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Video: टाइगर रिजर्व में हिंसक हुए हाथी, 2 घंटे तक लड़ते रहे 2 टस्कर, एक की मौत

Updated at : 01 Mar 2025 7:57 PM (IST)
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Tuskers Fight in Tiger Reserve
जंगल में भिड़े 2 विशालकाय हाथी.

Tuskers Fight in Tiger Reserve: झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में 2 हाथी हिंसक हो गये. दोनों हाथियों के बीच करीब 2 घंटे तक लड़ाई चली. गंभीर रूप से घायल एक हाथी ने 5 दिन बाद शनिवार को दम तोड़ दिया.

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Tuskers Fight in Tiger Reserve| बेतला (पलामू), संतोष कुमार : पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के बेतला नेशनल पार्क में 2 नर हाथियों की भिड़ंत हो गयी. करीब 2 घंटे तक चली लड़ाई में एक हाथी घायल हो गया. पर्यटकों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी, तो विभाग की टीम सक्रिय हुई. काफी खोजबीन के बाद घायल हाथी एक जलाशय में मिला. डिप्टी डायरेक्टर के निर्देश पर घायल हाथी की पहचान कर उसका इलाज शुरू किया गया. आखिरकार शनिवार को घायल हाथी की मौत हो गयी. सुबह 8 बजे हाथी ने तेलाही पहाड़ के पास दम तोड़ दिया. लड़ाई के दौरान हाथी की चिंघाड़ से वहां मौजूद पर्यटक सहम गये.

पर्यटकों को देख घने जंगल में चले गये दोनों हाथी. हाथी की चिंघाड़ से सहम गये वीडियो बना रहे पर्यटक.

गारू पश्चिमी वन क्षेत्र में 5 घंटे चली थी हाथियों की लड़ाई

वन विभाग ने बताया है कि हाथियों की लड़ाई 5 दिन पहले हुई थी. डॉक्टर जब्बार और डॉक्टर सुनील कुमार की देखरेख में घायल हाथी का इलाज चल रहा था. नर हाथियों की लड़ाई के बाद हाथी की मौत का बेतला नेशनल पार्क में यह दूसरा मामला है. 16 फरवरी 2025 को भी पीटीआर के साउथ डिवीजन में गारू पश्चिमी वन प्रक्षेत्र में 2 जंगली हाथियों के बीच जंग छिड़ गयी थी, जो करीब 5 घंटे तक चली थी. इस लड़ाई में एक 40 वर्षीय नर हाथी की मौत हो गयी थी. दूसरा हाथी भी घायल हो गया था.

इन्हीं दोनों हाथियों के बीच हुई भिड़ंत.

2 हाथियों की मौत ने बढ़ायी वन विभाग की चिंता

पीटीआर में लगातार नर हाथियों के बीच इस तरह से हो रही जानलेवा भिड़ंत से पीटीआर प्रबंधन हैरान है. पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पीटीआर प्रबंधन ने अलर्ट जारी कर दिया है. उन कारणों की पड़ताल शुरू कर दी गयी है, जिसकी वजह से 2 दांत वाले नर हाथी आपस में उलझ रहे हैं. एक ही पखवाड़े में 2 नर हाथियों की मौत होने से विभागीय पदाधिकारी चिंता में है.

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गारू में 5 घंटे चली थी 2 टस्कर की लड़ाई

पीटीआर के गारू में नर हाथियों के बीच हुई भयानक लड़ाई में करीब 10 मीटर की परिधि का इलाका खून के छींटें से लाल हो गया. एक दर्जन से अधिक पेड़ उखड़ गये. झाड़ियां नष्ट हो गयीं. जंगल का यह इलाका मैदान में तब्दील हो गया था. हाथी के पोस्टमार्टम के दौरान देखा गया कि उसके शरीर पर अलग-अलग 6 जगहों पर बड़े-बड़े घाव थे, जो दूसरे हाथी के दांत के हमले से हुए थे.

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दोनों हाथियों के दांत में लगे थे खून

मृत हाथी के दांतों में भी खून लगे थे, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि दूसरे हाथी ने भी जमकर हमले किये. जंगली हाथियों के बीच यह लड़ाई टेरिटोरियल फाइट है या फिर मादा के लिए वो आपस में भिड़े थे, इसकी भी छानबीन की जा रही है. उम्मीद थी कि आसपास में कोई मादा हाथी रही होगी, इसके बाद ही दोनों नर हाथी आपस में लड़ने पर उतारू हो गये.

घायल हाथी को बचाने का विभाग ने पूरा प्रयास किया. 24 घंटे की निगरानी के बीच चिकित्सकों की देखरेख में उसे रखा गया. मुझे अफसोस है कि घायल हाथी को नहीं बचाया जा सका.

उमेश कुमार दुबे, रेंजर, बेतला वन क्षेत्र, पलामू टाइगर रिजर्व

पीटीआर की शान हैं जंगली हाथी

पलामू टाइगर रिजर्व में करीब 180 हाथी हैं. ये हाथी पीटीआर की शान बढ़ाते हैं. दूर-दराज से आने वाले पर्यटक बेतला नेशनल पार्क में हाथियों को जरूर देखते हैं. 15 दिन के भीतर 2 हाथियों की मौत पर वन्यजीव प्रेमियों ने चिंता जाहिर की है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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