अनुभूति होती है. आत्मा व परमात्मा चेतन है. अध्यात्म का सर्वोच्च विज्ञान चेतन विज्ञान में निहित है. भौतिक विज्ञान का संबंध मात्र इंद्रियों से है. किंतु अध्यात्म का संबंध इंद्रियों से परे पदार्थों से भी है. उक्त उदगार सद गुरु सदाफल देव जी विहंगम योग संस्थान के संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने मयूर स्टेडियम भुरकुंडा में आयोजित दो दिवसीय विहंगम योग समारोह में व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि विज्ञान का कार्य प्रवृति का अन्वेषण करना है, तो अध्यात्म का कार्य आत्मा व परमात्मा का अन्वेषण करना है.

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