मेदिनीनगर निगम में डॉग स्टरलाइजेशन भुगतान पर सवाल, बकरे के अंग दिखाकर बिल पास कराने का आरोप

फाइल फोटो | Prabhat Khabar Network
मेदिनीनगर नगर निगम पर कुत्तों की नसबंदी के नाम पर बकरे के अंग दिखाकर 1.48 करोड़ रुपये के भुगतान का गंभीर आरोप लगा है. मामले की जांच शुरू हो गई है.
शिवेंद्र कुमार : मेदिनीनगर
नगर निगम मेदिनीनगर के द्वारा तीन साल में 9106 कुत्ता का स्टेरलाइजेशन, एंटीरेबीज वैक्सीन व डीवार्मिंग किया गया है. यह काम मध्य प्रदेश की एनजीओ द केयर आफ एनिमल सोसायटी के द्वारा किया गया था. जिसके लिए फरवरी तक नगर निगम के द्वारा एक करोड़ 48 लाख र का भुगतान किया जा चुका है. अभी भी एक हजार कुत्ते का भुगतान नहीं किया गया है. फरवरी के बाद से इसके भुगतान पर रोक लगा दी गई है. कुछ दिन पहले निगम की बैठक में इस मामले को लेकर वार्ड कमिश्नर के द्वारा उठाया गया था. कई वार्ड कमिश्नर का आरोप है कि बकरा व बकरी का आर्गन दिखाकर भुगतान किया गया है.
प्रत्येक कुत्ता पर 1850 पर किया जाता था भुगतान
कुत्ता के स्टेरलाइजेशन, एंटीरेबीज वैक्सीन व डिवर्मिंग का काम जुलाई 2023 में शुरू किया गया था. द केयर ऑफ़ एनिमल सोसायटी को दिया गया था. इससे तीन साल के लिए निगम के द्वारा एग्रीमेंट किया गया था. जिनका एग्रीमेंट जुलाई 26 में खत्म हो जायेगा. प्रत्येक कुत्ता के लिए निगम के द्वारा 1850 रुपए का भुगतान किया जाता है. फरवरी 26 तक 8000 कुत्ते के बदले एक करोड़ 48 लाख रुपया का भुगतान किया जा चुका है. जबकि एनजीओ के द्वारा 9106 कुत्ते का बिल दिया गया है. बाकी करीब 1000 कुत्ते का बिल का पैसा निगम को भुगतान करना है.
कुत्ता के बदले बकरा का आर्गन दिखाकर लिया भुगतान का लगाया गया है आरोप
नगर निगम के कई वार्ड कमिश्नर के द्वारा आरोप लगाया गया है कि बकरा का आर्गन दिखाकर कुत्ता का पेमेंट ले लिया गया है. नाम न छापने की शर्त पर एक वार्ड कमिश्नर ने बताया कि शहर के कई मीट दुकान से बकरा का आर्गन लिया जाता था. उसे एनजीओ के द्वारा कुत्ता का आर्गन बताया जाता था.
पांच सदस्यीय कमेटी जांच करती थी आर्गन
एनजीओ के प्रबंधक ने बताया कि आर्गन जांच के लिए सिटी मैनेजर स्मिता, सतीश कुमार, अकाउंटेंट आलोक कुमार, विनोद कुमार व इशतेयाक के द्वारा जांच किया जाता था. उसके बाद भुगतान किया जाता था.
एनजीओ के डॉक्टर करते थे स्टेरलाइजेशन
एनजीओ के डा सुनील कुमार ने बताया कि उनके द्वारा स्टेरलाइजेशन का काम किया जाता था. कहा कि जिन लोगों के द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि कुत्ता के बदले बकरा व बकरी का आर्गन दिखाकर भुगतान किया गया है.बिल्कुल गलत आरोप है. कहा कि पांच सदस्यीय कमेटी की जांच करने के बाद भुगतान किया जाता था.
लगाया गया आरोप गलत है : प्रबंधक
द केयर ऑफ एनिमल सोसायटी के प्रबंधक मनीष कुमार सिंह ने कहा कि लगाए गए सभी आरोप गलत है. कुत्ता व बकरा के आर्गन काफी अलग होते हैं. बताया कि बकरा का आर्गन बड़ा होता हैं. कहा कि प्रत्येक महीने के अंत में मानिटरिंग टीम के सामने काउंटिंग होता था. उसके बाद डिस्पोज कर दिया जाता था. उसके बाद भुगतान की प्रक्रिया की जाती थी. कहां की जो प्रेग्नेंट फीमेल कुत्ता होता है. उसका उस दौरान नसबंदी नहीं किया जाता है. बच्चा देने के बाद ही उसका नसबंदी किया जाता है.
फरवरी से भुगतान पर रोक लगा दिया गया है : मेयर
नगर निगम की मेयर अरुण शंकर ने कहा कि फरवरी से भुगतान पर रोक लगा दिया गया है. अब नये सिरे से इसका टेंडर किया जायेगा. कहा कि हर जिले में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर स्थापित किए जाने का सुझाव माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है. जहां आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण व देखभाल किया जायेगा. नगर निगम भी जल्द एबीसी सेंटर स्थापित करेगा. सभी संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार करेगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










