सर्दी में भी शहर में गहराया जल संकट

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मेदिनीनगर : चुनावी सरगर्मी के बीच मेदिनीनगर में गहराया जल संकट ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है. पिछले एक माह से शहरी जलापूर्ति योजना से जुड़े शहर के लोगों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है. कहा जा रहा है कि लगभग एक सप्ताह से जलापूर्ति पूरी तरह से ठप हो चुकी है. […]

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मेदिनीनगर : चुनावी सरगर्मी के बीच मेदिनीनगर में गहराया जल संकट ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है. पिछले एक माह से शहरी जलापूर्ति योजना से जुड़े शहर के लोगों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है. कहा जा रहा है कि लगभग एक सप्ताह से जलापूर्ति पूरी तरह से ठप हो चुकी है. छठ महापर्व में भी लोगों को जल संकट झेलना पड़ा.

आपके शहर में

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सर्दी के मौसम में भी जल संकट यह बताने के लिए काफी है कि गर्मी के मौसम में किस तरह की संकट लोग झेल रहे होंगे. मेदिनीनगर नगर पर्षद से प्रमोट होकर 28 अप्रैल 2018 को ही मेदिनीनगर नगर निगम अस्तित्व में आ चुका है.

अपनी पहली वर्षगांठ मनाकर निगम दूसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. ऐसे में लोगों की उम्मीद निगम से जुड़ी है. लेकिन पानी के सवाल पर निगम अभी तक फेल साबित हुई है. इस समस्या के लिए पेयजल व स्वच्छता विभाग भी अपने आप को जिम्मेवार नहीं मानती. कार्यपालक अभियंता साफ शब्दों में कहते है कि जो भी जानना है निगम से पूछिए. विभाग की कोई जिम्मेवारी नहीं है. बरहाल जिम्मेवार कौन है, यह अलग बहस का विषय है. लेकिन अभी की जो स्थिति है, उसमें पिछले एक सप्ताह से शहर में जलापूर्ति का काम ठप
पड़ा है.
पानी के सवाल पर छिड़ी निगम और पीएचइडी के जुबानी जंग : पानी के सवाल पर निगम व पीएचइडी के बीच जुबानी जंग छिड़ गयी है. निगम ने इसके लिए विभाग को जिम्मेवार ठहराया, तो विभाग ने निगम पर ही सारा दोष डाल दिया.
14 वर्षों से लटकी है शहर की फेज टू जलापूर्ति की योजना : जब निगम नहीं बना था, तब शहर को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए वृहद शहरी जलापूर्ति योजना वर्ष 2002-03 में तैयार की गयी थी. फेज वन का कार्य का उद्घाटन एक मई 2005 को हुआ है. तब से लेकर फेज टू जलापूर्ति की प्रक्रिया चल रही है. लेकिन इस योजना को पूरा होना तो दूर अभी ढंग से शुरू भी नहीं हो पाया है.
इस बीच मेदिनीनगर शहर का दायरा बढ़ गया. फेज टू के साथ-साथ फेज थ्री की योजना के सर्वे का काम भी पूरा हो गया. लेकिन मामला लटका हुआ है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इन योजनाओं को अधर में लटके रहने के लिए जिम्मेवार कौन है.
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