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सपने में भी नहीं सोचा था कि गांव का दर्द जानने मंत्री, सांसद और अफसर आयेंगे मंत्री की पहल

Updated at : 15 Jan 2025 8:47 PM (IST)
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सपने में भी नहीं सोचा था कि गांव का दर्द जानने मंत्री, सांसद और अफसर आयेंगे मंत्री की पहल

उग्रवाद प्रभावित इलाका के रूप में चिह्नित चेतमा गांव में विकास की गति तेज होने की उम्मीद बढ़ी है.

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पाटन. प्रखंड के सुदूरवर्ती व कभी उग्रवाद प्रभावित इलाका के रूप में चिह्नित चेतमा गांव में विकास की गति तेज होने की उम्मीद बढ़ी है. आजादी के बाद आज तक इस गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं. लोग बदहाली का जीवन जी रहे हैं. पाटन विधानसभा क्षेत्र में लगातार छठी बार विधायक बनने के साथ इस बार जब राधाकृष्ण किशोर मंत्री बन गये, तब लोगों को ऐसा लगने लगा था कि इस बार उनके दिन बहुरेंगे. मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी यह ठान लिया है कि चेतमा गांव का विकास करना है. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 14 जनवरी को वह दिन आ गया, जब राज्य के वित्त सह संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर, सांसद वीडी राम, पलामू डीसी शशि रंजन, डीडीसी शबीर अहमद, पलामू एसपी रीष्मा रमेशन समेत जिले अन्य कई पदाधिकारी, प्रखंड के पदाधिकारी एक साथ पहुंचे. दलगत भावनाओं से अलग हट कर पिछड़े इलाका के विकास के लिए ग्रामीणों की समस्याओं को जानने के लिए एक मंच पर आये. लोगों का कहना था कि पूर्व में ऐसा देखने को नहीं मिला. परस्पर विरोधी दल के होने के बाद भी कांग्रेस के मंत्री राधाकृष्ण किशोर और भाजपा के सांसद विष्णुदयाल राम ग्रामीणों की समस्याओं को जानने व उसे दूर करने के लिए एक मंच पर मौजूद रहे और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया. ग्रामीण चेतमा के धनु यादव ने कहा कि उन लोगों ने स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि गांव में मंत्री, सांसद, जिला व प्रखंड के सभी पदाधिकारी पहुंचेंगे. गांव के विकास की बात गांव में बैठक कर की जायेगी. लेकिन वित्त मंत्री द्वारा गांव के विकास की नींव रखी गयी है. उसकी ग्रामीणों द्वारा जितनी भी तारीफ की जाये, कम है. बुका गांव की अगलतिया देवी ने गांव में बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा की मांग की. कसवाखांड़ की पंसस सबिता देवी ने बताया कि क्षेत्र में कई समस्याएं हैं. विद्यालय में नियमित शिक्षक नहीं आते हैं. आंगनबाड़ी बंद रहता है. क्षेत्रीय लोगों की बहाली की जाये. जिससे नियमित आंगनबाड़ी केंद्र खुले और इसका लाभ ग्रामीणों को मिल सके. अन्य ग्रामीणों ने कहा कि गांव में स्वास्थ्य सुविधा नहीं. आदिम जनजाति के लोगों को डाक सेवा के माध्यम से राशन घर तक नहीं पहुंचाया जाता है. जिस पर वित्त मंत्री ने डाक सेवा के माध्यम से आदिम जनजाति के लोगों के घरों तक राशन पहुंचाने के लिए बीडीओ को कहा. करीब सात किलोमीटर पहाड़ चल कर इस गांव तक पहुंचा जाता है. मंत्री, सांसद व प्रशासनिक महकमा के यहां पहुंचने को लेकर जेसीबी की मदद से पहाड़ी रास्ते को दुरुस्त कराया गया था. इसके बाद चार पहिया वाहन पहुंच पाया था. काफिला पहुंचने पर इस गांव के बच्चे काफी खुश दिखे. मंत्री किशोर के प्रयास से गांव की तस्वीर बदलने की उम्मीद जगी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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