सुदना ड्राइ जोन इलाका में एक दिन के अंतराल पर कम मात्रा में हो रही जलापूर्ति, बढ़ी परेशानी

कई माह से भरा है कुंआ, नहीं हो रही सफाई
कई माह से भरा है कुंआ, नहीं हो रही सफाई प्रतिनिधि: मेदिनीनगर सुदना जलापूर्ति योजना, जो नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आती है, आज बदहाली की स्थिति में है. इस योजना का उद्देश्य आसपास के पोषक क्षेत्र के नागरिकों को पर्याप्त और स्वच्छ जल उपलब्ध कराना था, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है. फिल्टर की व्यवस्था का अभाव, कुआं की सफाई न होना और प्रशासनिक उदासीनता ने इस योजना को लड़खड़ा कर दिया है. जलापूर्ति की वर्तमान स्थिति वर्तमान समय में इस योजना से एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है. नागरिकों के अनुसार पानी की आपूर्ति मुश्किल से 10 से 15 मिनट तक ही होती है. फरवरी माह से जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है और गर्मी के दिनों में संकट और गहरा जाता है. यह इलाका पहले से ही ड्राइ जोन के रूप में चिन्हित है, ऐसे में जलापूर्ति की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए थी. नगर निगम प्रशासन की उदासीनता इस संकट का मुख्य कारण है. लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ. कुआं की सफाई करीब दो वर्षों से नहीं करायी गयी, जिसके कारण बालू भर जाने से जलमीनार तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है. मई 2025 से लगातार सफाई की मांग उठ रही है, लेकिन निगम प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. मरम्मत कार्यों में भी लापरवाही साफ दिखती है. जब मोटर खराब हुई तो नया स्टार्टर लगाने के बजाय दूसरे मोटर का स्टार्टर इस्तेमाल किया गया. इस तरह अस्थायी उपायों से काम चलाया जा रहा है. मरम्मती के नाम पर राशि की निकासी तो होती है, लेकिन व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जाता. प्रभावित क्षेत्र और जनसंख्या इस जलापूर्ति केंद्र से वार्ड दो के अघोर आश्रम रोड, सुखवन टांड, पंचवटी नगर, पटेल नगर, आजाद नगर, राजनगर, वार्ड 10 के जगनारायण पथ, गौतमबुद्ध नगर एवं शांतिपुरी मुहल्ला में पानी की आपूर्ति की जाती है. यहां लगभग 1200 से अधिक पानी कनेक्शनधारी हैं और 10 हजार से अधिक आबादी इस योजना से लाभान्वित होनी चाहिए थी. लेकिन वास्तविकता यह है कि नागरिकों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा. – बबलू तिवारी (पटेल नगर) ने कहा कि जलापूर्ति के नाम पर केवल खानापूरी की जा रही है. ड्राइ जोन इलाके में बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही से लोगों की परेशानी बढ़ रही है. – धनंजय पांडेय ने बताया कि पिछले एक वर्ष में मुश्किल से 60 से 70 दिन ही पानी की आपूर्ति हुई है. इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर टैक्स जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है. – सुशीला कुमारी (पूर्व पार्षद) ने कहा कि निगम प्रशासन मनमाने तरीके से काम कर रहा है. यदि जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो जनता आंदोलन के लिए गोलबंद होगी. पंचायत से निगम तक का सफर सुदना पूर्वी और पश्चिमी पंचायत में पानी आपूर्ति के लिए यह योजना बनी थी. वर्ष 2017 में दोनों पंचायत नगर निगम में शामिल हो गए. इसके बाद संचालन की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन के पास आ गयी, लेकिन निगम प्रशासन ने इसे सुचारू रूप से संचालित करने में गंभीरता नहीं दिखायी.
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