भीमचूल्हा पर्यटक स्थल पुजारी और सेवक के भरोसे, सुरक्षा के नहीं हैं स्थायी इंतजाम

Author Deepak
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भीमचूल्हा पर्यटक स्थल पुजारी और सेवक के भरोसे, सुरक्षा के नहीं हैं स्थायी इंतजाम

पलामू जिला का प्रसिद्ध भीमचूल्हा पर्यटक स्थल, जहां पर रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं

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प्रतिनिधि, मोहम्मदगंज

पलामू जिला का प्रसिद्ध भीमचूल्हा पर्यटक स्थल, जहां पर रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं, आज भी पुजारी और मंदिर सेवक के भरोसे चल रहा है. बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद तथा छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से सटे इस सीमावर्ती क्षेत्र तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा तो है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से नदारद है. सरकार द्वारा इस स्थल को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने की योजना पर काम अंतिम चरण में है. डीसी स्तर की बैठक में इस स्थल के कायाकल्प की बात कही गयी है, जिसमें भौराहा पहाड़ की ऊंची चोटी पर स्थित आइबी (इंस्पेक्शन बंगला) को विकसित करना भी शामिल है. हालांकि, इस पूरे क्षेत्र में स्थायी पुलिस चौकी या सुरक्षा बल की तैनाती नहीं है, जिससे पर्यटक असुरक्षित महसूस करते हैं. स्थानीय पुजारी गंगा तिवारी और सेवक सतेंद्र चंद्रवंशी सुबह से शाम तक मंदिर परिसर में रहकर श्रद्धालुओं को सहयोग करते हैं, पूजा-अर्चना कराते हैं और महाभारतकालीन इस स्थल की कथाएं सुनाते हैं. लेकिन वे भी बताते हैं कि शाम ढलते ही सुरक्षा के अभाव में उन्हें घर लौटना पड़ता है और उसके बाद स्थल वीरान हो जाता है.

न नौका विहार शुरू, न तड़ित चालक लगा

हालांकि, पर्यटक स्थल पर 63 केवी का ट्रांसफॉर्मर, बिजली के खंभे और वायरिंग, और एक मास्ट लाइट लगाने का कार्य पूरा हो चुका है. जल्द ही यहां बिजली की व्यवस्था सुचारू हो जायेगी और स्थल रात में भी रोशनी से जगमगाने लगेगा. साथ ही नौका विहार (बोटिंग) की सुविधा भी शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है. तड़ित चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) अब तक नहीं लगाये जाने से बारिश के समय आकाशीय बिजली से पर्यटकों की सुरक्षा को खतरा बना रहता है. यह विशेष रूप से एक ऊंचे स्थल होने के कारण जरूरी सुरक्षा उपकरण है, जिसकी अब तक अनदेखी की गयी है.

लाभुक समिति का गठन लंबित

वर्ष 2021 में इस स्थल को आधिकारिक रूप से पर्यटक स्थल घोषित किया गया था. विकास कार्यों में प्रारंभिक तौर पर करीब ₹35 लाख खर्च किये गये. घेराबंदी और बिजली का कार्य पूरा हो गया है. लेकिन आज तक यहां स्थानीय लाभुक समिति का गठन नहीं हुआ है, जो पर्यटन स्थल प्रबंधन के लिए आवश्यक होता है. ब्लॉक स्तर से गठित की जाने वाली इस समिति के पदेन सचिव बीडीओ होते हैं, लेकिन अब तक किसी समिति का गठन नहीं होने से स्थल प्रबंधन अनियंत्रित है.

स्थानीयों की मांग

स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने सरकार से मांग की है कि स्थानीय पुलिस चौकी, तड़ित चालक की व्यवस्था और स्थायी देखरेख समिति का गठन शीघ्र किया जाये, ताकि भीमचूल्हा पर्यटन स्थल पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित हो सके. गंगा तिवारी, पुजारी का कहना है कि हम हर दिन आते हैं, पूजा कराते हैं. सैलानियों को पूरा सहयोग देते हैं, लेकिन हमारी खुद की कोई सुरक्षा या सुविधा तय नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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