सुबह से ही पुलिस छावनी में तब्दील था कोर्ट परिसर

Updated at : 22 Mar 2018 12:26 AM (IST)
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सुबह से ही पुलिस छावनी में तब्दील था कोर्ट परिसर

रामगढ़ : अलीमुद्दीन हत्याकांड को लेकर रामगढ़ व्यवहार न्यायालय में चल रहे सुनवाई के बाद 16मार्च को 11लोगों को दोषी करार दिये जाने के बाद बुधवार 21 मार्च को सजा सुनाने को लेकर जिले में उत्सुकता बरकरार थी. इसे जिला प्रशासन भी भांप गया था और सुबह से ही न्यायालय परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल […]

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रामगढ़ : अलीमुद्दीन हत्याकांड को लेकर रामगढ़ व्यवहार न्यायालय में चल रहे सुनवाई के बाद 16मार्च को 11लोगों को दोषी करार दिये जाने के बाद बुधवार 21 मार्च को सजा सुनाने को लेकर जिले में उत्सुकता बरकरार थी. इसे जिला प्रशासन भी भांप गया था और सुबह से ही न्यायालय परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गयी थी.

ब्रजवाहन तैनात थे .न्यायालय के मुख्य द्वार के साथ छोटे गेट को भी बंद रखा गया था. जिसे आवश्यकता पड़ने पर ही खोला जा रहा था. न्यायालय परिसर में मेटल डिटेक्टर से पूरी जांच पड़ताल के बाद ही लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा था. जबकि न्यायालय कक्ष में केवल वकील व परिजन सहित कोर्ट स्टाफ को ही जाने की अनुमति थी. दिन के तीन बजे सभी आरोपियों को कोर्ट कटघरे में लाया गया और न्यायाधीश ने सजा सुनायी. प्रशासन ने कोर्ट परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर रखा था.

पांच-छह माह के अंदर कोर्ट ने सजा सुनायी

अलीमुद्दीन मामले ने इतनी सुर्खी बटोरी थी कि इसकी गंभीरता का भांपते हुए हाई कोर्ट ने फास्ट ट्रेक कोर्ट नियुक्त कर दिया था. हाई कोर्ट ने 22 सितंबर 2017 को फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया था. इसी का परिणाम है कि पांच-छह माह के अंदर कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों और सबूतों की बिनाह पर फैसला सुनाया और सजा तय की. पूरे मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 19 लोगों की गवाही गुजारी, जिसमें चार लोग बयान से मुकरे. जबकि 15 लोगों ने आरोपियों के खिलाफ गवाही दी. इसके अलावा अभियोजन पक्ष ने 59दस्तावेज व 20 साक्ष्य प्रस्तुत किये. इस क्रम में घटना के दौरान बनाये गये वीडीओ फुटेज व फोटो ग्राफ आदि को आधार बनाया गया. सीडी व पेन ड्राइव पर छेडछाड़ के आरोप लगने पर इनकी एफएसएल जांच केंद्रीय प्रयोगशाला चंडीगढ़ से करायी गयी.

सजा सुनाये जाने के बाद परिजन रोने लगे

बुधवार को सजा सुनाये जाते ही रो पड़े परिजन को न्यायालय परिसर में एडीजे-वन ओमप्रकाश ने जैसे ही दोषियों को सजा पढ़कर सुनायी वैसे ही परिजनों के चेहरे पर निराशा छा गयी. कई परिजन रोने लगे. न्यायाधीश ने सभी 11 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनायी. जबकि तीन लोगों को दोहरी सजा सुनायी गयी. सजा सुनते ही परिजन भावुक हो गये. कुछ वहीं सुबकने लगे और कुछ आंखों को पोंछते हुए न्यायालय परिसर से बाहर निकल गये. परिजनों में महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी थी.

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