बाजीराम के मारे जाने के बाद कारोबारियों को मिली राहत
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रामगढ़ जिले के गोला, मांडू सहित हजारीबाग के कुछ इलाकों में था प्रभाव घाटोटांड़ : दहशत का पर्याय बन चुका नक्सली संगठन पीएलएफआइ के सरगना बाजीराम महतो उर्फ बाजीराव सिंघम की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के कारोबारियों सहित अमन पसंद लोगों ने राहत की सांस ली है. लइयो निवासी […]
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रामगढ़ जिले के गोला, मांडू सहित हजारीबाग के कुछ इलाकों में था प्रभाव
घाटोटांड़ : दहशत का पर्याय बन चुका नक्सली संगठन पीएलएफआइ के सरगना बाजीराम महतो उर्फ बाजीराव सिंघम की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के कारोबारियों सहित अमन पसंद लोगों ने राहत की सांस ली है.
लइयो निवासी भाकपा नेता बालेश्वर महतो सहित कई नेताओं व कारोबारियों को फिरौती के लिए अपहरण करने के बाद वर्ष 2011 से सुर्खियों में आये बाजीराम महतो पुलिस के लिए सिर दर्द बन गया था. बाजीराम महतो मूल रूप से विष्णुगढ़ के अचलजामो गांव का रहने वाला था. उसकी मां लइयो ढोरठाटांड़ अपने मायके में ही बस गयी. उसके पिता स्व चोला महतो यहां खेती-बारी, मेहनत व मजदूरी करते थे.
लइयो ढोरठाटांड़ में उसका छोटा सा कच्चा मकान है.
इसमें उसकी मां व छोटे भाई द्वारिका महतो की पत्नी दो बच्चों के साथ रहती है. उसका भाई द्वारिका महतो हथियार तस्करी के मामले में औरंगाबाद से गिरफ्तार हुआ था. अभी वह जेल में है. जेल जाने के बाद उसकी पत्नी बच्चों को लेकर ज्यादातर मायके में ही रहती है. बाजीराम दो भाई व एक बहन में सबसे बड़ा था.
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